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फिर हादसा, फिर सवाल: कागजी नियमों से सुरक्षा नहीं, जमीनी स्तर पर सख्त और निरंतर औचक निरीक्षण सबसे जरूरी कदम
Sat, 26 Sep 2026 05:01 AM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: न्यूज डेस्क
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:01 AM IST
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ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा: यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग, जिसमें नौ यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई, निश्चित रूप से गंभीर लापरवाही और सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन का मामला है। दिल्ली से महोबा जा रही इस बस में यदि बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो इतने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान नहीं होता।
इस बस के आपातकालीन निकास द्वार भी जाम पाए गए, जिससे स्पष्ट है कि सुरक्षा नियमों में घोर लापरवाही बरती गई। यही नहीं, यात्रियों ने बस में जलने की गंध महसूस होने की जानकारी चालक व परिचालक को दी थी, इसके बावजूद उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। जब आग तेजी से फैलने लगी, तो बस रोककर यात्रियों को बाहर निकलने के लिए कहा गया।
अफरा-तफरी में बीस से अधिक लोगों ने कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन नौ लोग अंदर ही फंसे रह गए। इसके अलावा, इस लग्जरी बस में अवैध रूप से थिनर, पेंट या अन्य ज्वलनशील पदार्थ और भारी व्यावसायिक सामान ले जाया जा रहा था, जिस वजह से आग तेजी से भड़की। शुरुआती जांच से यह भी पता चला है कि इस बस के खिलाफ पहले से ही 19 चालान लंबित थे, जिससे स्पष्ट है कि इसे नियमों की अनदेखी करके चलाया जा रहा था, जो परिवहन विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
यह बस में आग लगने की कोई पहली घटना नहीं है, जिसमें यात्री संघर्ष करते हुए जान गंवाने को मजबूर हुए हों। देश में हर साल बसों में आग लगने जैसी दुर्घटनाएं बड़ी संख्या में होती हैं, जिनमें काफी लोगों की जान चली जाती है। इस मामले में, उत्तर प्रदेश बेहद संवेदनशील राज्य है, जहां के एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और बसों में अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण बड़े हादसे होते रहे हैं।
रस्मी तौर पर हर बार हादसे के बाद जांच होती है, मुआवजे की घोषणाएं होती हैं, कुछ अधिकारी निलंबित भी किए जाते हैं, दोषी चालक को गिरफ्तार किया जाता है, फिर अगले हादसे तक मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मृतकों के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने की घोषणा हुई है, तथा आरोपी चालक एवं परिचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
लेकिन, वास्तव में अगर ऐसे हादसों पर रोक लगानी है, तो उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी नकेल कसनी होगी, जो इतने चालानों के बावजूद बस को खुलेआम चलने दे रहे थे। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और निरंतर औचक निरीक्षण की सबसे ज्यादा जरूरत है।