GDP: देश की अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के महत्वपूर्ण सवाल, सत्ता पक्ष के सतर्क जवाब
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विस्तार
पिछले हफ्ते एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में अचानक संसद के दोनों सत्रों की अवधि में कटौती कर दी गई और दोनों सदन 23 दिसंबर, 2022 को स्थगित कर दिए गए। ऐसा लग रहा था कि विपक्ष के बजाय सरकार सत्र को जल्द खत्म करने के लिए उत्सुक थी।
राज्यसभा के स्थगित होने से पहले— यह भी अप्रत्याशित तरीके से हुआ— वित्त वर्ष 2022-23 की पूरक अनुदान मांगों और 3,25,756 करोड़ रुपये (अतिरिक्त नकद व्यय) तथा 1,10,180 करोड़ रुपये (जहां व्यय का मिलान बचत से किया जाएगा) के व्यय को अधिकृत करने के लिए विनियोग विधेयक पर चर्चा चल रही थी। इस बहुत बड़ी राशि में देश के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में रणनीतिक और सीमावर्ती सड़कों के निर्माण के लिए रक्षा पूंजीगत व्यय के लिए 500 करोड़ रुपये की एक छोटी राशि भी शामिल थी।
मैंने बहस की शुरुआत की। मैं नहीं चाहता था कि यह एक और निष्फल बहस साबित हो, जिनमें विपक्ष के पास सवाल तो होते हैं, लेकिन सरकार के पास कोई जवाब नहीं होता।मैंने पिछले अनुभव को दरकिनार किया और उम्मीद की कि इस बार ऐसा नहीं होगा। यकीकन इस बार यह अलग था। सवाल थे और, मेरे सुखद आश्चर्य के लिए उनके जवाब भी थे— कुछ अस्पष्ट, कुछ सतर्क और कुछ अनुत्तरदायी। सवालों और जवाबों का बारीक विश्लेषण रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम राजन की आशंका को ही पुष्ट करेगा कि 2022-23 में वृद्धि सुस्त रहेगी और 2023-24 में अर्थव्यवस्था को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
अब मेरे सवाल और सम्माननीय वित्तमंत्री के जवाब देखिए :
1. चूंकि बजट दस्तावेज में 2022-23 में 11.1 फीसदी की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि सांकेतिक दर का अनुमान व्यक्त किया गया है, मुद्रास्फीति की दर क्या होगी और वास्तविक जीडीपी विकास दर क्या होगी?
(यह एक सामान्य नियम है कि मुद्रास्फीति दर + वास्तविक वृद्धि दर = सांकेतिक वृद्धि दर)।
इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया। कोई आंकड़े नहीं दिए गए। निस्संदेह, मेरे दूसरे सवाल पर वित्तमंत्री ने संकेत दिया कि सांकेतिक वृद्धि दर उच्च हो सकती है, लेकिन उन्होंने आंकड़ों के ब्योरे नहीं दिए। यह संतोषजनक जवाब नहीं था।
2. सरकार 3,25,756 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि कैसे जुटाएगी?
(अ) सरकार के पास पहले से ही धन है, क्योंकि उसने बजट अनुमानों से अधिक राजस्व एकत्र किया है;
(ब) सरकार और उधार लेगी;
(स) सरकार को आशा है कि सांकेतिक विकास दर 11.1 प्रतिशत से अधिक होगी और इसलिए, भले ही वह अधिक उधार लेती है और अधिक खर्च करती है, वह 6.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करेगी;
(द) इनमें से कोई नहीं।
वित्तमंत्री ने अपना यह संकल्प दोहराया कि 6.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य की सीमा को नहीं लांघा जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस समय कर संग्रह बजट अनुमानों से अधिक है।
सरल भाषा में कहें, तो सरकार उम्मीद कर रही है कि उछाल वाले राजस्व से 3,25,756 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी। यह आशा और सकल घरेलू उत्पाद की उच्च सांकेतिक वृद्धि दर सरकार को एक अच्छी स्थिति में ला देगी। यह एक सतर्क जवाब था, जिसमें गुंजाइश है कि 2022-23 की तीसरी और चौथी तिमाही में विकास की गति धीमी हो सकती है।
3. 2013-14 में कॉरपोरेट कर राजस्व सकल कर राजस्व (जीटीआर) का 34 फीसदी था। 2022-23 में, कॉरपोरेट कर राजस्व, बजट के अनुसार, जीटीआर का केवल 26 फीसदी होगा। आठ फीसदी (मोटे तौर पर, 2,50,000 करोड़ रुपये) के उपहार के बावजूद, निजी कॉरपोरेट क्षेत्र निवेश क्यों नहीं कर रहा है?
वित्तमंत्री ने निवेश के आंकड़े सूचीबद्ध किए (ज्यादातर तो वादे ही किए, मसलन 14 क्षेत्रों में शुरू की गई पीएलआई-प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव- योजना) की सूची तो दी, लेकिन निजी कॉरपोरेट क्षेत्र की सराहना नहीं की। न ही वित्तमंत्री ने उन्हें झिड़का, जैसा कि उन्होंने सर्वोच्च सदनों को संबोधित करते समय किया था। साफ था कि वह इंतजार करो और देखो के मूड में थीं। धीमी मांग, मुद्रास्फीति, बढ़ती ब्याज दरों, अप्रयुक्त क्षमता और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण, निजी क्षेत्र देखो और इंतजार करो के मूड में है। प्रतीक्षा करने और देखने, इन दोनों के साथ, यह निवेश के मोर्चे पर असंतोष का वर्ष होगा।
4. विकास के चार इंजनों में से, सरकारी व्यय के अलावा, कौन से आशाजनक इंजन हैं?
वित्तमंत्री निजी निवेश को लेकर सतर्क थीं। उन्होंने निजी खपत का जिक्र नहीं किया। उन्होंने निर्यातों को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन हम जानते हैं कि व्यापार घाटा बढ़ रहा है। यह अनुत्तरदायी जवाब था।
5. जीडीपी वास्तव में 1991-92 से 2003-04 के दौरान 12 सालों में दोगुना हुई थी। इसके बाद अगले दस वर्षों में 2013-14 तक यह फिर दोगुना हो गई। क्या आपकी सरकार आपके शासन के 10 साल के अंत में वास्तविक जीडीपी को दोगुना कर देगी?
वित्तमंत्री अवाक रह गईं। वह हां नहीं कह सकती थीं, वह ना कहने में संकोच कर रही थीं। मेरा अनुमान है कि सरकार 200 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से पीछे रहेगी।
6. चूंकि आप रक्षा पूंजीगत व्यय के लिए पांच सौ करोड़ रुपये चाहते हैं, क्या आप हमें यह बताएंगी कि क्या चीन हॉट स्प्रिंग्स में किसी बात के लिए सहमत हुआ है; क्या चीन देपसांग और डेमचोक से सैनिक हटाने को तैयार हो गया है; क्या चीन ने सड़कें, बांध, संचार नेटवर्क, हेलीपैड्स और अन्य निर्माण जैसा भारी-भरकम ढांचा खड़ा किया है और एलएसी के नजदीक बड़ी संख्या में उसके बल और हथियार तैनात हैं; क्या बफर जोन बनाने का मतलब यह है कि भारतीय सैनिक उस क्षेत्र में गश्त नहीं लगाएंगे; और क्या प्रधानमंत्री ने बाली में राष्ट्रपति शी के सामने ये मुद्दे उठाए?
चूंकि चीन शब्द का जिक्र नहीं किया जा सकता, वित्तमंत्री ने चुप्पी साध ली।
प्रिय पाठक, ऐसी है अर्थव्यवस्था की दशा, भारत-चीन सरहद की स्थिति और संसद में बहस का स्तर।