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दुनिया की पहली कार्बन मुक्त राजधानी: 2050 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य… इस शहर के तरीकों से सीखना जरूरी
Tue, 10 Dec 2024 06:35 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला
अमर उजाला
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 10 Dec 2024 06:35 AM IST
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शून्य कार्बन उत्सर्जन के मामले में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन दुनिया के सामने मिसाल
- फोटो :
एनएनआई / रॉयटर्स
विस्तार
डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन दुनिया की पहली ‘कार्बन न्यूट्रल’ राजधानी बनने जा रही है। अन्य राजधानियों ने जहां 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, वहीं कोपेनहेगन 2025 तक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले डेढ़ दशक से जुटा है। वर्ष 2009 में वहां नई जलवायु योजना लागू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य 2025 तक दुनिया का पहला कार्बन मुक्त राजधानी-महानगर बनाना है।
कोपेनहेगन एक कार्बन तटस्थ शहर के रूप में वैश्विक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए हरित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने, ऊर्जा आपूर्ति को टिकाऊ स्रोतों में बदलने, इमारतों में हरित प्रौद्योगिकी के समावेशन, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार और परिवहन एवं सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे इस शहर की जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी पूर्ण भागीदारी हो।
गौरतलब है कि कोपेनहेगन का जिला हीटिंग नेटवर्क दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिला हीटिंग प्रणाली है, जो इस शहर की 98 प्रतिशत इमारतों को गर्म करने का काम करता है। इस प्रणाली को चलाने के लिए कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त कर बायोमास (जैव ईंधन) का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी तरफ वहां की इमारतों को ठंडा करने के लिए बंदरगाह से पानी लिया जाता है, जिसके लिए व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क स्थापित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, 100 पवन टर्बाइन, हजारों वर्ग मीटर के सौर पैनल और जैविक अपशिष्टों का बायोगैसीकरण, जैसे कदम इस लक्ष्य को साकार कर रहे हैं। वहीं, कोपेनहेगन ने 2025 तक 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है। कोपेनहेगन में पवन और भूतापीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर है। यही नहीं, वहां 75 प्रतिशत यात्राएं पैदल या सार्वजनिक परिवहन द्वारा की जाती हैं। वहां 2025 तक शहर की अधिकांश कारें बिजली, हाइड्रोजन या जैव ईंधन पर चलेंगी। इस शहर को साइकिल से घूमने के अनुकूल भी बनाया गया है, जिससे अधिकांश लोग साइकिल की यात्रा को प्राथमिकता देते हैं।
शहर की जलवायु योजना में हरित शिक्षा और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्मचारियों और श्रमिकों को भी पर्यावरण-अनुकूल कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों जैसे किंडरगार्टन और अस्पतालों में कम मांस परोसने जैसी नीतियां लागू की गई हैं, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इन समग्र प्रयासों के माध्यम से कोपेनहेगन न केवल एक हरित और स्मार्ट शहर बनने की दिशा में बढ़ रहा है, बल्कि यह टिकाऊ विकास के लिए वैश्विक प्रेरणा भी बन रहा है। कोपेनहेगन का मॉडल यह स्पष्ट करता है कि शहरीकरण और सतत विकास परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि सही दृष्टिकोण और योजनाबद्ध प्रयासों के माध्यम से इन्हें एक-दूसरे का पूरक बनाया जा सकता है।