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पर्यटन में चिकित्सा यात्रा का बढ़ता दायरा: भारत आर्थिक शक्ति बन सकता है, सामाजिक शक्ति की पहचान का रास्ता क्या?

Tue, 13 Oct 2026 09:11 AM IST
P.S. Vohra पी. एस वोहरा
Updated Tue, 13 Oct 2026 09:11 AM IST
सार

चिकित्सा पर्यटन में भारत आर्थिक शक्ति बन सकता है, लेकिन उसकी सामाजिक शक्ति की पहचान इलाज की दूरी कम करने से ही होगी।

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Expanding Scope of Medical Tourism India Can Become Economic Power know Path of Recognition as Social Power
भारत में पर्यटन की तस्वीर बदल रही है - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में पर्यटन की तस्वीर बदल रही है। अब हर तीसरी यात्रा चिकित्सा के कारण है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के जुलाई 2025 से जून 2026 के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, 29.6 प्रतिशत यात्राएं स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से संबंधित रही हैं। हालांकि घरेलू यात्राओं में सबसे अधिक आंकड़ा (47.7 प्रतिशत) धार्मिक और तीर्थ यात्राओं का है। चिकित्सा के लिए होने वाली हर यात्रा एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्यों लोगों को उपचार के लिए यात्रा करनी पड़ रही है?

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हालांकि इसका आर्थिक महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में भारतीयों ने देश के भीतर यात्रा और पर्यटन पर लगभग 17.7 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो भारतीयों के कुल वार्षिक यात्रा एवं पर्यटन व्यय का करीब 86 प्रतिशत था। जाहिर है, भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार स्वयं भारतीय हैं।
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उपचार के लिए अपना शहर छोड़ कर दूसरे शहर जाना स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच का सवाल है। इस सर्वे के अनुसार, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा यात्रा पर औसत खर्च ग्रामीण क्षेत्र में 29,454 रुपये और शहरी क्षेत्र में 41,649 रुपये रहा। ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी यात्रा व्यय में लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा उपचार और दवाइयों पर गया, जबकि सरकारी प्रतिपूर्ति केवल 8.2 प्रतिशत रही। यात्रा, ठहरने, भोजन और साथ जाने वाले परिजन की आय का नुकसान अलग है। यानी बीमारी की कीमत केवल अस्पताल में नहीं चुकाई जाती, अस्पताल तक पहुंचने की दूरी भी परिवार की आर्थिक कीमत बढ़ाती है।
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ग्रामीण भारत में यह समस्या और स्पष्ट है। रात्रि विश्राम वाली घरेलू यात्राओं में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा यात्राओं की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत है, जबकि शहरों में ये 16.5 प्रतिशत है। एक अन्य तथ्य यह भी है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल मिलकर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा यात्राओं में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं। विशाल आबादी इसका एक कारण तो है ही, लेकिन इन राज्यों के बड़े हिस्सों में उच्च स्तरीय और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ी वजह है। नतीजतन मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। यह लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य नियोजन की क्षेत्रीय चुनौती का एक संकेत है। दिल्ली इसका स्पष्ट उदाहरण है। दिल्ली में एम्स जैसे संस्थान में देश के अलग-अलग हिस्सों से मरीज पहुंचते हैं, क्योंकि उन्हें यहां उच्च स्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलती है और सरकारी होने के कारण उसकी लागत बहुत कम है।

दूसरी ओर, भारत ने कुछ राज्यों में निजी चिकित्सा क्षेत्र के अंतर्गत कुछ ऐसी विशेषज्ञता विकसित की है, जिससे वे चिकित्सा पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गए हैं। गुजरात इसका प्रमुख उदाहरण है। हृदय चिकित्सा, कैंसर उपचार, अस्थि एवं जोड़ चिकित्सा, घुटना प्रत्यारोपण, बांझपन उपचार और आईवीएफ जैसी सेवाओं के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से मरीज यहां आते हैं। इससे वहां अस्पतालों के साथ जांच, दवा, होटल और परिवहन का आर्थिक तंत्र भी विकसित हुआ है, जिसका आर्थिक विकास में अच्छा योगदान है।

केरल ने आधुनिक चिकित्सा को आयुर्वेद, पुनर्वास तथा स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के साथ जोड़कर स्वास्थ्य पर्यटन का अलग मॉडल विकसित किया है। चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और बंगलूरू भी जटिल चिकित्सा के बड़े केंद्र हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत की चिकित्सा क्षमता का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 6.44 लाख से अधिक विदेशी नागरिक चिकित्सा उद्देश्य से भारत आए।

दुनिया भारत को उपचार केंद्र के रूप में देखने लगी है। लेकिन यहीं विरोधाभास है। विदेशी मरीज इसलिए भारत आते हैं, क्योंकि यहां विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध है, जबकि भारतीय नागरिक अपना शहर छोड़कर दूसरे शहर इसलिए जाते हैं, क्योंकि उसके क्षेत्र में वही सुविधा उपलब्ध नहीं है। भारतीय मरीज की मजबूरी वाली यात्रा स्वास्थ्य सुविधाओं के असमान वितरण का संकेत है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। पर्यटन के ये आंकड़े स्वास्थ्य नीति में दर्ज होने चाहिए कि किस जिले से कितने मरीज इलाज के लिए बाहर जाते हैं और किन बीमारियों के लिए जाते हैं।


इससे स्वास्थ्य में वित्तीय निवेश की योजना को तय करना आसान होगा। भारत को चिकित्सा पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। इससे रोजगार, निवेश, विदेशी मुद्रा और सेवा क्षेत्र को लाभ मिलेगा। लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा इस बात से होगी कि एक सामान्य नागरिक को अच्छे इलाज के लिए कितनी दूर जाना पड़ता है। बड़े चिकित्सा केंद्रों की विशेषज्ञता को छोटे शहरों और जिलों से जोड़ना होगा। चिकित्सा पर्यटन भारत की आर्थिक शक्ति बन सकता है, लेकिन इलाज की दूरी कम करना उसकी सामाजिक शक्ति की पहचान होगी।

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