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जब रोशनी चली जाए: सामने आई कमजोरियां... कई यूरोपीय देशों में अंधकार में डूबे 5 करोड़ से अधिक लोग
Tue, 29 Apr 2025 06:50 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 29 Apr 2025 06:50 AM IST
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अंधेरे में डूबे यूरोपीय देश
- फोटो :
अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
विस्तार
सोमवार को स्पेन और पुर्तगाल में पूरी तरह और यूरोप के कुछ हिस्सों में जो अभूतपूर्व बिजली संकट पैदा हुआ और जिससे इन यूरोपीय देशों के करोड़ों लोगों की जिंदगी अचानक अंधेरे में डूब गई, उससे जनजीवन तो अस्त-व्यस्त हुआ ही, यह भी उजागर हुआ कि हमारी आधुनिक जीवनशैली स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति पर किस कदर निर्भर है।इस पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति में इन देशों में वायु यातायात, रेल और मेट्रो सेवाएं तो थमी ही, ट्रैफिक सिग्नलों व स्वास्थ्य सेवा में व्यवधान से मची अफरा-तफरी की कल्पना भी की जा सकती है। इस संकट का कारण अब तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन असामान्य मौसमी घटना को इसकी एक वजह बताया जा रहा है। मुमकिन है कि ज्यादा गर्मी की वजह से मांग बढ़ गई हो, और ग्रिड उसे झेल न सकी हो।
दक्षिणी-पश्चिमी फ्रांस में लगी आग को भी इसकी संभावित वजह बताया जा रहा है, हालांकि फ्रांस ने इससे इन्कार किया है। डिजिटल युग में बिजली ग्रिड साइबर अपराधियों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य बन सकती है। हालांकि, ऐसी किसी आशंका को फिलहाल खारिज ही किया जा रहा है। फिर भी, अगर यह साइबर हमला साबित होता है, तो यह यूरोप के ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर सवाल उठाएगा।
गौरतलब है कि 2006 में भी ग्रिड में आई तकनीकी समस्या के चलते पूरे यूरोप में ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो गई थी, लेकिन तब ऐसा केवल दो घंटे के लिए हुआ था। ऐसी घटनाएं हमें पहला सबक तो यही देती हैं कि बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा ग्रिड को मजबूत और सुरक्षित बनाने की तत्काल आवश्यकता है और दूसरा यह कि इस तरह के संकटों से निपटने के लिए बेहतर आपातकालीन योजनाओं और बैकअप सिस्टम की जरूरत है। कहा जा रहा है कि बिजली की आपूर्ति को सामान्य होने में छह से दस घंटे या उससे भी ज्यादा लग सकते हैं।
जब आप ये पंक्तियां पढ़ रहे होंगे, तब तक स्थितियां सामान्य हो भी गई हों, तो भी यह एक झटका जरूर था, जो हमें बता गया कि जिंदगी कितनी नाजुक हो सकती है। यूरोप का ब्लैकआउट हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जो बिजली हमारे रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाती है, वह एकदम से गायब हो जाए, तो हमारी कमजोरियां किस तरह से सामने आने लगती हैं और जिंदगी थमने लगती है।
आज जब हम स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और भविष्य की तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं, तो यूरोप की स्थिति ऊर्जा विविधीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निवेश की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। बिजली की रोशनी लौटने पर हर कोई राहत की सांस लेता ही है, लेकिन यूरोप में सोमवार को जैसी स्थितियां बनीं, वे इस रोशनी की कीमत का एहसास कराने के लिए काफी होनी चाहिए।