इतिहास तो फिर भी बना है, अवाम को अब भी पसंद है भाजपा के नायक
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
इस लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 400 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, जो संभव नहीं हुआ। लेकिन भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है, इसके बावजूद उन्होंने इतिहास रचा है। गठबंधन सरकार के कारण प्रधानमंत्री को अपनी कार्यशैली में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है और कठिन फैसले लेने में थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़े। जवाहरलाल नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री होंगे, जो लगातार तीसरी बार जीते हैं। वह अब भी लोकप्रिय हैं।
उनकी वापसी का पहला मुख्य कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती है। वर्ष 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तो भारत दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। आज यह पांचवें स्थान पर है। दूसरी बात यह है कि लाखों मतदाताओं के लिए मोदी एकमात्र ऐसे नेता के रूप में देखे जाते हैं, जो उनके जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इसमें संदेह नहीं है कि राजग की जीत से 'इंडिया' गठबंधन को झटका लगा है। सभी विपक्षी पार्टियां सिर्फ मोदी को हराने के लिए एकजुट हुई थीं। हालांकि विपक्ष विघटनकारी राजनीति का सहारा ले सकता है, लेकिन लोग उम्मीद करेंगे कि मोदी अपना काम करते रहें। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना कभी आसान नहीं होता। अब उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। मतदाता भी यही उम्मीद करेंगे। मोदी को भी भरोसा रहेगा कि उनकी नीतियां विकास के लिए बड़े बदलाव लाएंगी।
बड़ा सवाल यह है कि अब मोदी की प्राथमिकताएं क्या होंगी? उनका पहला काम आर्थिक झटकों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील समूहों की सुरक्षा करना और उन्हें सशक्त बनाना होगा। वह महिलाओं, युवाओं, गरीबों, किसानों और छोटे व्यवसायियों के लिए लाभ, ऋण, कौशल और रोजगार गारंटी सहित वर्तमान और नए कार्यक्रम लागू कर सकते हैं। अब विपक्ष क्या करेगा? राहुल गांधी इस पर चिंतन करेंगे कि अपने विचारों को लोगों तक कैसे प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए। देर-सबेर वह मतदाताओं को मोदी के खिलाफ लामबंद करने के लिए अपनी शैली को और भी आक्रामक बना सकते हैं। उनकी आक्रामकता उन्हें खुद को मोदी के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करने में मदद करेगी। राहुल अब यात्राएं करने के बजाय बड़े जमीनी आंदोलन की राह चुन सकते हैं, जिसमें वे सरकार के खिलाफ लोगों के प्रमुख मुद्दे उठा सकते हैं।