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अमेरिका सत्ता परिवर्तन: भारत चुनौतियों के समाधान की सतत कोशिशें करता रहे, ताकि विकास की गाड़ी चलती रहे...
Mon, 20 Jan 2025 06:00 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
शंकर अय्यर
शंकर अय्यर
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 20 Jan 2025 06:00 AM IST
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विस्तार
अक्सर लोगों को परिस्थिति की गंभीरता को समझने के लिए आंकड़ों की जरूरत होती है। हाल ही में देश को बताया गया कि वर्ष 2024–25 में जीडीपी विकास दर घटकर 6.4 फीसदी रह सकती है। यह भी पता चला कि मुद्रास्फीति अधिक है, सार्वजनिक निवेश और औद्योगिक विकास बहुत कम है तथा खपत भी धीमी है। खपत को बढ़ावा देने के तरीकों पर खूब बहस हो रही है, जैसे आयकर दरों में कटौती का सुझाव दिया जा रहा है। लेकिन अगर सिर्फ आंकड़ों पर ही गौर करेंगे, तो भ्रम पैदा होगा। सतत प्रयासों से ही समस्याएं दूर होंगी और विकास की राह भी खुलेगी। बगैर किसी क्रम के यहां दिए गए विचार इस संबंध में उपयोगी हो सकते हैं।राष्ट्रीय ग्रिड
मांग को नुकसान पहुंचाने वाला एक प्रमुख कारक खाद्य मुद्रास्फीति है, जो एक साल से अधिक समय से नष्ट होने वाली चीजों में सात फीसदी से ज्यादा है। भारत को इन चीजों के लिए एक राष्ट्रीय ग्रिड की आवश्यकता है, जैसा कि वर्गीज कुरियन ने दूध के लिए किया था। राष्ट्रीय ग्रिड के निर्माण से पैदावार में वृद्धि होगी, किसानों की आय में सुधार होगा, रोजगार में वृद्धि होगी और फसल कटाई के बाद होने वाली अन्न की बर्बादी पर अंकुश लगेगा, जो अनुमानित 25 प्रतिशत है। ग्रिड आगे और पीछे के लिंकेज को जोड़ेगा। शुरुआत के लिए, सरकार एक जिला, एक उत्पाद डाटाबेस का उपयोग कर सकती है और अमूल और मदर डेयरी खरीद मॉडल का उपयोग कर सकती है। सहकारी समितियों और निजी खिलाड़ियों द्वारा उत्पादन अनुबंधों में प्रवेश करने के बाद भंडारण की प्रक्रिया भी खरीद के बाद ही शुरू होगी। निश्चित रूप से, अनुबंधों के लिए नीतिगत बदलाव, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बढ़ाया गया ऋण और पंचायत स्तर पर कोल्ड चेन के वित्तपोषण की आवश्यकता होगी।
उद्यम क्रेडिट कार्ड
औपचारिक ऋण तक पहुंच ने सूक्ष्म उद्यमियों को लगातार परेशान किया है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि इस क्षेत्र में औपचारिक ऋण की पहुंच मात्र 20 फीसदी है। वित्त मामले के लिए संसद की स्थायी समिति ने भी पाया कि औपचारिक ऋण केवल 39 प्रतिशत छोटे उद्यमों को ही छू पाया है। सूक्ष्म उद्यमियों को ऋण पाने के लिए निजी ऋणदाताओं को अत्यधिक ब्याज दरों का भुगतान करना पड़ता है, जैसा कि हाल ही में रिजर्व बैंक ने संकेत दिया है। हालांकि बैंकों को उद्यम-पंजीकृत उद्यमियों को प्राथमिकता क्षेत्र के मानदंडों के तहत ऋण देने का निर्देश दिया गया है, पर लगता है कि पहुंच को या तो रोक दिया गया है या खारिज कर दिया गया है। सूक्ष्म उद्यमों को उद्यम क्रेडिट कार्ड दिया जा सकता है। इससे उद्यम पंजीकरण के आधार पर ऋण तक उनकी पहुंच हो सकती है। क्रेडिट सीमा को व्यवसाय के आकार और यूपीआई लेनदेन के आधार पर तय किया जा सकता है।
सौर राजमार्गों का मौद्रीकरण
भारत की विकास गाथा मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च से प्रेरित है। विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत अपनी जरूरत की अधिकांश ऊर्जा का आयात करता है, जिसमें चुनौतियां भी कम नहीं हैं। हालांकि, बुनियादी ढांचा एक अवसर प्रस्तुत करता है। भारत में करीब 1,50,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग हैं; उच्च सौर विकिरण वाले राज्यों में करीब 70,000 किलोमीटर राजमार्ग हैं। नियमों के अनुसार, चार लेन वाले राजमार्गों को लगभग पांच मीटर (पहाड़ी क्षेत्रों में 2.5 मीटर) की चौड़ाई वाले डिवाइडर से बांटकर उस पर सौर पैनल लगाया जा सकता है। यह स्थान बिजली अपलोड करने और रखरखाव के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को क्षमता का नक्शा बनाने, पायलट परियोजनाएं आरंभ करने तथा सार्वजनिक और निजी निवेशकों से बोलियों के लिए तैयार स्थानों को पेश करने का निर्देश दे सकता है। जैसे-जैसे यह विचार आगे बढ़ेगा, यह प्रति किलोवाट-घंटे उपकरणों और ऊर्जा के मूल्य निर्धारण में बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्थाओं को गति देगा।
अमृत काल कोष
विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए फंडिंग में भारी वृद्धि की आवश्यकता है। स्टेट बैंक के चेयरमैन का अनुमान है कि 2036 तक आठ फीसदी ज्यादा की वृद्धि के लिए भारत को 1,094 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की परिसंपत्तियों का लाभ उठाना होगा। रणनीतिक विनिवेश के विचार को धन और शक्ति के संकेंद्रण की चिंताओं से चुनौती मिलती है। यह पक्षपातपूर्ण राजनीति से भी ग्रस्त होता है। निजीकरण के ढांचे से हटकर साझा सार्वजनिक स्वामित्व की ओर कदम बढ़ाना एक व्यवहार्य रास्ता है। विचार यह है कि सरकार की सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी को अमृत काल कोष में डाल दिया जाए, जो सिंगापुर की जीआईसी जैसी एक संप्रभु इकाई होगी। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की आय में सुधार हुआ है और हाल के वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरों का बाजार मूल्य लगभग तीन गुना हो गया है, जो घाटे को कम करने, ऋण चुकाने और संप्रभु रेटिंग को उन्नत करने का अवसर प्रदान करता है। राजनीतिक विरोध से बचने के लिए सरकार पहले 51 प्रतिशत से अधिक पीएसयू होल्डिंग्स को स्थानांतरित कर सकती है। इस कोष का उपयोग संसाधन जुटाने और विनिवेश साधन के रूप में किया जा सकता है।
आत्मनिर्भर वरिष्ठ नागरिक
भारत 15 करोड़ से ज्यादा वरिष्ठ नागरिकों का घर है, जिनमें से ज्यादातर को पेंशन का लाभ नहीं मिलता। वर्ष 2050 तक इनकी संख्या 35 करोड़ तक पहुंच जाएगी। वरिष्ठ नागरिक बचतकर्ता, निवेशक और उपभोक्ता हैं। विकास को गति देने के लिए देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर नीतियों में बदलाव की जरूरत है। वरिष्ठ नागरिक सक्रिय जीवन जीना चाहते हैं और समाज के साथ अपनी पहचान और जुड़ाव को मजबूत करने के लिए अक्सर स्वरोजगार करते हैं। कंसल्टेंसी आय पर उनके द्वारा चुकाए जाने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी की समीक्षा करना उपयोगी होगा। वरिष्ठ नागरिकों की आय पर जीएसटी क्यों नहीं घटाया जाता? वरिष्ठ नागरिक भी स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं। क्या उनके द्वारा आवासीय संपत्ति खरीदने पर छूट दी जा सकती है? भारत अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था का लाभ उठाकर वैश्विक तूफानों का सामना कर सकता है, बशर्ते कि वह लगातार समस्याओं का समाधान कर सके।