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कूटनीतिक जीत: 'टीआरएफ' से पाकिस्तान वैश्विक मंच पर बेनकाब... अब एफएटीएफ में अपने तर्क को मजबूती से रखे भारत

Sat, 19 Jul 2025 07:07 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 19 Jul 2025 07:07 AM IST
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सार
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकी हमलों के 80 से अधिक दिन बीतने के बाद अमेरिका ने लश्कर से जुड़े आतंकी संगठन टीआरएफ को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया है। ये भारत की कूटनीतिक विजय है। अब भारत को इसका उपयोग करते हुए एफएटीएफ में अपने तर्क को मजबूती से रखना होगा

 
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Diplomatic victory Pakistan exposed on global stage as US designate TRF as terrorist orgn India eyeing FATF
एस जयशंकर और मार्को रुबियो - फोटो : एक्स@DrSJaishankar

विस्तार

अमेरिकी विदेश मंत्रालय का द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करना आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिलने जैसा है; यह आतंकवाद को संरक्षण देने के पाकिस्तान के पुराने रुख को वैश्विक मंच पर बेनकाब भी करता है, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। खासतौर पर यह तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब कुछ ही महीने पहले पहलगाम हमले के संदर्भ में सुरक्षा परिषद के बयान की भाषा को चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर थोड़ा नरम कर दिया था।



उल्लेखनीय है कि भारत ने लगातार यह बात उठाई है कि टीआरएफ व अन्य आतंकी संगठनों को पाकिस्तान से समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में, विदेश मंत्री जयशंकर ने उचित ही इस कदम की सराहना करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के सहयोग का एक ठोस प्रमाण बताया है। अमेरिका द्वारा टीआरएफ को फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) और स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (एसडीजीटी) के रूप में नामित करने से इस संगठन की वित्तीय गतिविधियों पर अंकुश लगने के साथ ही इसके सदस्यों की संपत्ति की जब्ती, यात्रा प्रतिबंध व अन्य कानूनी कार्रवाइयों का रास्ता भी खुलेगा।


इसके अलावा, यह कदम भारत को एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) में पाकिस्तान को फिर से ग्रे सूची में शामिल कराने में मदद दे सकता है। एफएटीएफ, जो धन शोधन और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए वैश्विक मानक स्थापित करता है, ने पहले भी 2008-09, 2012-15 और 2018-22 के दौरान पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा था। दरअसल, भारत का तर्क है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में विफलता दिखाई है, जिसकी पुष्टि पहलगाम जैसे आतंकी हमलों से होती है।

हालांकि, जिस तरह से चीन ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों मसलन, जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर के भाई अब्दुल रऊफ असगर, जो 2001 में भारतीय संसद पर हमले का मास्टरमाइंड था और साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल होने का मार्ग अवरुद्ध किया, उससे पता चलता है कि आतंकवाद की चुनौती कितनी जटिल है। अब भारत को इसका उपयोग करते हुए एफएटीएफ में अपने तर्क को मजबूती से रखना होगा और इसके लिए मेक्सिको, अर्जेंटीना, कनाडा और डेनमार्क जैसे देशों का कूटनीतिक समर्थन जुटाना होगा। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि जब तक आतंक के सरपरस्तों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुली छूट मिलती रहेगी, तब तक आतंकवाद के खिलाफ जंग अधूरी रहेगी।

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