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कैसे-कैसे बाबा
तवलीन सिंह
Updated Sun, 29 Apr 2018 07:02 PM IST
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तवलीन सिंह
कलयुग के इस दौर में दो व्यवसाय हैं, जो गरीब से गरीब व्यक्ति की भी गरीबी क्षण में दूर कर सकते हैं। ये व्यवसाय हैं-नेतागीरी और बाबागीरी। इस स्पर्धा में कभी नेता आगे थे। उस समय साधु-संत वास्तव में साधु-संत हुआ करते थे, धर्म के नाम पर व्यापार करने वाले बाबा नहीं।
पिछले बीस-तीस साल में सब बदल गया और बाबाओं की शक्ति इतनी बढ़ गई कि बड़े-बड़े राजनेताओं को भी वे अपना अनुयायी बना सके हैं। उत्तराखंड के एक बाबा इतने बड़े उद्योगपति बन गए हैं कि बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां आज उनसे डरने लग गई हैं। बाबा रामदेव का पतंजलि समूह आज हजारों करोड़ रुपयों का व्यवसाय करता है। बहुत कम लोगों को याद है कि एक वक्त बाबा रामदेव टीवी पर सिर्फ योग सिखाया करते थे।
योग सिखाने वाले बाबा एक और हुआ करते थे। जब मैंने दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों पर पहले-पहल लिखना शुरू किया बीती सदी के 70 के दशक में, तब धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी को योग सिखाने प्रधानमंत्री निवास पहुंचे और देखते-देखते इतने बड़े योगाचार्य बन गए कि लुटियंस की दिल्ली के एक बड़े सरकारी बंगले में उन्हें आश्रम खोलने की इजाजत मिल गई। फिर उनकी दोस्ती इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय से हुई, तो इतनी तरक्की हो गई कि जम्मू में बंदूक-असलहा बनाने का कारखाना लगाने के काबिल हो गए।
योग को लेकिन वह नहीं भूले, सो जम्मू के पास मन्तलय नाम की एक सुंदर घाटी में स्वामी जी ने एक आधुनिक आश्रम का निर्माण किया। वहां स्वामी जी उस समय अपने निजी विमान से जाया करते थे, जब बड़े से बड़े उद्योगपतियों के पास निजी विमान खरीदने की क्षमता नहीं थी। मैं खुद एक बार मन्तलय में योग सीखने के बहाने गई और वहां पाया कि स्वामी जी ने लड़कों के रहने की व्यवस्था तंबुओं में की थी और लड़कियों के रहने की व्यवस्था आश्रम के अंदर अपने कमरे के पास।
स्वामी जी के आसपास सुंदर लड़कियां खूब मंडराती थीं, लेकिन उन पर कभी बलात्कार का आरोप नहीं लगा। आज जमाना इतना खराब है कि एक के बाद एक बाबा बलात्कारी साबित होने के बाद जेल में पहुंच रहे हैं। पिछले वर्ष बाबा राम रहीम की बारी थी और पिछले सप्ताह बाबा आसाराम की बारी आई। सलाखों के पीछे भेजे जाने के बाद इन दोनों बाबाओं की संपत्ति की पोल ऐसे खुली है कि दुनिया जान गई है कि इनकी दौलत देश के बड़े से बड़े उद्योगपतियों के बराबर की थी।
माना कि ये बाबा राजनेताओं की शरण लेकर इतने बड़े बने हैं, लेकिन यह भी मानना पड़ेगा कि ज्यादा दोष हम आपका है। मैंने शिक्षित, समझदार लोग देखे हैं, जो इन बाबाओं के चंगुल में ऐसे फंस जाते हैं कि अपनी जमीनें, अपना धन इन बाबाओं के हवाले कर देते हैं।
जिस बच्ची के साथ बलात्कार के जुर्म में आसाराम बापू पिछले सप्ताह दोषी पाए गए, उस बच्ची के माता-पिता ने भी आश्रम बनाने के लिए आसाराम को जमीन दान की थी। इस बच्ची ने साहस दिखाकर अंत तक न्याय की लड़ाई न लड़ी होती, तो आज आसाराम बापू की वही शान होती, जो कभी हुआ करती थी।
इस बच्ची ने तब भी हार नहीं मानी, जब गवाहों की हत्याएं होने लग गई थीं और आसाराम के समर्थकों ने उसके परिवार को डराया-धमकाया था। इस देश को ऐसी बच्चियों की जरूरत है, ताकि इन ढोंगी बाबाओं का खेल समाप्त किया जा सके। लड़ाई लेकिन लंबी है, क्योंकि अपने भारत महान में अंधविश्वास इस हद तक है कि ढोंगी बाबाओं को भी हम भगवान मान लेते हैं।
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पिछले बीस-तीस साल में सब बदल गया और बाबाओं की शक्ति इतनी बढ़ गई कि बड़े-बड़े राजनेताओं को भी वे अपना अनुयायी बना सके हैं। उत्तराखंड के एक बाबा इतने बड़े उद्योगपति बन गए हैं कि बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां आज उनसे डरने लग गई हैं। बाबा रामदेव का पतंजलि समूह आज हजारों करोड़ रुपयों का व्यवसाय करता है। बहुत कम लोगों को याद है कि एक वक्त बाबा रामदेव टीवी पर सिर्फ योग सिखाया करते थे।
योग सिखाने वाले बाबा एक और हुआ करते थे। जब मैंने दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों पर पहले-पहल लिखना शुरू किया बीती सदी के 70 के दशक में, तब धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा गांधी को योग सिखाने प्रधानमंत्री निवास पहुंचे और देखते-देखते इतने बड़े योगाचार्य बन गए कि लुटियंस की दिल्ली के एक बड़े सरकारी बंगले में उन्हें आश्रम खोलने की इजाजत मिल गई। फिर उनकी दोस्ती इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय से हुई, तो इतनी तरक्की हो गई कि जम्मू में बंदूक-असलहा बनाने का कारखाना लगाने के काबिल हो गए।
योग को लेकिन वह नहीं भूले, सो जम्मू के पास मन्तलय नाम की एक सुंदर घाटी में स्वामी जी ने एक आधुनिक आश्रम का निर्माण किया। वहां स्वामी जी उस समय अपने निजी विमान से जाया करते थे, जब बड़े से बड़े उद्योगपतियों के पास निजी विमान खरीदने की क्षमता नहीं थी। मैं खुद एक बार मन्तलय में योग सीखने के बहाने गई और वहां पाया कि स्वामी जी ने लड़कों के रहने की व्यवस्था तंबुओं में की थी और लड़कियों के रहने की व्यवस्था आश्रम के अंदर अपने कमरे के पास।
स्वामी जी के आसपास सुंदर लड़कियां खूब मंडराती थीं, लेकिन उन पर कभी बलात्कार का आरोप नहीं लगा। आज जमाना इतना खराब है कि एक के बाद एक बाबा बलात्कारी साबित होने के बाद जेल में पहुंच रहे हैं। पिछले वर्ष बाबा राम रहीम की बारी थी और पिछले सप्ताह बाबा आसाराम की बारी आई। सलाखों के पीछे भेजे जाने के बाद इन दोनों बाबाओं की संपत्ति की पोल ऐसे खुली है कि दुनिया जान गई है कि इनकी दौलत देश के बड़े से बड़े उद्योगपतियों के बराबर की थी।
माना कि ये बाबा राजनेताओं की शरण लेकर इतने बड़े बने हैं, लेकिन यह भी मानना पड़ेगा कि ज्यादा दोष हम आपका है। मैंने शिक्षित, समझदार लोग देखे हैं, जो इन बाबाओं के चंगुल में ऐसे फंस जाते हैं कि अपनी जमीनें, अपना धन इन बाबाओं के हवाले कर देते हैं।
जिस बच्ची के साथ बलात्कार के जुर्म में आसाराम बापू पिछले सप्ताह दोषी पाए गए, उस बच्ची के माता-पिता ने भी आश्रम बनाने के लिए आसाराम को जमीन दान की थी। इस बच्ची ने साहस दिखाकर अंत तक न्याय की लड़ाई न लड़ी होती, तो आज आसाराम बापू की वही शान होती, जो कभी हुआ करती थी।
इस बच्ची ने तब भी हार नहीं मानी, जब गवाहों की हत्याएं होने लग गई थीं और आसाराम के समर्थकों ने उसके परिवार को डराया-धमकाया था। इस देश को ऐसी बच्चियों की जरूरत है, ताकि इन ढोंगी बाबाओं का खेल समाप्त किया जा सके। लड़ाई लेकिन लंबी है, क्योंकि अपने भारत महान में अंधविश्वास इस हद तक है कि ढोंगी बाबाओं को भी हम भगवान मान लेते हैं।