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राज अंकल का ढाबा

Mon, 05 Aug 2013 08:59 PM IST
सुधाकर आशावादी
सुधाकर आशावादी Updated Mon, 05 Aug 2013 08:59 PM IST
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dhaba of raj uncle

सुबह ऑफिस जाने की तैयारी कर ही रहा था कि मेरठ वाले बिट्टू भाई का फोन आ गया। मैंने कहा, भाई जल्दी में हूं, जो कहना हो, जल्दी से कह दो। बिट्टू भाई बोले, भैया सुना है...आपके मुंबई में एक नया ढाबा खुला है, जहां बारह रुपये में भरपेट भोजन मिलता है। मैं झल्लाया, बिट्टू भाई, सुबह-सुबह तुम्हें कोई और नहीं मिला मूर्ख बनाने को! मुंबई में तो बारह रुपये में चाय भी नहीं मिलती, तुम भरपेट भोजन की बात करते हो? बिट्टू भाई बोले, भैया, यकीन तो मुझे भी नहीं हो रहा था, मगर मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि राज अंकल झूठ नहीं बोल सकते।

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मुझे यह बात अटपटी-सी लगी। मैं स्वयं ही मुस्कराया, अच्छा मजाक कर लेता है बिट्टू भी। आजकल बारह रुपये में एक समय के चाय-बिस्कुट भी नसीब नहीं होते, यह भरपेट भोजन की बात कर रहा है, वह भी राज अंकल के ढाबे में। नादान है, इतना भी नहीं जानता कि आजकल ढाबे भी पांच सितारा होटलों से कम नहीं होते। दाल सादी खाओ या तड़के वाली, चालीस से कम का रेट ही नहीं है। ऐसे में बारह रुपये में भरपेट भोजन!
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ऑफिस पहुंचा, तो वहां भी यही चर्चा गरम थी। चपरासी चाय का प्याला थमाते हुए बोला, साहब, अब अपना टिफिन बंद करा दीजिए। ऑफिस के पास ही राज अंकल का ढाबा खुला है, जिसमें भरपेट भोजन की व्यवस्था मात्र बारह रुपये में है।
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मेरा माथा ठनका। सुबह बिट्टू का भी यही फोन आया था और अब ऑफिस में भी यही चर्चा। जरूर राज अंकल ने अपना ढाबा खोल लिया है और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए धमाका ऑफर दे दिया है। एक बार ग्राहकों को ढाबे के भोजन में यदि स्वाद आ गया, तो राज अंकल दाम बढ़ाने में देरी नहीं करेंगे। मगर मेरे लिए यह अब भी अबूझ था कि जब बारह रुपये में एक प्याली चाय नहीं मिलती, तो भला भोजन कैसे मिलेगा? मैंने चपरासी से कहा, इस तरह की भ्रामक खबरें मत फैलाया करो। किसी दिन लेने के देने पड़ जाएंगे। यह सुनकर चपरासी मुस्कराते हुए बोला, साहब, मजाक नहीं कर रहा। शुक्र है कि आप मुंबई में हैं, यदि आप देश की राजधानी में होते, तो बारह रुपये में मिलने वाली थाली पांच रुपये में ही मिल जाती।


मैं माथा पकड़ कर बैठ गया। समझ नहीं पा रहा था कि मेरठ वाले बिट्टू भाई और मुंबई के ऑफिस वाले चपरासी एक ही प्रकार की भाषा कैसे बोल रहे हैं। मगर कोई तो बात जरूर है। कहीं कोई चिनगारी तो है, जिससे धुआं उठा रहा है।

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