{"_id":"6781c42f0c2c368f5a0cd7d8","slug":"despite-being-an-invaluable-friend-can-ai-share-hugs-and-sorrows-2025-01-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"एआई: वह दोस्त ही क्या जिसे गले न लगा सकें, क्या कभी संभव होगा भावनाओं का समाधान","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
एआई: वह दोस्त ही क्या जिसे गले न लगा सकें, क्या कभी संभव होगा भावनाओं का समाधान
Sat, 11 Jan 2025 07:25 AM IST
शिव शुक्ला
जेसिका ग्रोस
जेसिका ग्रोस
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 11 Jan 2025 07:25 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
एआई
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
जब मैं अपनी एड टेक शृंखला की रिपोर्टिंग कर रही थी, तो मेरी नजर सबसे अधिक परेशान करने वाली चीजों में से एक पर पड़ी, जो मैंने वर्षों पहले पढ़ी थी कि कैसे तकनीकी मानव संबंधों में हस्तक्षेप कर सकती है। वेंचर कैपिटल फर्म आंद्रेसेन होरोविट्ज की वेबसाइट पर एक लेख था ‘यह एक कंप्यूटर नहीं है, यह एक साथी है!’ इसकी शुरुआत एक ऐसे व्यक्ति के इस कथन से होती है, जिसने अपने खास साथी के बदले चैटबॉट रखने के विचार को पूरी तरह से अपना लिया है: ‘एआई की सबसे अच्छी बात यह है कि यह लगातार विकसित हो रहा है और एक दिन यह असली दोस्त से भी बेहतर होगा।’ओपनएआई ने अपने चैटजीपीटी चैटबॉट के जरिये उन सभी बातों को सच बना दिया है, जो होरोविट्ज की कहानी में कही गई हैं। चैटजीपीटी और 2013 की फिल्म ‘हर’ के बीच बहुत-सी समानताएं दिखती हैं, जिसमें एक आदमी अपनी एआई सहायक से प्यार करने लगता है, जिसकी आवाज मशहूर अभिनेत्री स्कारलेट जोहान्सन ने दी है। भावनात्मक चुनौतियों, खासकर अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को कम करने के लिए मानवीय चैटबॉट की क्षमता के बारे में बहुत प्रचार भी हुआ है। उदाहरण के लिए, एआई कंपनी के सह-संस्थापक ने चैटजीपीटी की शुरुआत के वक्त तर्क दिया था कि ‘वर्चुअल असिस्टेंट या चैटबॉट के रूप में साथी उपलब्ध कराया जा सकता है, और ये साथी बातचीत में शामिल हो सकते हैं, गेम खेल सकते हैं या जानकारी प्रदान कर सकते हैं, जिससे अकेलेपन और ऊब की भावनाओं को कम करने में मदद मिलती है।’
निश्चित रूप से, एआई चैटबॉट के मूल्यवान और लाभकारी उपयोग हैं। उदाहरण के लिए, वह दृष्टिहीन लोगों के लिए जीवन बदलने वाला हो सकता है। लेकिन यह धारणा कि बॉट एक दिन मानव संपर्क के लिए पर्याप्त विकल्प बन जाएंगे, यह अकेलेपन के बारे में गलत समझ है और मानव स्पर्श की जरूरत को ध्यान में नहीं रखती है। ‘अकेलेपन’ के सटीक अर्थ के बारे में शिक्षाविदों के बीच मतभेद हैं, लेकिन इसे एक सामाजिक समस्या के रूप में देखने के लिए, हमारी परिभाषाओं को और अधिक स्पष्ट करने का प्रयास करना उचित है। मैं अकेलेपन के संभावित समाधान के रूप में बॉट्स के साथ चैटिंग के बारे में इसलिए चिंतित हूं, क्योंकि यह लोगों को दूसरों के साथ संबंध बनाने के लिए सोफे से उठने तक से हतोत्साहित करता है या यहां तक कि रोकता भी है।
शोध तो यह भी कहते हैं कि मानवीय स्पर्श की कमी अकेलेपन की भावना को बढ़ा सकती है। कोविड महामारी का दौर गवाह है, जब लोग मानवीय संपर्क के लिए कितना तरस रहे थे। एआई दोस्त बन सकता है, लेकिन जब आप परेशान हों, तो क्या यह गले लगाकर आपकी चिंताओं को कम कर सकता है? तो क्या यह बेहतर नहीं कि इसे विकसित करने में खर्च किए जा रहे अरबों डॉलर का छोटा-सा हिस्सा वाकई उन चीजों पर खर्च किया जाए, जो सीधे तौर पर अकेलेपन को दूर करने में मदद करती हों। अकेले और अलग-थलग लोगों की मदद करने के लिए सहयोगात्मक आवास, पार्क, पुस्तकालय और अन्य प्रकार के सुलभ सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसी चीजों में निवेश किया जा सकता है, जो सभी उम्र के लोगों के जुड़ाव में मदद कर सकते हैं, जैसे- आवास, पुस्तकालय, पार्क इत्यादि।
असली सामाजिक, नीतिगत और मानवीय चुनौती यह है कि हम इन लोगों को पहचानने और उनकी देखभाल करने के तरीके खोजें। एक तरह से, क्या यह हमारी सामाजिक विफलता नहीं है, जिसने एआई और प्रौद्योगिकी के लिए इस खालीपन को भरने का अवसर पैदा किया है?