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आंकड़े बोलते हैं: पहली बार एनएसओ ने युवाओं की जिला स्तरीय तस्वीर दिखाई, ये जमीनी हकीकत को समझने का अवसर

Mon, 21 Sep 2026 04:27 AM IST
न्यूज डेस्क न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: न्यूज डेस्क Updated Mon, 21 Sep 2026 04:27 AM IST
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सार
राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट ने देश में पहली बार जिला स्तर पर युवाओं के रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण की जो तस्वीर पेश की है, वह चिंताजनक होने के साथ श्रम बाजार की जमीनी हकीकत को भी समझने का अवसर देती है।
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Data speaks first time NSO presented district-level picture of youth opportunity to understand ground reality
पहली बार सामने आई युवाओं के रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण की तस्वीर (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

भारत में पहली बार जिला स्तर पर युवाओं के रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण की स्थिति सामने आने से राष्ट्रीय श्रम बाजार की जो तस्वीर उभरती है, वह चिंताजनक तो है ही, यह देश के जनसांख्यिकीय लाभांश, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि के सामने खड़ी गंभीर चुनौती की ओर भी संकेत करती है।



राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट कहती है कि देश के करीब एक-चौथाई जिलों में 15 से 29 वर्ष की आयु के 30 फीसदी से अधिक युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। यह स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है, क्योंकि दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल भारत के लिए यही युवा उसकी आर्थिक शक्ति, उत्पादकता और भविष्य की विकास क्षमता के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में, युवाओं का रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से बाहर होना कई स्तरों पर चिंता का विषय है।


एनएसओ के जिला स्तरीय श्रम संबंधी आंकड़ों का महत्व इस बात में है कि जहां राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय औसत आंकड़े क्षेत्रीय विषमताओं को ढक देते हैं, वहीं जिला स्तर के आंकड़े ऐसी सभी असमानताओं को पहचानने का अवसर देते हैं। हालांकि इन आंकड़ों को पढ़ते समय ‘रोजगार से बाहर’ और ‘बेरोजगार’ के बीच फर्क को समझना भी जरूरी है।

शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर युवाओं को सीधे बेरोजगार मान लेना उचित नहीं होगा। इस श्रेणी में ऐसे युवा भी हो सकते हैं, जो रोजगार की तलाश में हों या किसी अन्य कारण से औपचारिक शिक्षा या प्रशिक्षण से दूर हों। रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं की स्थिति से भी जुड़ा है।

देश भर में करीब 57.8 फीसदी जिलों में महिला श्रमबल भागीदारी 40 फीसदी या उससे अधिक रही। इससे पता चलता है कि देश के अनेक हिस्सों में महिलाएं तेजी से श्रम बाजार का हिस्सा बन रही हैं, लेकिन जिलों के बीच मौजूद अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्यों की महिला आबादी के लिहाज से 10 सबसे बड़े जिलों में एक हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला श्रमबल भागीदारी 80 फीसदी से अधिक रही, जो देश में सर्वाधिक है।

वहीं पूर्वी दिल्ली में यह आंकड़ा सिर्फ 18.9 फीसदी रहा। कुल मिलाकर, पहली बार उपलब्ध हुए इन जिला स्तरीय आंकड़ों को केवल आंकड़ों की नई शृंखला के रूप में देखने के बजाय श्रम बाजार की जमीनी हकीकत को समझने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। इनका वास्तविक महत्व तब साबित होगा, जब केंद्र व राज्य सरकारें इनके आधार पर जिलेवार प्राथमिकताएं तय करें और यह भी सुनिश्चित करें कि शिक्षा, कौशल व रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ उन जिलों तक पहुंचे, जहां इनकी सबसे अधिक जरूरत हो।

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