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सूचनाओं के साझा होने के खतरे, गोपनीयता का दायरा हुआ बेमानी 

Sun, 24 Jan 2021 03:50 AM IST
पी. चिदंबरम पी चिदंबरम
पी चिदंबरम Published by: पी. चिदंबरम Updated Sun, 24 Jan 2021 03:50 AM IST
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Dangers of sharing information, confidentiality becomes meaningless
प्रतीकात्मक तस्वीर

टीवी चैनल का नाम अहम नहीं है। पत्रकार का नाम भी अहम नहीं है। उस चैनल के खिलाफ कुछ अन्य मुद्दों को लेकर लगाए गए आरोप इस लेख के लिए प्रासंगिक नहीं हैं। प्रासंगिक और अहम हैं, निर्णय लेने की प्रक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में सरकार के उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय।

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इस लेख का मकसद किसी पर आरोप लगाना या उसे बदनाम करना नहीं है। उद्देश्य है सीधे यह सवाल करनाः सरकार के संवेदनशील और संरक्षित निर्णय क्या किसी भी अन्य व्यक्ति से साझा किए जा सकते हैं, जो कि निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है? एक पूरक प्रश्न यह भी है कि, क्या इनमें से कुछ निर्णय 'सरकारी गोपनीयता' के दायरे में आते हैं?

जुकरबर्ग के लिए बुरी खबर

इन विषयों को कैसे गोपनीयता के दायरे से बाहर निकाला गया यह रहस्य है। यह माना जाता है कि ये व्हाट्सएप की 'चैट' हैं। व्हाट्सएप के मालिकों ने काफी पहले दावा किया था कि व्हाट्सएप पर होने वाली सारी बातचीत दोनों छोरों पर इनक्रिप्टेड होती है और बीच में किसी की भी इस तक पहुंच नहीं होती। यह भी दावा किया गया था कि मालिकों के पास बातचीत का कोई रिकॉर्ड नहीं होता और किसी अन्य के साथ वे इसे साझा नहीं कर सकते। मैं नहीं जानता कि ये दावे सही हैं या नहीं, लेकिन संदेह बढ़ता जा रहा है। क्या दो लोगों के संवाद को हैक किया जा सकता है, यानी गैरकानूनी तरीके से कोई इसमें दखल दे और इसे चुरा ले? इस सवाल का भी जवाब मुझे पता नहीं, लेकिन यह संदेह बढ़ रहा है कि ऐसी बातचीत को हैक किया जा सकता है।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के मालिक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार मार्क जुकरबर्ग के लिए यह बुरी खबर है।

जैसा कि यह हो सकता है कि दो लोगों के बीच की बातचीत सार्वजनिक हो गई है। जहां तक मैं जानता हूं कि संबंधित व्यक्ति प्रिंट और सोशल मीडिया पर प्रकाशित सामग्री से इन्कार नहीं कर सकते। यदि वे इन्कार कर पाते, तो फिर इस लेख का उद्देश्य यहीं खत्म हो जाता; यदि वे नहीं कर पाते, तो कुछ सवाल उठते हैं।

सरकारी गोपनीयता

14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में भारतीय सेना के एक काफिले पर हमला हुआ। 23 फरवरी को 'पत्रकार' और 'अन्य' के बीच एक संवाद हुआः

23-02-2019

रात 10.31 बजेः पत्रकारः एक और बात है कि कुछ बड़ा होने वाला है।

रात 10.33 बजेः अन्यः मुझे पता है कि आप करेंगे और मैं आपकी कामयाबी की दृढ़ता से कामना करता हूं।

रात 10.34 बजेः अन्यः आपकी कामयाबी के लिए।

रात 10.36 बजेः पत्रकारः नहीं सर, पाकिस्तान। इस बार कुछ बड़ा होगा।

रात 10.37 बजेः अन्यः इस मौसम में बड़े आदमी के लिए अच्छा होगा

तब तो वह चुनाव में जीत जाएंगे

हमला?? या इससे भी कुछ बड़ा

रात 10.40 बजेः पत्रकारः सामान्य हमले से बड़ा। और इसके साथ ही कश्मीर में भी कुछ बड़ा होगा। पाकिस्तान के मामले में सरकार को भरोसा है कि वह इस तरह से हमला करेगी जिससे लोग उत्तेजित हो जाएं।

एकदम सही शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। 

पुलवामा में हुआ हमला आतंकवाद था और इसमें 40 जवानों की जान गई थी। रक्षा बल गुस्से में आ गए थे। यह माना गया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पाकिस्तान ने प्रशिक्षित और तैनात किया था। ऐसे में जवाबी हमला अपेक्षित था। यह 'बातचीत' 23 फरवरी को हुई। इसके तीन दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में बालाकोट में हमला किया।

मैं इस बात को लेकर चिंतित नहीं हूं कि किसने उन 'शब्दों' को सुना। मैं अनुमान लगा सकता हूं कि वह व्यक्ति सौभाग्यशाली थाः वह सही समय में सही जगह पर था! मैं चिंतित हूं कि ये शब्द किसने कहे। आखिर किसी गैर सरकारी व्यक्ति के सामने ये शब्द क्यों कहे गए? क्या उन्होंने ये शब्द संरक्षित सूचना साझा करने के इरादे से कहे थे? जब व्यापक रूप से माना जा रहा था कि रक्षा बल पुलवामा हमले का बदला लेंगे, तब कोई इस अभीष्ट हमले के बारे में इस्तेमाल किए गए 'एकदम सही शब्दों' की कल्पना नहीं कर सकता था। स्वाभाविक है कि किसी ने तो संवेदनशील और संरक्षित सूचना साझा की। वह व्यक्ति कौन था?

कुछ निर्णय 'कांफिडेंशियल' (गोपनीय) होते हैं, कुछ 'सिक्रेट' (गुप्त), कुछ 'टॉप सिक्रेट' (परम गुप्त) और कुछ 'फॉर योर आइस ओनली' यानी एफवाईईओ (सिर्फ आपके देखने के लिए) होते हैं। पाकिस्तान में किसी लक्ष्य पर जवाबी हमला एफवाईईओ श्रेणी का होगा। मुझे पक्का यकीन है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया के साथ ही निर्णय में सिर्फ प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार), थल सेना और वायु सेनाओं के प्रमुख और वेस्टर्न एयर कमांड के कमांडर शामिल होंगे। यहां तक कि हमला करने वाले पायलटों को भी हमले से कुछ घंटे पहले बताया गया होगा और उन्हें अभियान के शुरू होने तक एकांत में रखा गया होगा। आप अपना निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि किसने 'एकदम सही शब्द' इस्तेमाल किए होंगे और संरक्षित सूचना साझा की होगी।

मेरी चिंता यह है कि क्या यह जानकारी किसी और के साथ (शायद स्रोत उससे अनजान हो) साझा की गई, जो पाकिस्तान का जासूस या मुखबिर हो सकता है? मेरी दूसरी चिंता बातचीत में शामिल 'अन्य' व्यक्ति को लेकर है। उसका सुरक्षा वर्गीकरण क्या था और क्या उसने किसी अन्य के साथ सूचना साझा की?

मौत पर नजर

इस बातचीत ने दिवंगत वित्त मंत्री अरुण जेटली (उन्हें शांति मिले) की प्रतिष्ठा को समानांतर नुकसान पहुंचायाः

10.04.2019

दिन में 12.45 बजेः अन्यः जेटली उनकी सबसे बड़ी नाकामी हैं।

पत्रकारः मैं इससे पूरी तरह से सहमत हूं।

स्तब्ध करने वाली बात यह है कि तब इस अत्यंत बीमार व्यक्ति पर मौत का साया मंडरा रहा था।

19.08.2019

सुबह 10.08 बजेः पत्रकारः जेटली इसे लंबा खींच रहे हैं। पीएमओ नहीं जानता कि क्या करना है। पीएम बुधवार को फ्रांस के लिए निकल रहे हैं।

सुबह 10.09 बजेः अन्यः तो क्या वह अब तक मरे नहीं हैं? 

सुबह 10.55 बजेः पत्रकारः उनकी देखभाल की जा रही है। मुझे शाम तक कुछ होने की उम्मीद है। इस हफ्ते दिल्ली में मेरी एक मुलाकात इसकी वजह से टल गई।

मैं अपने देश, हमारे सशस्त्र बलों और उनके राज के साथ ही अरुण जेटली के परिवार के लिए दुख प्रकट करता हूं, जिन्होंने 1975 से भाजपा (और उसके पूर्ववर्ती जनसंघ) की पूरी वफादारी के साथ सेवा की।

 

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