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माफी मांगने से नुकसान कम नहीं हुआ

Mon, 25 Feb 2013 10:37 AM IST
Updated Mon, 25 Feb 2013 10:37 AM IST
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damages did not reduced by sushil kumar shinde sorry

माफी मांग ली आखिरकार गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने और भाजपा ने उनको तुरंत क्षमा भी कर दिया और संसद के नए सत्र को चलने देने का भी आश्वासन दे दिया। लेकिन इस देश के चेहरे पर आतंकवाद के ऐसे कलंक लग गए हैं मंत्री जी कि न तो वह माफियों से हटेगा, और न सफाइयां देने से।

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मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहूंगी इस लेख की शुरुआत में ही कि गृह मंत्री ने देश के दुश्मनों की एक तरह से मदद ही की है अपने वक्तव्य से। सीमा के उस पार भारत का सबसे कट्टर दुश्मन है 26/11 के हमले के आला जरनैल हाफिज मोहम्मद सईद, जिनको इतनी खुशी हुई भारतीय गृह मंत्री का भाषण सुनकर कि अगले दिन ही उनकी तरफ से बयान आया कि वह शुरू से कहते आ रहे हैं कि 26/11 का हमला भारत की खुफिया संस्थाओं ने खुद कराया था मुंबई में।
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लश्कर-ए-तैयबा को जन्म देने वाले ने कहा कि भारत के गृह मंत्री के बयान से साबित होता है कि पांच साल से जो इल्जाम भारत सरकार लगा रही थी उन पर, वे झूठे हैं। हाफिज सईद ने यह भी कहा कि भारत की तरफ से पाकिस्तान की भूमि पर कई आतंकवादी हरकतें होती हैं और वहां बसे जेहादी संगठन बिल्कुल निर्दोष हैं।
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वाह रे अपने देश के गृह मंत्री, आपने यह किया क्या और वह भी इतने छोटे राजनीतिक लाभ के लिए कि माफी मांगते ही सारा खेल खत्म हो गया है! या खेल इससे बढ़ा था कि शायद आप राहुल गांधी को खुश करने की कोशिश कर रहे थे, जब आपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर इल्जाम लगाया आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाने का।

याद कीजिए कि तकरीबन ऐसी ही बात राहुल गांधी ने कोई दो वर्ष पहले अमेरिकी राजदूत को कही थी, जो विकिलीक्स द्वारा दुनिया को मालूम पड़ी दिसंबर, 2011 में। राहुल गांधी से जब जेहादी आतंकवाद के बारे में पूछा अमेरिकी राजदूत ने, तब उन्होंने कहा था कि भारत को हिंदू आतंकवाद से सबसे ज्यादा खतरा है। गृह मंत्री का यह बयान इसी से मिलता-जुलता है।

मुश्किल यह भी है कि जो बयान उन्होंने दिया था, उससे भाजपा को जितना भी नुकसान हुआ हो, देश की एकता-अखंडता को उससे अधिक हानि हुई है। सो माफी उनको भाजपा से नहीं, बल्कि भारत देश से मांगनी चाहिए। और अगर इस देश के लोग उन्हें माफ कर भी देते हैं, तब भी वह जो नुकसान कर गए हैं, वह हमेशा के लिए रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जानकारी अपने गृह मंत्री को कुछ कम होगी, सो वह नहीं जानते होंगे शायद कि 26/11 के हमले के बाद पाकिस्तान की छवि दुनिया की नजरों में इतनी गिर गई थी कि तब से उस देश के सेनाध्यक्ष और उसके राजनेताओं की कोशिश रही है यह साबित करने की कि वे जिम्मेदार नहीं थे इस हमले के।

अजमल कसाब को अगर पकड़ा न होता मुंबई के एक बहादुर पुलिस वाले ने अपनी जान कुर्बान करके, तो पाकिस्तान शायद यह स्वीकार भी नहीं करता कि हमले की सारी साजिश उसकी धरती पर रची गई थी। जब कसाब ने खुद कुबूल किया कि वह पाकिस्तानी है और डेविड हेडली के पकड़े जाने से सारी पोल खुल गई, तब पाकिस्तान के शासकों ने कहना शुरू कर दिया कि उनके यहां के लोग हो सकते हैं हमलावर, लेकिन इनको न सरकार की मदद मिली थी और न सेना की।

इस झूठ को सच साबित करने में दिग्विजय सिंह ने एक ऐसी किताब का खुलकर समर्थन किया, जिसका शीर्षक ही था-26/11-आरएसएस की साजिश। और पुराने कांग्रेसी नेता अंतुले साहब ने तो यहां तक कहा कि सारे षड्यंत्र का घिनौना मकसद था, मुंबई के उन आला पुलिस अफसरों को खत्म करना, जो भगवा आतंकवाद की तहकीकात करने में लगे हुए थे।


कहने की मेरी कोशिश यह है कि कांग्रेस ने 26/11 के हमले को शुरू से ही इस तरह से पेश किया है, जैसे भारत भी उतना ही आतंकवादी देश माना जाए दुनिया की नजरों में, जितना पाकिस्तान है। लेकिन जितना नुकसान इस देश की छवि को गृह मंत्री के भाषण से हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ था। भारत अब किस मुंह से कह सकेगा दुनिया के सामने कि जेहादी संस्थाएं पाकिस्तान ने बनाई हैं भारत के खिलाफ एक नए किस्म की जंग लड़ने के लिए? मकसद वही पुराना है, भारत को टुकड़ों में बांटने का।

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