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अंटार्कटिका में अपराध और दंड

Fri, 30 Sep 2016 07:25 PM IST
ब्रायंट रोस्यू
ब्रायंट रोस्यू Updated Fri, 30 Sep 2016 07:25 PM IST
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crime and punishment in antactica
अंटार्कटिका में अपराध

मौत की एक अनसुलझी गुत्थी। एक घातक हथियार से हमला। शराब के नशे में ढेर सारे दुर्व्यवहार। यह एक महाद्वीप के अपराध का रिकॉर्ड है, जहां लगभग कोई नहीं रहता। अंटार्कटिका एक विशाल जगह, आकार में लगभग ऑस्ट्रेलिया का दोगुना, लेकिन वहां कोई स्थायी रूप से नहीं रहता, सिवाय कुछेक दर्जन देशों के कुछ हजार वैज्ञानिकों और उनके सहयोगियों के, जिन्हें कुछ दिनों के लिए वहां अनुसंधान के लिए भेजा जाता है।

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फिर भी जहां कहीं भी मनुष्य है, वहां हिंसक गतिविधियां और क्षुद्र अपराध होते ही हैं। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि जहां की संप्रभुता अस्पष्ट है, और जहां न तो कोई स्थायी अदालत है, न जेल और न ही पुलिस बल है, वहां आपराधिक मामलों को कैसे नियंत्रित किया जाता है? 53 देशों की अंटार्कटिका संधि की शर्तों के अनुसार, किसी भी रिसर्च बेस का कर्मचारी अगर किसी गंभीर अपराध का आरोपी है, तो उसके खिलाफ उसके अपने देश में मुकदमा चलाया जाएगा। इसलिए जब एक अमेरिकी रसोइए ने वर्ष 1996 में मैकमुर्डो स्टेशन पर अपने एक सहकर्मी पर हथोड़े से हमला किया, तो एफबीआई ने अपने एक एजेंट को जांच के लिए वहां भेजा और उस रसोइए को हिरासत में ले लिया गया। खराब मौसम में अंटार्कटिका की यात्रा असंभव हो सकती है। इसलिए ऐसे मामले में मैकमुर्डो के स्टेशन प्रबंधक को अमेरिकी मार्शल की विशेष जिम्मेदारी दी जाती है, जिसके तहत उन्हें साक्ष्य के संरक्षण और अमेरिकियों के खिलाफ अपराध करने वाले किसी दूसरे अमेरिकी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया जाता है। अन्य देशों की तरफ से भी उनके बेस प्रमुख के साथ ऐसी ही व्यवस्था होती है। वहां डकैती शायद ही होती है, क्योंकि लोग अंटार्कटिका बहुत सामान लेकर नहीं जाते। शराब पीना आम बात है, इसलिए कभी-कभी झगड़े हो जाते हैं। मामूली अपराधों में दोषियों को नौकरी से निकाल घर भेज दिया जाता है।
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मामला तब जटिल हो जाता है, जब अपराध में कई देशों के नागरिक शामिल होते हैं। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चिली, फ्रांस, न्यूजीलैंड और नार्वे-सात देश इस असैन्यीकृत महाद्वीप के कुछ हिस्सों पर अपनी संप्रभुता का दावा करते हैं। बाकी देशों का कहना है कि इस महाद्वीप के एक इंच पर भी किसी देश का दावा नहीं है। वर्ष 2000 में जब एक ऑस्ट्रेलियाई रोंडी मार्क की एमंडसन स्कॉट साउथ पोल स्टेशन पर मृत्यु हो गई, तो उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए न्यूजीलैंड ले जाया गया, जिसमें निष्कर्ष निकला कि मैथनॉल जहर से उसकी मृत्यु हुई। न्यूजीलैंड पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं हो पाया कि उसकी मृत्यु एक दुर्घटना थी, या आत्महत्या या संभवतः अंटार्कटिका की पहली दर्ज हत्या।

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