{"_id":"5ebcba5e250c17191837b0fa","slug":"covid19-coronavirus-balance-of-sorrow-and-joy","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुख और आनंद का संतुलन","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
दुख और आनंद का संतुलन
Thu, 14 May 2020 08:56 AM IST
संजीव कुमार झा
कैट वेर्निंग
कैट वेर्निंग
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 14 May 2020 08:56 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
कोरोना वायरस
- फोटो : पीटीआई
'दुख ऐसा प्रेम है, जो कहीं नहीं जाता।' बौद्ध शिक्षक रोशी ड़न हैलिफैक्स ने जब यह अनूठा ज्ञान साझा किया, तो हम सब अवाक रह गए। इरेसिस्टेबल पॉडकास्ट की 'ग्रीफ इन ए टाइम ऑफ नॉट नोइंग' नामक कड़ी में एक छात्र से उन्होंने इसके बारे में जाना था। पिछले डेढ़ महीने से इस वैश्विक संकट के समय में सामूहिक दुख के बारे में मैं हिचकिचाहट भरी जिज्ञासा के साथ मनन कर रही हूं।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
इस संकट के पहले हफ्ते में मुझे लोगों ने बताया कि कैसे 2020 के लिए उन्होंने जो रणनीतियां बना रखी थीं, उन्हें अचानक पूरी तरह से बदलना पड़ गया।
जैसे-जैसे सप्ताह बीत रहे हैं, हमारे बीच के अधिकतर लोग कोविड-19 के कारण प्रियजनों को खो रहे हैं, या फिर सामूहिक शोक के सामान्य अनुष्ठानों में इकट्ठा न हो पाने की हमारी असमर्थता हमारे जीवन से जुड़े साधारण दुखों को बढ़ा रही है। मैं अपने जीवन से जुड़े बुद्धिमान लोगों को सुन सकती हूं, जो आगाह कर रहे हैं कि इस समय यह महत्वपूर्ण है कि हम किस कौशल और सामूहिकता के साथ इस दुख का मुकाबला करते हैं। इनमें संगठन के वरिष्ठ चिकित्सक शामिल हैं।
हमारे मूवमेंट्स को चाहिए कि वह दुख और रोष को अलगाव और मोहभंग में न बदल जाने दे और उन्हें हमारी सामूहिक शक्ति में बदल दे। लेकिन सहसा ही एक स्वाभाविक प्रश्न कौंधा, 'हम यह कैसे कर सकते हैं?' दुख के बारे में जानने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है और यह भी कि अकल्पनीय नुकसान की स्थिति का कैसे सामना करें। हमारे मूवमेंट्स के अनेक सर्वाधिक शक्तिशाली प्रेरक क्षण त्रासदियों से जुड़े हुए हैं- नस्लवाद और आर्थिक अन्याय से संयोजित प्राकृतिक आपदाएं, पुलिस के हाथों अश्वेतों की जिंदगी को होने वाले नुकसान, निर्वासन के कारण अलग होने वाले परिवारों की पीड़ा,स्वास्थ्य सुरक्षा की कमी से होने वाली मौतें, घरेलू हिंसा इत्यादि।
और इसके साथ ही इसी मूवमेंट्स में कुछ अत्यंत दूरदर्शी और उत्साह से भरी सामूहिक संस्कृतियां भी जिंदा हैं, जिन्होंने अकल्पनीय नुकसान का सामना किया है। सामाजिक न्याय के नायकों का समर्थन करने वाले पॉडकास्ट के रूप में हम आम तौर पर इसमें होने वाली बातचीत और अभ्यासों को जारी करते हैं, जिन्हें लोग अपने संगठनों, बैठकों में काम में लाते हैं और उनके आधार पर काम करते हैं। हमने इरेसिस्टेंबल केयर सर्किल की शुरुआत की है, जो कि साप्ताहिक आभासी मुलाकात की जगह है, जहां पिछले पांच हफ्तों के दौरान सामाजिक न्याय के लिए काम कर रहे एक हजार से अधिक नायकों की मदद की गई है।
सोशल डिस्टेंसिंग ने हमें हमारे समुदाय के करीब लाया है, जहां हम सामाजिक न्याय के लिए काम कर रहे दुनिया भर के सैकड़ों लोगों के साथ वीडियो स्क्रीनों के जरिये जुड़ सके। एक समुदाय के रूप में हम साथ हंसे, रोए, साथ में सांस ली, गाना गाया और यहां तक कि थोड़ी झपकी भी ली। बड़ों, बच्चों, और पालतू जानवरों की उपस्थिति में इकट्ठा होने से हमें इतने संकुचन के समय में खुद को कुछ उदार बनाने और खोलने में मदद मिली। हमने जो करुणा देखी, हम उसे जीवन में वापस ला रहे हैं।
हमने सैकड़ों गीत एक साथ सुने- स्वतंत्रता और मुक्ति के गीत, कृतज्ञता और पीड़ा के गीत, विश्वास और आशा के गीत। भिन्न-भिन्न टाइम जोन, महाद्वीपों, उम्र और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों के बावजूद एक साथ उठी हमारी आवाजें ऐसी थीं, मानो हम सब एक शरीर हों। हम अद्भुत साहस के भी गवाह बने। न्यूयॉर्क सिटी से जुड़ने वाली एक महिला ने डेढ़ सौ अजनबियों के साथ यह जानकारी साझा की कि कैसे उनके पड़ोस में रेफ्रिजरेटर और ट्रकों में शव भरे हुए हैं।
उसने उपेक्षित लोगों को देखकर उपजा अपना दुख साझा करते हुए बताया कि वह चिंतन कर रही है कि उसने जीवन भर ऐसे उपेक्षित लोगों के साथ कैसा बर्ताव किया था। इससे बाकी लोग भी उसकी ही तरह चिंतन के लिए प्रेरित हुए।
- इरेसिस्टेबल की डायरेक्टर, यह एक मीडिया प्रोजेक्ट है, जो कि दुनिया भर में सामाजिक न्याय से जुड़े लोगों और संगठनों को समर्थन करता है