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जानना है जरूरी: कोविड में बीमा कितना कारगर 

Wed, 26 May 2021 04:41 AM IST
नारायण कृष्णमूर्ति नारायण कृष्णमूर्ति
नारायण कृष्णमूर्ति Published by: नारायण कृष्णमूर्ति Updated Wed, 26 May 2021 04:41 AM IST
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corona virus: How effective is covid 19 insurance
इंश्योरेंस पॉलिसी - फोटो : pixabay

बीमा पॉलिसी की असली परीक्षा तब होती है, जब कोई दावा दायर किया जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब कुछ मामलों में पॉलिसीधारक या यहां तक कि पॉलिसीधारकके नॉमिनी की कोई स्पष्ट गलती नहीं होने के बावजूद पॉलिसी पर किए गए दावे को अस्वीकार कर दिया जाता है। आज इसकी चर्चा यहां इसलिए की जा रही है, क्योंकि बीमा पॉलिसी के दावों को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, खासकर महामारी के इस अनिश्चित समय में। 


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याद रखिए कि बीमा पॉलिसी (चाहे वह जीवन, स्वास्थ्य, संपत्ति या ऑटोमोबाइल से संबंधित हो) पॉलिसीधारक और बीमाकर्ता के बीच एक वित्तीय अनुबंध है, जिसमें बीमाकर्ता पॉलिसी समझौते के अनुसार उत्पन्न होने वाले दावे के मामले में पॉलिसीधारक या उनके नॉमिनी को वित्तीय प्रतिफल देने का वादा करता है। इसलिए यदि आपके पास एक स्वास्थ्य बीमा है, जो स्वास्थ्य परेशानियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर आपके द्वारा इलाज पर खर्च किए गए पैसे की भरपाई का वादा करता है, तो पॉलिसी लाभों की सीमा के अधीन बीमाकर्ता आपके अस्पताल में भर्ती होने पर बिलों का भुगतान करेगा। 

कई बार वास्तविक बीमा पॉलिसी लाभ क्या हैं और आप उसके बारे में क्या सोचते हैं, इसमें फर्क होता है। चिकित्सा बीमा के मामले में यह विशेष रूप से सच है, जहां अक्सर पॉलिसीधारक यह मान लेते हैं कि हर बीमारी के इलाज का खर्च पॉलिसी द्वारा कवर किया जाएगा। और, जब बीमाकर्ता द्वारा उनके दावे को अस्वीकार कर दिया जाता है, क्योंकि दावा बीमा अनुबंध के दायरे से बाहर है, तो पॉलिसीधारक ठगा हुआ महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, सीढ़ी से गिरने के कारण फ्रैक्चर के मामले को लें, ऐसे में आप अस्पताल जाएंगे और एक्स-रे तथा पट्टी करवाएंगे, इस उपचार को ज्यादातर चिकित्सा बीमा में कवर नहीं किया जाता है। कारण- इस स्थिति में 24 घंटे के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है, जो कि भुगतान किए जाने वाले चिकित्सा बीमा दावे की मूल शर्त है। 

अगर आप व्हाट्सएप ग्रुप या अन्य सोशल मीडिया पर हैं, तो संभावना है कि आपको भी एक संदेश मिला होगा, जिसमें कहा गया है कि दो लोकप्रिय प्रधानमंत्री (पीएम) योजनाओं- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई)- पर कोविड से संबंधित मौतों के लिए दावा किया जा सकता है। सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक कहा गया है कि यदि किसी करीबी रिश्तेदार / मित्र की मृत्यु कोविड या अन्य कारणों से हुई है, तो वे चार लाख रुपये बीमा लाभ का दावा करने के लिए पूरे वित्त वर्ष के दौरान 12 रुपये या 330 रुपये की प्रविष्टियों के लिए अपने बैंक खाते के विवरण या पासबुक प्रविष्टियों की जांच कर सकते हैं।

यह सही है कि वर्ष 2015 में सरकार ने बचत बैंक खाते रखने वाले देश भर के नागरिकों के लिए किफायती प्रीमियम पर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए जन धन-जन सुरक्षा योजना के तहत उपर्युक्त दो योजनाएं शुरू की थीं। लेकिन इसमें से पीएमजेजेबीवाई के तहत ही कोविड से संबंधित मौतों को पात्रता और दावा प्रक्रिया के अधीन कवर किया जाता है। जबकि पीएमएसबीवाई के साथ ऐसा नहीं है, जो 18 से 70 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता के लिए दो लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान करता है। 

चूंकि कोविड से संबंधित मृत्यु आकस्मिक मृत्यु के अंतर्गत नहीं आती है; इसलिए पीएमएसबीवाई के तहत इसके लिए दावा नहीं किया जा सकता है। इसलिए यहां तक कि कोविड से होने वाली मौतों के मामलों में भी, और यदि बैंक खाताधारक ने पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई का लाभ उठाया है, तो उनके नॉमिनी अधिकतम दो लाख रुपये का दावा कर सकते हैं। हालांकि, पीएमजेजेबीवाई 18 से 50 वर्ष की आयु के उन लोगों के लिए उपलब्ध है, जिनके पास बैंक खाता है और जो इस बीमा पॉलिसी में शामिल होने / ऑटो-डेबिट करने के लिए अपनी सहमति देते हैं। 

इसके अलावा, व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी दस्तावेज की तरह इस पॉलिसी के मामले में ऐसा कोई पॉलिसी दस्तावेज नहीं है, जिसका अर्थ है कि कई खाताधारकों को पॉलिसी के बारे में पता भी नहीं हो सकता है। इसके साथ ही, पॉलिसी विवरण के अनुसार, इस पॉलिसी के तहत दो लाख रुपये का जीवन कवर एक वर्ष की अवधि (एक जून से 31 मई तक) के लिए वैध है और फिर पॉलिसी का नवीकरण कराना होता है। इस योजना के तहत किसी भी कारण से बीमित व्यक्ति की मृत्यु के मामले में दो लाख रुपये का जोखिम कवरेज है और वार्षिक प्रीमियम 330 रुपये है। यह पॉलिसी खाताधारक के लिए 55 वर्ष की आयु तक उपलब्ध है और इससे अधिक नहीं। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों के बैंक खाते हैं और उनकी उम्र 55 साल है, और जो दुर्भाग्य से कोविड के शिकार हो गए हैं; उन्हें इस पॉलिसी का लाभ नहीं मिलेगा और न ही वे कोई दावा कर सकते हैं। सरकार की सामाजिक बीमा और पेंशन योजनाओं की जानकारी  https://jansuraksha.gov.in/Jan-Dhan Se Jan Suraksha Renewal of PMJJBY & PMSBY Schemes open for the period of 21st May 2017 to 31st May 2017. Please ensure to Auto-Debit your account accordingly.jansuraksha.gov.in पर देखी जा सकती है।

यदि कोई व्यक्ति पॉलिसी के योग्य है, तो बैंक खाते में उल्लिखित उनके नॉमिनी को संबंधित बैंक शाखा में दावा दायर करने की आवश्यकता होती है, जहां खाताधारक की मृत्यु के 30 दिनों के भीतर अंतर्निहित खाता मौजूद होता है। तो जिन लोगों ने अपने परिजनों को कोविड के कारण खो दिया है, क्या उन्हें इन योजनाओं के तहत दावा करने पर बीमा लाभ मिल सकता है? पीएमजेजेबीवाई का प्रबंधन भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा किया जाता है, जो कि राज्य के स्वामित्व के अधीन है, इसलिए बीमा दावों के निपटारे की संभावना संदिग्ध नहीं है। हालांकि, दावा करने की प्रक्रिया और इसमें शामिल कागजी कार्रवाई, विशेष रूप से उन स्थितियों में जहां खाताधारक अब उसी स्थान पर नहीं रहता, जहां का पता खाता में मौजूद है, समय पर दावों को कठिन बना सकता है। ऐसी आपदाओं के समय में यदि नॉमिनी और परिवार के सदस्यों से किसी पॉलिसी पर दावा करने की अपेक्षा करने के बजाय मृत्यु के कारण पॉलिसीधारक के खाते को बंद करने की पहल करते ही नॉमिनी को दावों का भुगतान स्वतः कर दिया जाए, तो संकट के समय में यह बड़ी मदद होगी।

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