{"_id":"68a916b4ff1f32b0a205c3aa","slug":"chatgpt-entering-territory-of-history-what-will-historians-do-souls-who-make-living-with-words-shaking-in-fear-2025-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"इतिहास के इलाके में जा रहा चैटजीपीटी: इतिहासकार क्या करेंगे? शब्दों से जीविका चलाने वालों की रूह कांपती है","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
इतिहास के इलाके में जा रहा चैटजीपीटी: इतिहासकार क्या करेंगे? शब्दों से जीविका चलाने वालों की रूह कांपती है
Sat, 23 Aug 2025 06:47 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
बिल वासिक, द न्यूयॉर्क टाइम्स मैगजीन के संपादकीय निदेशक
बिल वासिक, द न्यूयॉर्क टाइम्स मैगजीन के संपादकीय निदेशक
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 23 Aug 2025 06:47 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो :
अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
संपादक के तौर पर अपने पच्चीस वर्ष के कार्यकाल में मेरा सबसे पसंदीदा काम लेखकों को हमेशा यह समझाना रहा है कि कहानी क्या है : इसे कहां से शुरू और कहां समाप्त करना है तथा इसमें क्या महत्वपूर्ण और नया है। इस वर्ष की शुरुआत में मैनहट्टन स्थित गूगल के कॉरपोरेट ऑफिस कैफेटेरिया में मेरे पुराने मित्र, लेखक, इतिहासकार और तकनीकी पत्रकार स्टीव जॉनसन ने बताया कि वह कहानी लिखने के लिए एआई से सलाह ले रहे हैं। कई ऐतिहासिक पुस्तकों के लेखक जॉनसन ने इस बार 19वीं सदी के मध्य की महत्वपूर्ण घटना कैलिफोर्निया गोल्ड रश के बारे में किताब पर काम शुरू किया था, लेकिन उन्हें सूझ नहीं रहा था कि कैसे लिखें।
गौरतलब है कि 24 जनवरी, 1848 को जेम्स मार्शल ने कोलोमा, कैलिफोर्निया की एक मिल में सोने की खोज की। जब यह खबर पूरे देश व दुनिया में फैली, तो लाखों लोग सोने की तलाश में कैलिफोर्निया की ओर आकर्षित हुए और इस घटना को ही कैलिफोर्निया गोल्ड रश कहा गया। जॉनसन ने इस पर लिखने के लिए एक ऐसा एप डाउनलोड किया, जो खासकर शोधकर्ताओं और लेखकों के लिए ही तैयार किया गया है। मुझे दिलचस्पी इस बात में थी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस तरह से इतिहास लेखन के तरीके को बदल सकती है। उस शाम जॉनसन ने एआई पर किए अपने प्रयोगों के कुछ परिणाम मुझे दिखाए। शुरुआत में जॉनसन को लगा था कि एआई शायद उनकी इतनी मदद न कर सके। लेकिन उन्हें इस बात पर हैरानी हुई कि कैसे एआई, ज्यादातर ओपन-सोर्स टेक्स्ट और थोड़े से मानवीय श्रम के साथ उन्हें एक ऐसी अवधारणा दे गया, जिसका वे पूरी तरह से इस्तेमाल कर सकते थे। उन्होंने बताया, ‘मैंने अभी आपको जो कुछ भी दिखाया है, वह लगभग 30 मिनट का काम है।’ यही नहीं, एआई ने जॉनसन को जिस घाटी में सोना मिला, उसका क्रमबद्ध पूरा इतिहास लिखकर दिया था। जॉनसन ने जितना सोचा था, यह उससे कहीं ज्यादा था।
शब्दों से जीविका चलाने वाले ज्यादातर लोगों की तरह, मैंने भी बड़े भाषा वाले मॉडलों के उदय को आकर्षण और भय के साथ देखा है, और यह सोचकर ही मेरी रूह कांप उठती है कि उनमें से कोई मेरी ओर से लिख रहा है। कोई भी इतिहास प्रेमी जानता है कि ऑनलाइन कुछ घंटों की खोज से महीनों या वर्षों तक की पठन सामग्री मिल सकती है। इसे पूरा पढ़ना नामुमकिन है, लेकिन जैसे-जैसे एआई बड़े डाटा सेटों को कम समय में पढ़ने में ज्यादा सक्षम होता जा रहा है, यह लाजिमी है कि इतिहासकार और अन्य लेखक मदद के लिए इसकी ओर रुख करेंगे। पिछले कुछ महीनों में मैंने पाया है कि मेरी उम्मीद से ज्यादा लोग इसका प्रयोग करते हैं। एआई के संबंध में जॉनसन के अनुभव से यह कल्पना कर मैं कुछ चिंतित हुआ कि यदि एआई इतिहास लिखने लग गया, तो उन इतिहासकारों का क्या होगा, जो वर्षों की मेहनत के बाद दस्तावेजीकरण करते हैं। इस संबंध में मैंने कुछ इतिहासकारों से चर्चा की। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के संचार विभाग में पढ़ाने वाले इतिहासकार फ्रेड टर्नर के पास मैं यह सोचकर पहुंचा था कि उनसे पूछूंगा कि सूचना प्रौद्योगिकी के लंबे इतिहास में एआई कैसे फिट बैठता है, उल्टे उन्होंने बताया कि चैटजीपीटी ने उनकी नवीनतम पुस्तक में कैसे मदद की है। ऐसे ही एक अन्य विद्वान मार्क हंफ्रीज ने बताया कि ‘एआई की मदद से जो काम 20 सेकंड में हो जाता है, वही एक स्नातक छात्र को पूरा करने में हफ्तों लग सकते हैं।’ पुलित्जर पुरस्कार विजेता पुस्तक क्यूबा : एन अमेरिकन हिस्ट्री की लेखिका एडा फेरर ने बताया कि मैं एक किताब पूरी कर उसके शीर्षक पर अटकी हुई थी, चैटजीपीटी से पूछा, तो उसने मुझे करीब 20 शीर्षक सुझा दिए। हालांकि, मैंने उनका इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी वह काम के तो थे। वहीं, द विजार्ड एंड द प्रोफेट के लेखक चार्ल्स सी. मान कहते हैं, ‘मैंने नए शोध के लिए एआई का उपयोग किया, तो उसने कई बेहतरीन सुझाव व सुराग दिए, लेकिन एआई के लिए गलती दोहराना आसान था। अगर इसकी जगह इन्सान होता, तो गलती करने से पहले एक सेकंड रुकता, फिर सोचता क्या यह समझ में आ रहा है, फिर कहता-ओह बकवास, यह समझ नहीं आता। यही वह बात है, जो एआई नहीं कर सकता। यानी इसमें अपनी गलतियों को पकड़ने की क्षमता नहीं होती है।’
फीडहाइव एआई
फीडहाइव एक एआई-पावर्ड सोशल मीडिया मैनेजमेंट टूल है, जो आपके सोशल मीडिया अकाउंट्स को आसानी से और प्रभावी ढंग से मैनेज करने में मदद करता है। यह पोस्टिंग शेड्यूल ऑप्टिमाइज करता है। साथ ही यह विश्लेषण करता है कि आपके फॉलोअर्स कब सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं और उसी समय पोस्ट करने का सुझाव देता है। यह आपके कंटेंट के हिसाब से सबसे ट्रेंडिंग और प्रासंगिक हैशटैग्स सुझाता है, ताकि आपकी पोस्ट ज्यादा लोगों तक पहुंचे। यह एंगेजमेंट का विश्लेषण करता है। आप एकसाथ कई पोस्ट्स शेड्यूल कर सकते हैं, जिससे समय की बचत होती है। यह डाटा के आधार पर स्मार्ट सुझाव देता है, जिससे आपकी पोस्ट्स का प्रभाव बढ़ता है। ©The New York Times 2025