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परिदृश्य: जम्मू-कश्मीर में बदलता कारोबारी माहौल और विदेशी निवेश की संभावनाएं
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LG Manoj Sinha
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संवाद
विस्तार
पिछले दिनों श्रीनगर के सेमपोरा में विदेशी निवेश से निर्मित होने वाले 250 करोड़ रुपये की लागत के एक मॉल की आधारशिला उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रखी। यह श्रीनगर ही नहीं, विदेशी पूंजी से बनने वाला प्रदेश का पहला मॉल होगा, जिसे 2026 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। दुबई का एम्मार समूह इसका निर्माण कर रहा है। इसके अलावा जम्मू और श्रीनगर में डेढ़ सौ-डेढ़ सौ करोड़ रुपये की लागत वाले एक-एक आईटी टावर का विनिर्माण भी एम्मार समूह कर रहा है। यह इसका प्रमाण है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद की बदली परिस्थितियों में जम्मू-कश्मीर में भी विदेशी निवेश आ रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के मुताबिक, नई औद्योगिक नीति आने के 22 महीनों में 5,000 से अधिक देसी व विदेशी कंपनियों के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
यह सच है कि वहां नए उद्योग आरंभ हो रहे हैं। यह प्रदेश के बदलते आर्थिक, वित्तीय व कारोबारी स्थिति का ही प्रमाण है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शिलान्यास की गई परियोजनाओं की कुल लागत 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रदेश ने अगले कुछ वर्षों में कुल 75,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। वस्तुतः जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार पूर्व की सभी सरकारों से अलग दृष्टिकोण से काम कर रही है। आर्थिक गतिविधियों द्वारा प्रदेश का माहौल बदलना इनमें प्रमुख है।
हाल ही में इंडिया-यूएई इन्वेस्टर्स मीट में जम्मू कश्मीर की ओर से उपराज्यपाल सिन्हा ने घोषणा की कि निवेश संबंधी प्रस्ताव आने के 15 दिन के अंदर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। देश के किसी भी प्रदेश में ऐसी घोषणा शायद ही हुई हो। भले ही जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं, पर शांति और बेहतर सुरक्षा माहौल को कोई नकार नहीं सकता। आम लोग यह महसूस करने लगे हैं कि पहले की तरह आतंकवादियों के पनपने, उन्हें संरक्षण मिलने तथा हिंसात्मक गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल नहीं है। पिछले वर्ष एक करोड़ 88 लाख पर्यटकों के आने की सूचना है।
अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ऐसे अनेक कानूनों का अंत कर दिया गया, जो वहां की स्वाभाविक, आर्थिक व कारोबारी गतिविधियों के रास्ते की बाधाएं थीं। अगर भूमि कानून नहीं बदला होता, तो उपराज्यपाल यह वादा नहीं कर सकते थे कि निवेश घोषणा के 15 दिनों के अंदर जमीन उपलब्ध हो जाएगी। हालांकि शत-प्रतिशत आधारभूत ढांचा तैयार हो गया है, यह नहीं कहा जा सकता। मगर तीन वर्षों में निवेश के लिए वातावरण तैयार करने में काफी सफलता मिली है। जम्मू कश्मीर में कारोबार के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है। सामान्य एवं प्रोफेशनल शिक्षा का भी विस्तार हुआ है।
अभी तक कृषि और पर्यटन जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मूलाधार रहा है। लेकिन अब कंपनियां पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, रसद, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल, चिकित्सा, पर्यटन और शिक्षा क्षेत्र में भी रुचि दिखा रही हैं और निवेश कर रही हैं। स्वाभाविक ही आधारभूत संरचना एवं सरकारी नीतियों का ध्यान इन्हीं पर होगा।
भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जम्मू कश्मीर आज बदलाव का परिदृश्य उत्पन्न कर रहा है। एक लाख करोड़ रुपये की तो हाईवे और उससे जुड़ी अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। रेल मार्ग के जरिये कश्मीर को इसी वर्ष कन्याकुमारी से जोड़ने पर तेजी से काम चल रहा है। हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण हुआ है। इन सबसे निवेशकों के अंदर विश्वास पैदा हुआ है। सरकार के साथ उद्योगपतियों, कारोबारियों का भी दायित्व है कि वे वातावरण बदलने में अपने सक्रिय भूमिका के साथ सहयोग करें।
जनवरी, 2021 में जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने नए निवेश को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक विकास को ब्लॉक स्तर तक ले जाने के लिए 28,400 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक नई औद्योगिक विकास योजना की घोषणा की थी, जिसका सकारात्मक असर हुआ। उम्मीद है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर भी अन्य राज्यों के समानांतर आर्थिक विकास की पटरी पर दौड़ता दिखाई देगा।