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रियायतों से भरे बजट की उम्मीद, निस्संदेह वित्त मंत्री के समक्ष चुनौतियां

Mon, 01 Feb 2021 08:20 AM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 01 Feb 2021 08:20 AM IST
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Budget 2021 expecting full of concessions challenges for Finance Minister Nirmala Sitharaman
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

संसद में पेश वित्त वर्ष 2020-21 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी से निर्मित आर्थिक मुश्किलों का सामना करने में भारत की कोविड नीति सफल रही है। इससे अर्थव्यवस्था में तेज सुधार की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं। लेकिन अब भी महामारी से प्रभावित वर्गों व लोगों को राहत तथा अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन जारी रखे जाने की जरूरत है। आर्थिक समीक्षा में आगामी वित्त  वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 11 फीसदी रहने की संभावना व्यक्त की गई है, उससे रियायतों और प्रोत्साहनों से भरे बजट की उम्मीद की जा रही है।


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निस्संदेह वित्त मंत्री के समक्ष चुनौतियां हैं। कोविड-19 की वजह से बढ़ी हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच एक ऐसे बजट की उम्मीद की जा रही है, जिससे न केवल आर्थिक सुस्ती का मुकाबला किया जा सके, बल्कि विभिन्न वर्गों की मुश्किलों को कम किया जा सके। बजट में वित्त मंत्री को बड़े वित्तीय प्रावधान करने होंगे, और रोजगार वृद्धि की डगर पर भी बढ़ना होगा। ऐसे में वित्त मंत्री बजट में कर संग्रह वृद्धि और विनिवेश के बड़े लक्ष्य के साथ राजकोषीय घाटे का नया खाका पेश कर सकती हैं। उम्मीद है कि केंद्रीय वित्त मंत्री वर्ष 2021-22 के बजट में खेती और किसानों के लिए विशेष प्रावधान कर सकती हैं। वह मनरेगा और किसान सम्मान निधि के लिए अतिरिक्त धन भी आवंटित कर सकती हैं। सरकार ऐसे नए उद्यमों तथा कृषि बाजारों को प्रोत्साहन दे सकती है, जिनसे न केवल कृषि उत्पादकों को उचित मूल्य मिले, बल्कि उपभोक्ताओं को भी उचित मूल्य पर ये उत्पाद मिल सकें। ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के साथ-साथ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी दूर करने वाले कामों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।

वित्त मंत्री छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए टैक्स में छूट की सीमा को दोगुना कर पांच लाख रुपये कर सकती हैं। नए बजट में नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जा सकती है और धारा 80सी के तहत कर छूट की सीमा भी 2.50 लाख रुपये हो सकती है। इसी तरह सरकार इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 80डी के तहत कर कटौती की सीमा को बढ़ा सकती है। कोरोना के इलाज पर आए खर्च को भी धारा 80डीडीबी के तहत कर छूट के लिए शामिल किया जा सकता है। आज पेश होने वाले बजट में जहां शेयर बाजार के जोखिमों को कम करने के उपयुक्त प्रावधान किए जा सकते हैं, वहीं शेयर बाजार को और अधिक लाभप्रद बनाने के प्रावधान भी सुनिश्चित किए जा सकते हैं। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में शेयर और म्यूचुअल फंड पर लगने वाले लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) को हटाया जा सकता है।

चूंकि कोविड-19 के कारण देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई), पर्यटन उद्योग, होटल उद्योग सहित विभिन्न कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, उनके लिए नए बजट में बड़ी धनराशि रखी जा सकती है। नए बजट में टीकाकरण अभियान, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ रोजगार वृद्धि के लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए भी अच्छा-खासा आवंटन हो सकता है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान, रक्षा बजट में बड़ी वृद्धि, शोध एवं नवाचार, निर्यात विकास कोष तथा फॉर्मा उद्योग आदि के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। बजट में जहां कर संग्रह, मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के साथ-साथ विनिवेश लक्ष्य भी बढ़ाया जा सकता है, वहीं राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 5-6 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

उम्मीद है कि वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे की फिक्र न करते हुए अपने वादे के अनुसार ‘अभूतपूर्व प्रोत्साहनों का बजट’ पेश करेंगी। ऐसे में निश्चित रूप से नए बजट से देश में निवेश व रोजगार बढ़ेंगे और देश कोविड-19 की आर्थिक सुस्ती से निपटने की डगर पर आगे बढ़ता दिखाई दे सकेगा।

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