बजट 2021: नागरिक डाटा का बेहतर इस्तेमाल
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वे दिन बीत चुके हैं, जब बजट के दिन आयकरदाता राहत का इंतजार करते थे। कोविड की पृष्ठभूमि में पिछले साल आर्थिक व वित्तीय मोर्चे पर वित्तमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं भी करदाताओं के अनुकूल नहीं थीं। जैसे वित्त वर्ष 2019-20 को मार्च, 2020 से आगे बढ़ाना पढ़ा। 2019-20 के टैक्स रिटर्न भरने की जो अवधि विगत जून में खत्म हो जानी थी, उसे इस साल जनवरी तक बढ़ाया गया। इस बजट में 75 साल और उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को दी गई खुश करने वाली है। इसका प्रावधान यह है कि अगर संबंधित व्यक्ति का आयकर बैंक द्वारा काट लिया जाता है, तो उसे रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है। यह सुविधा उन वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगी, जिनकी आय का स्रोत पेंशन और ब्याज है। इसके अलावा आयकर नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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हमारे वित्तीय जीवन में डिजिटाइजेशन और तकनीक खामोशी से बड़ी भूमिका अदा कर रही है। एप्स के साथ आ रही वित्तीय प्रौद्योगिकी हमें रीयल टाइम बचत, निवेश और खर्च के बारे में बताती हैं; ऐसे ही करदाताओं से संबंधित आंकड़ा सरकारों को नीति निर्माण में मदद कर रहा है और उन्हें ये भी बता रहा है कि किन क्षेत्रों में योजना बनाने की जरूरत है। मसलन, टैक्स फाइलिंग डाटा 2014 के तीन करोड़ से बढ़कर 2020 में 6.5 करोड़ हो गया है, जिससे नीति निर्माताओं को पता लगाने में आसानी हो रही है कि किस स्तर के करदाता की आय और उनकी बचत व निवेश योजनाएं क्या हैं। सरकार के पास डाटा होने के कारण ही उसके लिए 75 व और उससे अधिक उम्र के नागरिकों को टैक्स रिटर्न भरने से राहत देने का कदम उठाना संभव हो पाया।
दरअसल सरकार के पास यह आंकड़ा है कि 75 वर्ष और उससे अधिक के ज्यादातर लोगों की आय का जरिया पेंशन और ब्याज ही है। डाटा की ताकत का ही प्रभाव है कि करदाताओं को पिछले कर आकलन (टैक्स एसेसमेंट) से राहत मिलती जा रही है, जो दस साल से घटकर छह साल रह गई थी, जिसे इस बजट में और घटाकर तीन साल कर दिया गया है। और तीन साल पुराने टैक्स के मामलों को भी उसी स्थिति में खोला जाएगा, जब किसी व्यक्ति के पास एक साल में 50 लाख रुपये या उससे अधिक की अघोषित आय का पता चलेगा। कर विवादों का निपटारा और 'विवाद से विश्वास' जैसी योजनाएं न सिर्फ सफल रही हैं, बल्कि इनकी सफलता के कारण सरकार में इसकी समयसीमा बढ़ाकर फरवरी, 2020 तक करने का आत्मविश्वास पैदा हुआ। करदाताओं के कर विवादों के हल के लिए उसने और भी कदम उठाए।
इसी तरह छोटी कंपनियों में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के हितों के लिए भी सख्त कदम उठाए जाए तथा उन नियोक्ताओं को चेतावनी दी गई, जो पीएफ, रिटायरमेंट फंड तथा दूसरे सामाजिक सुरक्षा फंड के लिए कर्मचारियों के वेतन से पैसे तो काटते हैं, पर निर्धारित समय में उसे जमा नहीं करते। नीति निर्माण के लिए आंकड़ों का संग्रहण तब तक अच्छा है, जब तक इससे करदाताओं को नुकसान न हो। संगृहीत सूचनाओं का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। जिन नागरिकों को कोविड की वैक्सीन मुफ्त में दी जा रही है, उनसे संबंधित आंकड़े अब स्वास्थ्य सेवा डाटा बैंक बनाने में सरकार की मदद करेंगे। हम उम्मीद करें कि नागरिकों से संबंधित आंकड़ों का इस्तेमाल हमारे लाभ और कल्याणकारी योजनाओं के लिए होगा।