फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Bihar poor performance in economy, human, health indices tells real story of governance system of state

मुद्दा: सूचकांकों के आईने में बिहार के विकास में अंतिम व्यक्ति, बदहाली को लेकर उठे स्वाभाविक सवाल

Mon, 04 Mar 2024 07:02 AM IST
Santosh Mehrotra संतोष मेहरोत्रा
Updated Mon, 04 Mar 2024 07:02 AM IST
विज्ञापन
सार
विभिन्न सूचकांकों में बिहार की बदहाल स्थिति राज्य की शासन व्यवस्था की वास्तविक कहानी बयां करती है।
loader
Bihar poor performance in economy, human, health indices tells real story of governance system of state
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

यदि कोई राज्य सरकार लगभग दो दशकों से सत्ता में है, तो एक अपरिहार्य प्रश्न उठता है कि उसने आर्थिक विकास, मानव विकास और शासन के मानकों में कैसा प्रदर्शन किया? 2011-12 से 2021-22 तक, बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 5.9 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा, जो राष्ट्रीय औसत के काफी करीब है। लेकिन बिहार के जीएसडीपी का स्तर प्रमुख राज्यों में सबसे कम है, बावजूद इसके कि निचले आधार पर उच्च वृद्धि हासिल करना आसान होता है। शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद में 2011-12 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद गुजरात का 43, कर्नाटक का 41 और तमिलनाडु का 34 फीसदी था; 2021-22 में बिहार के सकल घरेलू उत्पाद का हिस्सा घटकर गुजरात का 35, कर्नाटक का 33 और तमिलनाडु का 32 फीसदी रह गया।


बिहार की प्रति व्यक्ति आय भारत में सबसे कम है। 1960-61 में बिहार की प्रति व्यक्ति एनएसडीपी राष्ट्रीय औसत का 70 फीसदी थी; जो 2005 तक घटकर राष्ट्रीय का 33 फीसदी हो गई, जब जेडीयू सरकार सत्ता में आई। 2005 से आज तक नीतीश  कुमार की ही सरकार रही। 2020-21 में, बिहार की प्रति व्यक्ति एनएसडीपी राष्ट्रीय औसत का 33 फीसदी थी। इस प्रकार, उनकी सत्ता में लगभग दो दशकों के बाद भी राष्ट्रीय औसत के सापेक्ष बिहार का अभिसरण के बजाय थोड़ा विचलन ही हुआ है।


दूसरा मुद्दा बिहार के भीतर प्रति व्यक्ति उत्पाद में स्थानिक असमानता का है। 2020-21 में प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद पटना में 1,15,239 रुपये, जबकि बेगूसराय और मुंगेर में क्रमशः 45,497 और 42,793 रुपये था, यानी पटना के आधे से भी कम। 2020-21 में बिहार का प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद मात्र रुपये 31,522 था, जो पटना (1,15,239 रुपये) के एक-तिहाई से भी कम है। इसके अलावा, बिहार ने संरचनात्मक परिवर्तन के चिंताजनक उलटफेर का भी अनुभव किया है। 2017-18 और 2022-23 के बीच कृषि में कार्यबल 50 फीसदी बढ़कर 125 लाख से 190 लाख हो गया है; जबकि 2020 और 2023 के बीच कृषि में भारत के कार्यबल में छह करोड़ की वृद्धि हुई है, बिहार में यह वृद्धि बहुत अधिक है।

नीति आयोग की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग (2019) में बिहार 29 में से 26वें स्थान पर है। 2021 में बिहार को भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सिर्फ 0.29 फीसदी प्राप्त हुआ। बुनियादी मानव पूंजी की सक्षमता के बिना बिहार विदेशी निवेश आकर्षित करने में विफल रहा है। बिहार की 2025 तक राष्ट्रीय निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 10 फीसदी करना चाहता है, हालांकि, वर्तमान हिस्सेदारी सिर्फ 0.52 फीसदी है। यहां तक कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 के संदर्भ में भी बिहार में ‘बहुत कम सामाजिक प्रगति’ हुई है, और इसमें 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में वह 35वें स्थान पर है।

स्वास्थ्य प्रदर्शन सूचकांक (2019-20) में बिहार 19 राज्यों में 18वें स्थान पर है। बिहार में नवजात मृत्युदर केरल की तुलना में पांच गुना और राष्ट्रीय औसत से 3.5 गुना अधिक है। इसका मुख्य कारण यह है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में जरूरी कार्यबल के मुकाबले स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं की कमी के मामले में बिहार देश के राज्यों में शीर्ष पर है।

इसी तरह, शिक्षा के मामले में, नीति आयोग के स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक 2019 में बिहार 20 बड़े राज्यों में 19वें स्थान पर है। फिर स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कैसे हो सकता है? स्कूलों में 2.2 लाख शिक्षकों की कमी है, विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों और पैरा-मेडिक्स की कमी है।

सुशासन सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण घटक होता है। सुशासन सूचकांक में बिहार का नीचे के कुछ राज्यों में आना 'सुशासन' की वास्तविक कहानी बताता है। कुल मिलाकर, जब तक हम आर्थिक या सामाजिक परिवर्तन के बिना आर्थिक विकास का पीछा करते हैं, हम गांधी जी की नसीहत से दूर चले जाते हैं कि 'विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए!’
(-साथ में डॉ. राकेश रंजन)
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed