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पड़ोस: बांग्लादेश में हद पार हो रही है... तनाव के ऐसे दौर में विदेश सचिव मिस्री का दौरा बेहद अहम

Mon, 09 Dec 2024 04:55 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 09 Dec 2024 04:55 AM IST
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सार
कभी भारत के सबसे भरोसेमंद पड़ोसी रहे बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बहाने हुए तख्तापलट के बाद से अंतरिम सरकार के कार्यकाल में जिस मध्ययुगीन ढंग से मंदिरों को तोड़ा व मूर्तियों को जलाया जा रहा है, वह बिल्कुल अस्वीकार्य है। बांग्लादेश पर दबाव बनाने के सभी कारगर उपायों पर विचार होना चाहिए।
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Bangladesh Unrest Student agitation coup Sheikh Hasina vs Muhammad Yunus Temple Idol vandalism
बांग्लादेश में हद पार हो रही है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शेख हसीना के कार्यकाल में भारत के विश्वसनीय पड़ोसी रहे बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हमले तो छात्र आंदोलन के बहाने हुए तख्तापलट के बाद से ही हो रहे हैं, लेकिन अब जिस मध्ययुगीन तौर-तरीकों से वहां मंदिरों को तहस-नहस किए जाने और मूर्तियों को जलाए जाने की घटनाएं रोके नहीं रुक रहीं, वे वाकई बेहद चिंतित करने वाली हैं।



बांग्लादेश की आजादी के बाद से वहां इस तरह की घटनाएं होती रही हैं, लेकिन इतने लंबे समय तक अस्थिरता रही हो, ऐसा 1971 के बाद से नहीं देखा गया। बांग्लादेश सरकार का इन घटनाओं पर आंखें मूंदे रहना भी चौंकाता है। पांच अगस्त को शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद पहले तीन सप्ताह में ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की दो हजार से भी ज्यादा घटनाएं दर्ज की गईं थीं, लेकिन हैरत की बात है कि अंतरिम सरकार के प्रमुख इसे गंभीर मुद्दा नहीं मानते।


दरअसल, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का रवैया पूरी तरह से भारत विरोधी है, जो उनके फैसलों में भी दिखता है। धर्मगुरु चिन्मयदास की गिरफ्तारी के विरोध में ढाका समेत कई इलाकों में बड़े प्रदर्शन हुए, तो दूसरी तरफ, भारत ने भी धर्मगुरु की गिरफ्तारी के मामले को निष्पक्षता से देखने की अपील की थी। लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में बांग्लादेश की ओर से कहा गया कि यह उसका अंदरूनी मामला है। यह जानते हुए भी कि शेख हसीना से पहले खालिदा जिया के कार्यकाल में बांग्लादेश किस तरह से पाकिस्तानी आतंकियों का ठिकाना बन गया था और पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भारत कभी एक मित्र के रूप में सामने आया था, अगर यूनुस सरकार भारत के बजाय उसी पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर जोर दे रही है, तो इससे क्या समझा जाए। ऊपर से यूनुस का यह दावा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकार शेख हसीना सरकार की अपेक्षया अंतरिम सरकार के कार्यकाल में ज्यादा सुरक्षित हैं, जो हालात दिख रहे हैं, उनसे बिल्कुल उलट है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध अमेरिका के शिकागो व वाशिंगटन जैसे शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन भारत के प्रमुख विपक्षी दलों की चुप्पी अखरती है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक वर्ग ने जिस एकजुट ढंग से पलायन के बजाय विरोध का रास्ता आख्तियार किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है। भारत बांग्लादेश के साथ करीब चार हजार किलोमीटर लंबी सीमारेखा साझा करता है और बांग्लादेश में कट्टरपंथी सरकार के दौर में आतंकी किस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गए थे, उससे भी भारत अच्छे से वाकिफ है। ऐसे तनाव के दौर में, विदेश सचिव के बांग्लादेश दौरे की अहमियत और बढ़ जाती है।

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