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चुनौती को मिशन के रूप में देखता देश

Tue, 19 May 2020 08:30 AM IST
संजीव कुमार झा आशुतोष शर्मा, सचिव, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग
आशुतोष शर्मा, सचिव, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 19 May 2020 08:30 AM IST
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ashutosh sharma editorial, The country sees the challenge as a mission
नमूनों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कोविड-19 ने दुनिया को एक बड़ी चुनौती दी है। ऐसे में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग व इसकी वैज्ञानिक बिरादरी ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया है। वैसे अभी तक कोई दवा या वैक्सीन इस बीमारी को लेकर नहीं बनी है। शोध जारी है, पर सफलता अभी नहीं मिली है। अपना देश भी कोविड-19 पर काम करने की संभावनाओं को एक मिशन के रूप में देख रहा है। इसमें इस महामारी के हर एक पहलू पर अध्ययन व चिंतन हो रहा है। तमाम उपलब्धियां विज्ञान-तकनीक से ही संभव होंगी, चाहे वह वायरस के व्यवहार को समझना हो, मनुष्य के शरीर में इसका दुष्प्रभाव देखना हो या फिर इसके फैलने के तौर-तरीके को जानना हो और इस दौरान दुनिया के दूसरे देशों के प्रयोगों से भी जुड़ना है।


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आज अपने देश में टेस्टिंग लैब्स, संस्थान व वैज्ञानिक क्षमताओं की कोई कमी नहीं है, और ये सब सामूहिक रूप से काम भी कर रहे है। आने वाले समय में दो नतीजे सामने आएंगे। पहला दवा या वैक्सीन, दूसरा इस बीमारी की त्वरित पहचान कर पाने का सरल तरीका। आज सबसे बड़ी जरूरत इसकी है कि हम रोज कितनी जांच कर सकते हैं।

यह विज्ञान एवं तकनीकी के बेहतर उपयोग से ही संभव होगा। हमारे वैज्ञानिक समूहों ने इस महामारी के हर पहलू पर अध्ययन शुरू कर दिया है, चाहे वह संक्रमित लोगों का प्रबंधन हो, सस्ते टिकाऊ वेंटिलेटर की खोज हो या फिर श्वसन प्रणालियां स्थापित करना हो। न्यूक्लिक एसिड आधारित डिटेक्टिंग किट हो व एंटीबॉडी, एंटीजन, शोधकार्य प्रगति पर हैं।

देश में सस्ते पीपीई, मास्क, सैनिटाइजर तैयार हो रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। प्लाज्मा थैरेपी पर भी काम हो रहा है। शोध प्रयोगशालाएं, तकनीकी संस्थान व अकादमिक संस्थान कई स्तरों पर इसमें जुटे हैं। ये सब कार्य आपसी सुझाव व समाधान पर आधारित हैं। भारत विज्ञान एवं तकनीकी में बड़ी गहरी समझ रखता है। देश के पास इसके लिए ढांचागत सुविधाओं के अलावा और कई तरह के बड़े स्तर के शोध संस्थान भी हैं।

वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और फेब्रिकेशन गुणवत्ता वाले ऊंचे दर्जें के शोध के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। इस चुनौती में भी हम हर रूप में हर स्तर पर तैयार हैं। जल्दी ही इस संकट के समाधानों के साथ हम सबके बीच में होंगे। हमें यह बात स्वीकारने से भी हिचकिचाना नहीं चाहिए कि कुछ क्षेत्रों में हमें और विकसित होने की आवश्यकता है। जैसे, हमें कोविड-19 की जांच का दायरा तेज करना होगा और साथ में उसकी गुणवत्ता को ज्यादा प्रभावी बनाना होगा। हालांकि कोरोना से निपटने के लिए अपने वर्तमान शोधों को हम दूसरे देशों की तुलना में कम या गौण नहीं समझ सकते।

लेकिन कुछेक ऐसे विषय भी हैं, जिनमें हम विकसित देशों से बेहतर नहीं हैं। विज्ञान के क्षेत्र में अपनी स्थिति को हम दो तरह से देख सकते हैं। एक तरफ वैज्ञानिकों का एक वर्ग नए-नए शोधों में लगा है। विज्ञान के नए प्रयोग करने और नवाचारों को तय करने की जिम्मेदारी इससे जुड़े शोध संस्थानों और एकेडमिशियन की है। दूसरी तरफ हमें इस पर भी सोचना है कि विज्ञान को प्रभावी तरीके से अर्थव्यवस्था से कैसे जोड़ा जाए, ताकि बड़े स्तर पर समाज में इसकी पहुंच हो सके।

ज्ञान-विज्ञान पर आधारित आर्थिकी देश की स्थिति को मजबूत तो करती है, साथ में अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा भी पैदा करती है। जब-जब हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति का आकलन करते हैं, तो हर मामले में विकसित देशों की तुलना में खुद को सक्षम पाते हैं।

कोविड-19 जैसी महामारी ने आज हमें यह सोचने-समझने को मजबूर कर दिया कि इससे निपटने के लिए हम स्वयं क्या कर सकते हैं और कितने तैयार हैं। हमारा आज का विज्ञान तंत्र सामूहिक रूप से विज्ञान की उपलब्धियों को शुरुआती दौर में छोटे स्तर पर शुरू करके उसको एक बड़े स्तर पर ले जा सकता है।

एक बात तो बड़ी साफ और स्पष्ट है कि जिस देश में विज्ञान आधारित आर्थिकी को जोड़कर देखा जाता है, वे प्रगति करते हैं। आज युवा नए प्रयोगों और नॉलेज कल्चर को लेकर आगे आएं, तो वे बेहतर दर्जें के शोध केंद्रों में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर नए स्टार्ट अप भी शुरू कर सकते हैं। वे नई तकनीकी को आगे बढ़ाते हुए सरकार की नीतियों के साथ मिलकर एक बहुत बड़ा सपोर्ट सिस्टम खड़ा कर सकते हैं। 

इनमें एक तरह की आवश्यकता भी जुड़ी होगी और दूसरी तरफ हमारे उद्योग भी आगे बढ़ेंगे। शिक्षा और शोधों को एक साथ जोड़कर देखे जाने की आवश्यकता है, ताकि वैज्ञानिकों की क्षमता का देश को लाभ मिल सके।

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