आपका शहर Close

विधानसभा चुनाव 2017: रुझान व नतीजे (आगे/जीते)

भय से बड़ी कोई हिंसा नहीं होती

श्यौराज सिंह बेचैन

Updated Wed, 31 Oct 2012 09:37 PM IST
article of sheoraj singh
बीते महीने विश्व हिंदी सम्मेलन के सिलसिले में मैं दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में था। वहां मैंने यह जानने की कोशिश की कि सरकारी-गैरसरकारी सेवाओं, कला, मीडिया, नृत्य, सिनेमा, साहित्य, शिक्षा और शासन-प्रशासन में अश्वेत महिलाओं की कितनी भागीदारी है। भारतवंशी महिला जेन्निफर गोवेंडर ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका के विकास में अश्वेतों की शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज भी अश्वेतों को एक समान, मुफ्त, अनिवार्य शिक्षा देने के लिए आंदोलन चल रहा है।
जिस वक्त हम अफ्रीकी महिलाओं की आजादी के बारे में बातें कर रहे थे, हमारे देश में डीडी भारती चैनल पर दलित बालिकाओं के साथ बलात्कार से संबंधित खास खबर आ रही थी। अफ्रीका से लौटने के बाद अखबारों में मैंने देखा कि छोटी-छोटी दलित बच्चियों के साथ गैरदलितों द्वारा सामूहिक बलात्कार की दिल दहला देनेवाली खबरें प्रकाशित थीं। मुझे बलात्कार पीड़ित बच्चियों की वेदना के बारे में सोचकर फैज का एक शेर याद आ रहा है-कौन आजाद हुआ मुल्क में कातिल के सिवा? क्या हम अब भी कह सकते हैं कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता वास करते हैं और वह हमारा अपना ही देश है?

सामंती संस्कृति के सिपहसालार सुझाव दे रहे हैं कि लड़कियों का बचपन में विवाह कर दो, ताकि बलात्कार की नौबत न आए। वे लड़कियों के मोबाइल न रखने अथवा जींस न पहनने का भी उपाय बता रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि 90 फीसदी लड़कियां खुद ही घर से बाहर एक-दो पुरुषों के साथ जाती हैं और बाहर समूह में फंस जाती हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिनके कंधों पर इन बालिकाओं के संरक्षण का दायित्व है, उनकी धारणाएं क्या हैं?

क्या ऐसे लोग हमारे जनप्रतिनिधि कहलाने के लायक हैं? चेन्नई से प्रकाशित एक अंगरेजी अखबार के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में हर दिन चार महिलाओं के साथ बलात्कार होते हैं। इस वर्ष के शुरुआती छह महीने के दौरान वहां बलात्कार की 754 घटनाएं हो चुकी हैं। मगर हरियाणा में चुन-चुनकर दलित बालिकाओं के साथ ही ये शर्मनाक हादसे हुए हैं। आखिर दलित लड़कियों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है, इसका जवाब ढूंढने की कोशिश करनी होगी।

गौरतलब है कि हमारे देश में दलित जातियां भूमिहीन एवं व्यवसायहीन हैं। ग्रामीण दलितों का जीवन भूस्वामियों के अधीन है। उनकी मुक्ति का सारा दारोमदार बच्चों, खासकर बेटियों की शिक्षा पर ही निर्भर है। ऐसे में अगर उनके साथ ऐसे हादसे होते रहे, तो कौन मानेगा कि उसे भी संविधान में जीवन रक्षा का अधिकार दिया गया है और इस देश में अनुसूचित जाति से संबंधित कानून या आयोग भी काम करता है?

भय से बड़ी कोई हिंसा नहीं होती। भय के चलते ही दलित माता-पिता अपनी बच्चियों को स्कूल नहीं भेजना चाहते। ऐसे ही भयावह माहौल में एक पिता ने अपराधियों का मुकाबले करने में खुद को असमर्थ पाकर आत्महत्या कर ली। आखिर किस गुनाह की सजा दलित माता-पिताओं को मिल रही है? क्या उनका कुसूर यही है कि वे कन्या भ्रूणहत्या नहीं करते और अपनी बेटियों को पालते हैं, अंतरजातीय विवाह की स्थिति में भी वे अपनी बच्चियों की मान हत्या नहीं करते!

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दलित गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के कार्यभार संभालने के बाद दलित उत्पीड़न की घटनाओं में तेजी आई है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने जिस दिन अपनी इच्छा जताई कि संसद में और महिलाएं चुनकर आएं, उसके अगले ही दिन हिसार में बलात्कार पीड़ित लड़कियों के अभिभावकों ने तय किया कि वे अपनी बेटियों को घर से बाहर स्कूल नहीं भेजेंगे।

तो सवाल उठता है कि संसद में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ेगी। हरियाणा में न दलित साहित्य है और न दलित राजनीति। तो क्या फौज लगाकर दलित बच्चियों को तालीम दी जाएगी? या उन्हें यथास्थिति में छोड़कर देश को विकसित देशों की श्रेणी में ले जाया जाएगा! हरियाणा में दलित महिलाओं की दुर्दशा देखकर कौन कह सकता है कि यहां उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन का हक दिया जा रहा है।
Comments

स्पॉटलाइट

इन चीजों को खाने के बाद भूल कर भी ना करें दूध का सेवन

  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

जहरीले स्प्रे या क्वॉइल की क्या जरूरत, जब घर में मौजूद इन चीजों से ही भाग जाते हैं मच्छर

  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

हनीमून पर गई अनुष्‍का की ताजा तस्वीरें आईं सामने, पति कोहली के साथ दिखी 'विराट' खूबसूरती

  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

एयर इंडिया में 10वीं पास के लिए वैकेंसी, ऐसे करें आवेदन

  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

साप्ताहिक राशिफलः इन 4 राशि वाले लोगों के व्यावसायिक जीवन में आएगा बड़ा बदलाव

  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

Most Read

बांग्ला मुक्ति संघर्ष का अधूरा संकल्प

Incomplete resolution of the liberation struggle of Bangladesh
  • रविवार, 17 दिसंबर 2017
  • +

कसमे-वादे और बैंक डिपॉजिट

promise and Bank Deposit
  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

गुजरात बहुत कुछ तय करेगा

Gujarat will decide a lot
  • सोमवार, 18 दिसंबर 2017
  • +

ताकि बची रहें नदियां

So that rivers stay
  • रविवार, 17 दिसंबर 2017
  • +

क्या अब नेपाल में स्थिरता आएगी?

Will there be stability in Nepal now
  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

आसान नहीं राहुल की राह

Not easy way for Rahul
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!