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मुद्दा: अंतरिक्ष को तो बख्श दें... नए प्रकार के कचरे की समस्या पैदा होगी

Vivek S Agarwal विवेक एस अग्रवाल
Updated Wed, 28 May 2025 05:54 AM IST
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सार
विभिन्न राष्ट्रों द्वारा अंतरिक्ष पर्यटन एवं परीक्षणों को निजी क्षेत्र के लिए खोल देने से प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ नए प्रकार के कचरे की समस्या पैदा होगी।
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Alarming Issue spare the space at least new type of garbage problem will arise
अंतरिक्ष (प्रतीकात्मक) - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

समस्त राष्ट्र अंतरिक्ष में अपनी जगह बनाने के लिए विभिन्न अभियानों को अंजाम दे रहे हैं, तो स्पेस एक्स जैसी कंपनियां निरंतर अंतरिक्ष में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई-नई कवायद कर रही हैं। अभी धरती का पर्यटन से जुड़ा कचरा साफ होना ही बड़ी चुनौती है, ऐसे में अंतरिक्ष और विशेष तौर पर पृथ्वी की सतह से 160 से 2,000 किलोमीटर पर स्थित निम्न पृथ्वी कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट में बढ़ता कचरा भविष्य की आशंकाओं को प्रबल करता है। इस कक्षा में ही संचार, मौसम, खोजबीन उपग्रह स्थापित होते हैं और वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया जाता है। इन्हीं उपग्रहों के जरिये ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंस, पेजिंग, डाटा संप्रेक्षण समेत दैनंदिन में उपयोगी क्रियाओं का संपादन भी होता है। उपग्रहों पर बढ़ती निर्भरता और इनके रक्षा उपयोग के कारण आने वाले दिनों में युद्ध का केंद्र भी अंतरिक्ष बन जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।



भारत समेत अमेरिका, रूस और चीन के पास दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने की सफल तकनीक उपलब्ध है। इसके जरिये दुश्मन देश के उपग्रहों द्वारा जासूसी अथवा संचार प्रणाली को प्रभावित करने की अवस्था में सजीव उपग्रहों का भी विनाश किया जा सकता है। अंतरिक्ष में बढ़ती इस लड़ाई के कारण भी वहां मलबे का बढ़ना लाजिमी है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रकार के विश्लेषण एवं अनुसंधान हेतु अंतरिक्ष एवं उपग्रहों का उपयोग एक सामान्य प्रक्रिया हो गई है। 50 वर्ष पूर्व जब भारत ने आर्यभट्ट उपग्रह का प्रक्षेपण किया था, तो उसे महान उपलब्धि के रूप में माना गया था, किंतु अब उपग्रहों का प्रक्षेपण सामान्य प्रक्रिया हो गई है।


कुछ वर्ष पहले स्पेस लैब के भारतीय भू-भाग पर गिरने की आशंका से ही बड़ी चिंता उत्पन्न हो गई थी। ऐसे में अंतरिक्ष का बढ़ता पर्यटन और राष्ट्रों की होड़ इसे किस दिशा में ले जाएगी, कह नहीं सकते। विभिन्न राष्ट्रों द्वारा अंतरिक्ष पर्यटन एवं परीक्षणों को निजी क्षेत्र के लिए खोल देने से प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ ही नए कचरे की समस्या पैदा होगी। बढ़ते अंतरिक्ष उपयोग के कारण विभिन्न प्रकार का कचरा कक्ष में व्यापक होता जा रहा है। इनमें मानव निर्मित कचरा और उपग्रहों के कारण इकट्ठा होता मलबा है, जो मूलतः उपग्रहों के निष्क्रिय होने, रॉकेट अवशेष, उपकरणों एवं अन्य संबंधित वस्तुओं के अंतरिक्ष में ही रह जाने के कारण उत्पन्न होता है। बड़े आकार वाले मलबे के कण अंतरिक्ष यानों एवं उपग्रहों से टकराकर बड़ी क्षति कर सकते हैं, तो महीन कण वायुमंडल के प्रदूषण को बढ़ा सकते हैं।

अंतरिक्ष में उपग्रह एवं उपकरणों के बढ़ते घनत्व के कारण आपसी टकराहट के साथ-साथ अंतरिक्ष की कक्षाओं के क्षरण होने की प्रबल आशंका रहती है। इसके चलते भविष्य में अंतरिक्ष में भी यातायात अवरुद्ध होने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। यदि उपग्रह परिचालन में निर्धारित कक्ष अथवा गति संबंधी अवरोध होता है, तो लक्षित गतिविधियां परिणाम नहीं दे पाती हैं।

अंतरिक्ष में मलबे की समस्या को हल करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। पुनः उपयोग में लाए जाने वाले रॉकेट आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर निष्क्रिय होते उपग्रहों एवं अवशेषों के लिए गहन निगरानी प्रणाली के साथ उनके टकराने से पूर्व ही मार्ग को बदलने जैसी दूरस्थ तकनीक पर निरंतर शोध किया जा रहा है। लेकिन अब भी अंतरिक्ष की कक्षा से मलबे को वैज्ञानिक तरीके से हटाना चुनौती बना हुआ है। उपकरणीय मलबे के साथ मानव निर्मित कचरा भी अंतरिक्ष की समस्या है। ज्यादातर मल-मूत्र को भी वापसी तक एकत्रित करके रखा जाता है एवं लौटते हुए जलाकर निस्तारण होता है। कई बार अंतरिक्ष यानों में मूत्र को एकत्रित कर साफ पानी में परिवर्तित किया जाता है। वर्तमान में अंतरिक्ष में लंबी अवधि और स्थायी आवास की परिकल्पना के मध्य भविष्य की कचरा प्रबंधन संबंधी समस्या को भी दृष्टिगत किया जा रहा है। मल-मूत्र के अतिरिक्त बची हुई खाद्य सामग्री एवं उसके पैकेट समस्या के कारक हैं।

गत वर्ष अंतरिक्ष का सर्वाधिक उपयोग करने वाली अमेरिकी संस्था नासा ने लूना रीसाइकिल चैलेंज के माध्यम से अंतरिक्षीय मलबे एवं कचरे की समस्या का पुनर्चक्रण हल ढूंढने के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है, ताकि इकट्ठे होते हुए मलबे को हटाया जा सके और उपग्रहों एवं अंतरिक्ष पर्यटन का मुक्त रूप से विचरण हो सके। इस पुरस्कार के तहत ठोस कचरे के चंद्रमा की सतह पर पुनर्चक्रण हेतु डिजाइन एवं हार्डवेयर के विकास तथा डिजिटल ट्रैक द्वारा संपूर्ण पुनर्चक्रण प्रणाली एवं अंतिम उत्पाद का मॉडल तैयार करने को पुरस्कृत किया जाएगा। पृथ्वी की समस्या धीरे-धीरे अंतरिक्ष की ओर आमुख होती जा रही है। मानव सृष्टि की अंतरिक्षीय उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के मध्य नवीन चुनौतियां जन्म ले रही हैं।

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