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AI समय: जब मैंने एआई के बगैर बिताए 48 घंटे, लेकिन आसान लगने वाली कोशिश बहुत कठिन गुजरी

Sat, 03 Jan 2026 07:50 AM IST
पवन पांडेय ए जे जैकब्स, द न्यूयॉर्क टाइम्स
ए जे जैकब्स, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 03 Jan 2026 07:50 AM IST
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सार
AI समय: मुझे लगा यह आसान होगा, पर एआई हमारी जिंदगियों में इतना घुसा है कि यह संभव ही नहीं। यकीन न हो, तो कोशिश करें। एआई को लेकर लोगों की राय विरोधाभासी है। कुछ लोग इसे सिर्फ एक उन्नत स्पेल-चेक मानते हैं, तो कुछ इसे आग की खोज से भी बड़ी क्रांति बताते हैं।
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AI Time: When I Spent 48 Hours Without AI, But What Seemed Easy Was a Really Hard Task
जब मैंने एआई के बगैर बिताए 48 घंटे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जब मैंने 48 घंटे तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बिना जीने का फैसला किया, तो मुझे लगा यह बिल्कुल आसान होगा। मुझे अंदाजा था कि मैं डॉक्यूमेंट्री नहीं देख पाऊंगा या बॉट्स द्वारा लिखे गए ई-मेल नहीं पढ़ पाऊंगा। यह सब मैं झेल सकता था। पर मुझे यह एहसास नहीं था कि एआई और मशीन लर्निंग से दूरी बनाने की कोशिश मेरी जिंदगी पर किस कदर असर डालेगी। मैं अपने दोस्तों से कहा करता था कि अगर एआई से बचना है, तो पहाड़ों पर जाकर बकरी चराइए। लेकिन क्या यह संभव है? अगर आप पहाड़ों पर जाएंगे, तो मौसम का पूर्वानुमान तो लगाना ही होगा और यह काम एआई से ज्यादा सटीक ढंग से कौन कर पाएगा भला?


एआई को लेकर लोगों की राय विरोधाभासी है। कुछ लोग इसे सिर्फ एक उन्नत स्पेल-चेक मानते हैं, तो कुछ इसे आग की खोज से भी बड़ी क्रांति बताते हैं। कई लोग तो एआई को सिर्फ 2022 के बाद आए जेनरेटिव एआई से जोड़ते हैं, लेकिन इसका दायरा इससे कहीं बड़ा है। मशीन लर्निंग 2000 के दशक से इस्तेमाल हो रही है और नए डाटा के आधार पर खुद को अपडेट करती रहती है। मैंने तय किया कि अगले 48 घंटे जेनरेटिव एआई व मशीन लर्निंग से बचूंगा।


लेकिन, पहले ही दिन सुबह सोकर उठते ही मुझे समझ आ गया कि एआई से बचना लगभग असंभव है। मैंने अपना आईफोन उठाया और चेहरे के सत्यापन से उसे अनलॉक करना चाहा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि फेशियल रिकग्निशन एआई पर चलता है। फिर मैंने पासकोड टाइप किया। फोन तो खुल गया, लेकिन उसका मैं करता भी क्या? आईफोन का फेशियल रिकग्निशन, सोशल मीडिया फीड, पॉडकास्ट एडिटिंग, न्यूज व ई-मेल, सब एआई से ही चलते हैं। इसलिए मैंने फोन को दराज में रख दिया। रसोई में पत्नी ने लाइट जलाई, तो मैंने वह भी बंद कर दी, क्योंकि बिजली ग्रिड भी मशीन लर्निंग से ही चलता है। मैंने एक पोर्टेबल सोलर-पावर जनरेटर खरीद रखा था। उसमें एक बल्ब लगाकर रसोई को रोशन किया। नल के पानी से दांत साफ नहीं कर सकता था, क्योंकि शहर की जल प्रणाली भी एआई सेंसर और एल्गोरिद्म पर निर्भर है। इसलिए, मैंने खिड़की के बाहर जमा किया बारिश का पानी ब्रश करने के लिए इस्तेमाल किया। भले ही यह थोड़ा बेतुका था, लेकिन इसी बेतुकेपन ने मुझे एहसास कराया कि एआई हर जगह मौजूद है।

मुझे एक रेस्तरां में कुछ लेखकों से मिलने जाना था। आमने-सामने मिलना तय हुआ। पहनने के लिए दादा की पुरानी 1970 की फूलों वाली शर्ट निकाली, क्योंकि आजकल के फैशनेबल कपड़े डिजाइन करने में भी एआई का इस्तेमाल होता है। मौसम एप नहीं देख सकता था, तो हाथ बाहर निकालकर मौसम का अंदाजा लगाया। पत्नी ने कचरा फेंकने के लिए कहा था, लेकिन मैंने वह भी नहीं किया, क्योंकि न्यूयॉर्क का सैनिटेशन विभाग भी मशीन लर्निंग से चलता है। रेस्तरां जाने के लिए उबर, टैक्सी, सबवे का इस्तेमाल नहीं कर सकता था, क्योंकि इनमें भी एआई का इस्तेमाल होता है। इसलिए, मैंने बेटे की साइकिल ली, हाथ में कागज का पुराना नक्शा पकड़ा और आदतन उंगलियों से इसे फैलाने की कोशिश की, मगर इसके डिजिटल स्क्रीन न होने की वजह से ऐसा नहीं हुआ। रेस्तरां में मीटिंग खत्म होने के बाद भुगतान की समस्या आई, क्योंकि क्रेडिट कार्ड और एटीएम भी एआई पर चलते हैं। साथ में लाए सोने से भुगतान करना चाहा, लेकिन रेस्तरां मैनेजर ने मना कर दिया, इसलिए कैश से काम चलाया। सेल्फी भी नहीं ले सकता था, क्योंकि स्मार्टफोन कैमरे भी एआई का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए साथ लाए पुराने कैमरे से फोटो लेने की कोशिश की।

फिर अगले दिन कुत्ते को टहलाने निकला, वह भी एंटी-फेशियल-रिकग्निशन चश्मे पहनकर। दरअसल, मैनहट्टन की सड़कों पर हजारों एआई कैमरे हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए ऐसे चश्मे जरूरी लगे। बात करने के लिए लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल किया, क्योंकि आईफोन में भी नॉइज फिल्टरिंग के लिए एआई फीचर है। अंतिम बचे कुछ घंटों में मैं लेख लिखने बैठा। मैकबुक छोड़कर टाइपराइटर पर काम शुरू किया, फिर पेंसिल व कागज पर आ गया। मेरे इस शोध ने मुझे यकीन दिला दिया कि आने वाले वर्षों में एआई की भूमिका और बढ़ेगी। हम अभी एआई युग की शुरुआत में हैं। और शायद पांच साल बाद इस कहानी का सीक्वल खुद एआई ही लिखे।

सिंथेसिया
यह एआई आधारित वीडियो जेनरेटर है, जिसका उपयोग यथार्थवादी वीडियो बनाने और उन्हें एडिट करने के लिए किया जाता है। इसमें उपयोगकर्ता अपने अनुसार एक स्क्रिप्ट लिखता है, और उसी के आधार पर वीडियो अपने आप तैयार हो जाता है। सिंथेसिया में अलग-अलग लेआउट, एआई अवतार और वॉयसओवर का विकल्प मिलता है, जिससे वीडियो अधिक आकर्षक व प्रभावी बनता है। यह एआई तकनीक खास तौर पर सूचना देने वाले वीडियो, ई-लर्निंग कंटेंट, ट्रेनिंग और ट्यूटोरियल वीडियो बनाने में बहुत मददगार है। इसके लिए कैमरा, स्टूडियो या अभिनेता की जरूरत नहीं होती, जिससे समय और लागत, दोनों की बचत होती है।
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