{"_id":"3a8100d8-cc38-11e2-80c9-d4ae52bc57c2","slug":"advantages-of-being-on-silent-mode","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइलेंट मोड पर होने के फायदे","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
साइलेंट मोड पर होने के फायदे
मनु पंवार
Updated Mon, 03 Jun 2013 03:57 PM IST
विज्ञापन
मेरे एक नए पड़ोसी इस बात के लिए बड़े उत्सुक रहते हैं कि उनका नौनिहाल कब बोलना सीखेगा। हर मां-बाप के लिए उस घड़ी का इंतजार कुछ खास होता है।
विज्ञापन
हालांकि समझदार लोग मेरे पड़ोसी को समझा रहे हैं कि फिक्र मत करो। अब बोलने का नहीं, चुप रहने का जमाना है। वैसे भी इन दिनों चुप्पी का धंधा खूब फल-फूल रहा है।
विज्ञापन
दरअसल बोलना मुसीबतों की जड़ है। चुप रहने के कई फायदे हैं। अभी पिछले ही चुनाव में आडवाणी जी ने कह दिया कि मनमोहन सिंह सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। आडवाणी जी पीएम इन वेटिंग ही रह गए, मनमोहन जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं।
विज्ञापन
चुप रहकर राज करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। किसी जमाने में नरसिंह राव चुप्पी की राजनीति के रोल मॉडल हुआ करते थे। उन्होंने भी पांच साल निष्कंटक राज किया।
चुप्पी का फायदा यह है कि कई दफा चुप रहकर आप खुद के समझदार होने का भ्रम बनाए रख सकते हैं। अभी ज्यादा समय नहीं गुजरा। अपनी टीम में मची महाभारत पर जब अन्ना जी से जवाब देते न बना, तो उन्होंने मौन धारण कर लिया।
सारी बोलचाल अगले आदेश तक स्थगित। मीडियावाले और समर्थक गुहार लगाते रह गए कि अन्ना जी, कुछ तो बोलिए। अन्ना जी ने खुद को साइलेंट मोड पर कर लिया।
गांधी जी का जमाना और था। उनका नैतिक बल इतना मजबूत था कि उनका मौन व्रत भी विरोध का प्रतीक माना जाता था। उस मौन ने फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे।
लेकिन राजनीति के उत्तर आधुनिक काल में मौन व्रत कब चुप्पी ओढ़ लेने में तब्दील हो गया, पता ही नहीं चला। सामने वाला सिर धुनता रह गया, पर बंदे ने जुबान न खोली। सारे राज, सारे किस्से, सारी जानकारियां बंदा चुप्पी में ही निगल गया।
इसलिए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान चुप हैं, तो उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। उनकी चुप्पी का अपना अर्थशास्त्र है। आईपीएल ने समझा दिया है कि अर्थ के बगैर सब व्यर्थ है। इसीलिए तो वे चुप हैं, जिन्हें बोलना चाहिए, जबकि सारा देश बोल रहा है।
दरअसल चुप रहने का बड़ा फायदा सेहत के लिए यह भी है कि इससे बोलने में जाया होने वाली ऊर्जा बच जाती है।
वैसे भी अगर बोलने से इतना ही फायदा होता, तो इस दुनिया में मौन का अस्तित्व ही न रहता। कंपनियां भी मोबाइल फोन पर साइलेंट मोड का फीचर भला क्यों डालतीं?