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जनता को गुलाब जामुन कब मिलेगा
पूरन सरमा
Updated Sun, 31 Aug 2014 07:37 PM IST
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वह मंत्री थे। एक पार्टी में मिल गए। प्लेट में पांच-सात गुलाब जामुन रखे बारी-बारी से गटक रहे थे। मैंने भी अपनी प्लेट भरी और उनके पास पहुंच गया। गुलाब जामुन का एक पीस पेट में जमा कर मैंने मंत्री जी से पूछा, क्यों साब, ये अच्छे दिनों की उम्मीद कब तक की जा सकती है। वह मेरी बात पर हंसकर बोले, इससे बढ़िया अच्छे दिन और क्या होंगे? हम लोग एक साथ गुलाब जामुन खा रहे हैं।
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मेरे मुंह का गुलाब जामुन बाहर आते-आते बचा। मैंने कहा, लेकिन आम आदमी की प्लेट में गुलाब जामुन कब तक आएगा? मेरा मतलब महंगाई पर लगाम लगाने से है।
वह बोले, देखिए, आलू-प्याज को तो हमने सुरक्षित कर लिया है। चीनी के दाम बढ़ाकर उसे भी लगभग स्थिर कर दिया है। भाई, चुनाव में हमने 15 हजार करोड़ खर्च किए हैं। जिनसे लिया है, उन्हें चुकाना भी तो है। एक बार यह देनदारी खत्म हो जाए, बाद में महंगाई को पूरी तरह काबू में कर लेंगे।
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मैंने कहा, यह तो बड़ा लंबा प्रोसेस है। तब तक नए चुनाव आ जाएंगे और आप पर दोबारा देनदारी आ जाएगी।
वह बोले, हमने अच्छे दिनों के लिए जनता से दो टर्म मांगे हैं। हमारे नेताजी बोलने में इतने पटु हैं कि मुझे दो दशक तक गुलाब जामुन खाने से कोई रोक नहीं सकता। मैंने कहा, यह तो धोखा है। आप जनता की आंखों में धूल कैसे झोंक सकते हैं?
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मंत्री जी बोले, देश की चिंता में दुबले मत होओ। प्याज सस्ता है, रोटी उसी से खाओ। व्रत के दिन आलू उबाल कर खा लो। अब तुम चाहते हो कि जनता को दोनों टाइम गुलाब जामुन मिले, तो भाई, यह हमारे हाथ में नहीं है। महंगाई कम करने के लिए हम लोग कैबिनेट की मीटिंग धड़ाधड़ कर रहे हैं। इस सुरसा जैसी महंगाई का हम अकेले कर भी क्या सकते हैं!
मैं बोला, यानी अच्छे दिन नहीं आएंगे?
मंत्री जी बोले, अच्छे दिन फील गुड की तरह हैं। महसूस करो, तो हर दिन अच्छा है। यह कहकर उन्होंने अपनी प्लेट गुलाब जामुनों से फिर भरी और भीड़ में घुस गए।