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हादसा और सवाल: डबल डेकर बस में आग लगने की घटना, पहले हुए हादसों का दोहराव

Sat, 23 May 2026 08:25 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Sat, 23 May 2026 08:25 AM IST
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Accident and questions: The fire in a double-decker bus is a repeat of previous accidents
हादसा और सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
उत्तर प्रदेश की व्यस्ततम परिवहन धमनियों में से एक आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार तड़के सवारियों को लेकर गुरुग्राम जा रही एक निजी डबल डेकर बस में आग लगने की घटना पूर्व में हुए ऐसे हादसों का दोहराव ही अधिक दिखती है। बताया जा रहा है कि रात दो बजे, जब सभी यात्री गहरी नींद में थे, तभी बस आगे चल रहे बालू के कंटेनर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस अनियंत्रित होकर पलट गई और उसमें आग लग गई।

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ट्रक का ड्राइवर स्टीयरिंग में फंसने की वजह से बाहर नहीं निकल पाया और जिंदा ही जल गया। लोग खिड़कियां तोड़कर बस से बाहर कूदे, जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। बस में मौजूद करीब तीस यात्रियों में से 24 बुरी तरह झुलस गए, जिसमें से एक दर्जन यात्रियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने इसी एक्सप्रेसवे पर लखनऊ से गुरुग्राम ही जा रही एक अन्य बस का टायर फटने से उसमें भयानक आग लग गई थी, हालांकि तब हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था।

फिरोजाबाद में हुई ताजा दुर्घटना में बताया जा रहा है कि बस की गति बहुत तेज थी। दरअसल, यही एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी चुनौती भी है कि बेहतर सड़कें अक्सर वाहन की गति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। कई बार, खासकर निजी बस संचालक समय बचाने और अधिक ट्रिप लगाने की प्रतिस्पर्धा में गति सीमा को नजरअंदाज कर देते हैं। कई मामलों में चालक की थकान या फिर उसे नींद आ जाना भी हादसे की वजह बन जाती है। प्रदेश के विभिन्न एक्सप्रेसवे पर हाल के समय में हुए हादसे इस चिंता को और मजबूत करते हैं।

अत्याधुनिक वातानुकूलित बसों में आग लगने के जोखिम को देखते हुए नियमत: सख्त सुरक्षा मानकों का पालन होना चाहिए। लेकिन देखने में यह आता है कि ज्यादातर बसों पर जाने-माने ब्रांडों के नाम तो होते हैं, लेकिन तथ्य यह है कि सिर्फ इंजन और चेसिस ही मूल उपकरण निर्माता कंपनियों से खरीदे जाते हैं। इसके बाद बॉडी शॉप में बस को पूरी तरह से तैयार किया जाता है और असुरक्षित फेरबदल किए जाते हैं। इस संबंध में सड़क परिवहन मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई बार बसों की बॉडी खराब सामग्री से बनाई जाती है, जो बेहद ज्वलनशील भी होती है। इसके अतिरिक्त, बसों की क्रैश टेस्टिंग भी शायद ही होती है। ताजा हादसे में क्या गलतियां रहीं, यह तो खैर जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन विकास की सड़क पर आगे बढ़ते देश को बार-बार होते ऐसे हादसों की तह में तो जाना ही होगा।
 
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