व्यंग्यः बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

Varun KumarVarun Kumar Updated Mon, 13 Aug 2012 03:10 PM IST
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Abdullah crazy in others wedding

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राजेंद्र शर्मा
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बुजुर्गों ने सही कहा है कि घर की मुरगी दाल बराबर। माना कि अब दाल भी पहले की दाल-रोटी वाली दाल नहीं रह गई है और उसके भाव जमीन से उठकर आसमान पर पहुंच गए हैं। फिर भी दाल के पंख तो नहीं लग जाएंगे। हालांकि मुरगी के पंख भी ज्यादा से ज्यादा उछल-कूद के ही काम आते हैं। बाकी मामलों में हो तो हो, यहां तो चुनाव के मामले में भी घर की मुरगी दाल बराबर ही है। तभी तो जनाब प्रणब मुखर्जी अपने चुनाव प्रचार के लिए पिछले दिनों लखनऊ तो पहुंचे, पर मजाल है जो अपनी पार्टी वालों को उन्होंने जरा-सा भी भाव दिया हो।
लखनऊ में दोपहर का भोजन उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ किया, तो रात का भोजन बहनजी के साथ। और घरवालों यानी अपनी पार्टी वालों के हिस्से में क्या आया? घरवालों को तो दादा ने मामूली चाय में ही टरका दिया। बेचारे कांग्रेसी लोग उनसे कितनी उम्मीदें पाले बैठे थे। जब चुनाव के पहले ही यह हाल है, तो चुनाव के बाद खादी पार्टी वालों को दादा कैसा निहाल करेंगे, यह पार्टी वाले भी बेहतर जानते हैं। पर दिल को खुश रखने को अपने राष्ट्रपति का खयाल अच्छा है। फिर, बेगानी शादी में दीवाने अब्दुल्ला ही होते हैं।
इस बार के राष्ट्रपति चुनाव में असली मामला तो बेगानी शादी में दीवाना होने का ही है। अब खुद ही देख लीजिए कि दूसरे प्रत्याशी संगमा साहब के चक्कर में खाकी भाइयों की दीवानगी कितनी बढ़ गई है! इस दीवानगी में कभी वे बाल ठाकरे, तो कभी नीतीश कुमार के बोल-वचन सुन रहे हैं, पर मजाल है जो उनकी जुबान पर उफ् भी आ जाए। जबकि यही खाकी वाले हैं, जिन्होंने कभी दूसरी बार लोकसभाध्यक्ष बनाने की संगमा की पेशकश खारिज कर दी थी। लेकिन आज अचानक उन्हें संगमा पर प्यार उमड़ आया है। वैसे रायसीना की पहाड़ी वाले बंगले के लिए संगमा साहब ने भी कोई कम दीवानगी नहीं दिखाई है। वरना वह राष्ट्रवादी से आदिवासी भला क्यों हो जाते?

वैसे इस चुनाव में सच पूछिए, तो सब उलटा ही है। नतीजा पहले आ चुका, चुनाव प्रचार अब शुरू हो रहा है। वह तो संगमा जी के साथ वालों ने दादा की उम्मीदवारी पर सवाल उठाकर चुनाव में कुछ रौनक ला दी। वरना चुनाव तो होता, पर न हुए के बराबर होता। आखिर वह चुनाव ही क्या, जिसमें उम्मीदवार एक-दूसरे पर कीचड़ भी न उछालें। खैर, देर आयद, दुरुस्त आयद। आगे-आगे देखिए, उछलता है क्या!
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