फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   40 baby medicinal leeches have been born in London Zoo

दूसरा पहलू: खुश होइए कि जोंक की वापसी हो रही है, लंदन के चिड़ियाघर में पैदा हुए 40 बच्चे

Tue, 19 Nov 2024 05:34 AM IST
दीपक कुमार शर्मा माइक जेफरीज
माइक जेफरीज Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 19 Nov 2024 05:34 AM IST
विज्ञापन
सार
जोंक का नाम सुनकर भले ही रक्त चूसने वाले जीव की छवि हमारे मन में बनती हो, लेकिन यह अनेक रोगों की दवा है। वर्ष 1884 में जोंक की लार की हिरोडीन नामक एक थक्कारोधी के रूप में पहचान की गई थी। सर्जन तो अब भी जोंक का उपयोग करते हैं। 20वीं सदी की शुरुआत में हिरुडो डेकोरा नामक जोंक लुप्त हो गई थी। फिलहाल अच्छी बात यह है कि लंदन के चिड़ियाघर में औषधीय जोंक के 40 बच्चे पैदा हुए हैं। याद रखें जोंक हमारी दुश्मन नहीं, बल्कि दोस्त है।
loader
40 baby medicinal leeches have been born in London Zoo
जोंक और माइक जेफरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जोंक का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन-सी होने लगती है। बचपन से सुना है कि यह जोंक शरीर से चिपक कर खून चूस लेती है। 1959 में एक फिल्म आई थी, अटैक ऑफ द जाइंट लीचेस, जिसे देखने के बाद तो जोंक सपने में भी डराने के लिए आने लगी थी। लेकिन अब जोंक को संरक्षित करने के प्रयास हो रहे हैं। पहली बार औषधीय जोंक हिरुडो मेडिसिनलिस को लंदन के चिड़ियाघर में रखा गया है।



एक वक्त था, जब ब्रिटेन में औषधीय जोंक बहुतायत में थीं। आयरलैंड में 19वीं शताब्दी में जोंक को समाप्त करने के प्रयास किए गए थे। लेकिन अब उनकी सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और जैव विविधता ऑडिट में मान्यता दी गई है। 19वीं सदी में कैंसर से लेकर मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए जोंक का उपयोग अंधाधुंध तरीके से किया जाता था। जोंक ‘रक्तस्राव’ के रूप में बदनाम थी। हालांकि वर्ष 1884 में जोंक की लार की हिरोडीन नामक एक थक्कारोधी के रूप में पहचान की गई थी। सर्जन तो अब भी जोंक का उपयोग करते हैं, जैसे-कटी हुई अंगुलियों को दोबारा जोड़ते समय, क्योंकि जोंक की लार नसों में रक्त का थक्का जमने से रोकती है। 18वीं और 19वीं सदी में औषधीय गुणों की वजह से जोंक का अंतरराष्ट्रीय बाजार बन गया था। यह उपचार विलासिता का परिचायक था और गरीबों के लिए दुर्लभ। सभी प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए जोंक का उपयोग कम से कम 1500 ईसा पूर्व से चला आ रहा है, जो मिस्र के मकबरे की सजावट में दिखाई देता है। ब्रिटेन और आयरलैंड में जोंक का आयात यूरोप, रूस और अफ्रीका से होने लगा, इनमें से हिरुडो डेकोरा औषधीय जोंक है।


20वीं सदी की शुरुआत में यह लुप्त हो गई थी। हालांकि 1960 के दशक में ‘हिरुडोथेरेपी’ के रूप में जोंक की वापसी हुई और 1980 के दशक से इसका व्यापक उपयोग किया जाने लगा। शोधकर्ताओं ने जोंक में सौ से अधिक उपयोगी तत्वों का पता लगाया है, जैसे-सूजन-रोधी एजेंट, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक। हालांकि अभी मुख्य फोकस प्लास्टिक सर्जरी पर है। वर्तमान में जोंक को पालने के प्रयास शुरू हुए हैं। वहीं, 1812 से जोंक का व्यवसाय कर रहे वेल्स के व्यापारी अब भी पशु चिकित्सकों को जोंक की आपूर्ति करते हैं। फिलहाल अच्छी बात यह है कि लंदन के चिड़ियाघर में औषधीय जोंक के 40 बच्चे पैदा हुए हैं। जोंक की छह सौ प्रजातियों में से ज्यादातर रक्तचूसक नहीं होतीं। जोंक के साथ इन्सानों का एक जटिल इतिहास रहा है, लेकिन याद रखें कि वे हमारी दोस्त हैं, इसलिए वे जहां हैं, वहीं रहने दें।  -द कन्वर्सेशन से

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed