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एक बंकर में 11 अनुवादक

Sat, 11 May 2013 10:46 PM IST
जे. अश्विनी
जे. अश्विनी Updated Sat, 11 May 2013 10:46 PM IST
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11 translator in one bunker

एक अंडरग्राउंड बंकर। 11 अनुवादक। पूरे दो महीने का समय। बाहर झांकने के लिए एक खिड़की तक नहीं। बात करने या घूमने-फिरने पर भी रोक। सप्ताह के सातों दिन कई घंटों तक लगातार काम। थोड़ा बहुत सुस्ताने पर भी नजर। चारों तरफ सख्त पहरा। मोबाइल जब्त, कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल पर भी रोक। बंकर से बाहर कोई भी किताब या कागज ले जाने पर पाबंदी।

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सिर्फ रात में होटल जाने के लिए बंकर से बाहर निकलना और एक मिनी बस में बैठकर होटल पहुंचना। यह कहानी न तो युद्धबंदियों की है, न ही ये किसी अपराध की सजा काट रहे कैदियों की दास्तां है। यह एक वास्तविक घटना है, जिसके अहम किरदार हैं अलग-अलग देशों के 11 अनुवादक। इस घटना की पटकथा लिखी है, अमेरिका के मशहूर फिक्शन लेखक डेन ब्राउन की किताब ‘इन्फर्नो’ के प्रकाशकों ने। 14 मई को डेन ब्राउन की इस किताब को एक साथ 11 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।
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इस तारीख से पहले किताब की कहानी या किरदारों के बारे में किसी को कोई भनक न लगे, इसके लिए प्रकाशकों ने अनुवादकों को कड़ी सुरक्षा में रखकर काम करवाया। ‘द डा विंची कोड’ और ‘एंजेल्स एंड डेमन्स’ जैसे ब्लॉकबस्टर उपन्यास लिखने वाले डेन ब्राउन का नया उपन्यास अपनी कहानी से ज्यादा इसी बात को लेकर चर्चा में है कि उसके अनुवादकों के साथ इस तरह का अजीबो-गरीब व्यवहार किया गया।
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प्रकाशक की इच्छा थी कि ब्राउन का नया उपन्यास ‘इन्फर्नो’ कई भाषाओं में एक साथ प्रकाशित किया जाए। इसके लिए अनुवादकों को इटैलियन पब्लिशिंग हाउस के मिलान हेडक्वार्टर में कड़ी सुरक्षा में रखकर काम करवाया गया। अंग्रेजी भाषा में उपन्यास का नाम ‘हेल’ रखा गया है। कहानी क्या है, यह तो उपन्यास के सामने आने पर ही मालूम होगा, लेकिन जिन हालात में अनुवादकों से काम कराया गया, वह भी किसी नरक से कम नहीं थे। एक इटैलियन मैग्जीन को दिए गए साक्षात्कार में अनुवादकों ने अपना कठिन अनुभव बयां किया।

इतालवी अनुवादक एनामारिया राफो ने बताया कि शुरुआत में अनुवादक डरे हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि राज को राज रखने के लिए यह सब जरूरी था। वहीं, फ्रांसीसी अनुवादक केरोल डेलपोर्ट का मानना था कि खुफिया तरीके से काम करने के तजुर्बे से उन्हें उपन्यास में पूरी तरह डूब जाने का मौका मिला। उपन्यास की पांडुलिपियों को नायाब वस्तुओं की तरह सुरक्षित तौर पर अलमारी में रखा जाता था। यह बिलकुल वैसे ही था, जैसे ब्राउन के उपन्यासों पर बनी फिल्मों में सुराग को खलनायक छुपा कर रखते हैं।

ब्राउन के इस उपन्यास में क्या है, यह पूरी तरह राज है, लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि दांते के महाकाव्य ‘द डिवाइन कॉमेडी’ के पहले हिस्से ‘इन्फर्नो’ का उपन्यास में जिक्र है। इस कविता में दांते ने नरक की दास्तां बयां की है। 48 साल के ब्राउन कहते हैं, ‘पढ़ाई के दौरान मैंने दांते के इन्फर्नो के बारे में पढ़ा था, लेकिन हाल में इटली के फ्लोरेंस शहर में शोध के दौरान मुझे अहसास हुआ कि आज की दुनिया पर दांते का प्रभाव कितना ज्यादा है।


यह उपन्यास पाठकों को ऐसी दुनिया में ले जाएगा, जहां कई तरह के रहस्य सुलझाने के साथ और भी चमत्कार होंगे।’ अब तक 52 भाषाओं में ब्राउन के उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। पिछले साल उनके उपन्यासों की 2 करोड़ कॉपियां बिक चुकी हैं। ‘लव जर्मन बुक्स’ ब्लॉग में कहा गया है कि ब्राउन का पिछला उपन्यास ‘द लॉस्ट सिंबल’ बिक्री के मामले में पहले ही नंबर-2 पर पहुंच चुका है। इसका जर्मन संस्करण एक महीने बाद आने की उम्मीद है।

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