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'जीवन के संघर्ष ने मुझे लेखक बनाया'
वाइकम मोहम्मद बशीर
Updated Wed, 25 Apr 2018 03:14 PM IST
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Vaikom Muhammad Basheer
मैं केरल के कोट्टायम में पैदा हुआ। मेरे पिता व्यवसायी थे। स्कूल में ही मैं महात्मा गांधी के प्रभाव में आ गया और खद्दर पहनने लगा। जब वाइकम में गांधी जी सत्याग्रह के लिए आए थे, तब मैंने उनकी कार के पास पहुंचकर उनका हाथ पकड़ा था। लंबे समय तक मैं वह घटना नहीं भूल पाया। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से भी मैं बेहद प्रभावित था।
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लेकिन जिस अनुभव ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह सात साल तक एशिया और अफ्रीका में मेरा भ्रमण था। तब अपना पेट भरने के लिए मैंने फल विक्रेता, अखबार बांटने वाले, रसोइये, क्लर्क, रसोइए और चौकीदार की नौकरी की तथा जीवन को उसकी संपूर्णता में देखा। जब मुझे नौकरी की सख्त जरूरत थी, तब जयाकेसरी अखबार में मुझे कहानी लिखने का काम मिला। मैंने इसे भी अपने दूसरे काम की तरह देखा था, पर कहानी लिखते-लिखते मैं लेखक बन गया।
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राजनीतिक कार्यकर्ता होने के कारण मैं जेल गया, लेकिन वहां पुलिस और कैदियों से जो कुछ सुना-जाना, वह मेरी कहानियों में आया। चूंकि मैंने गरीबी नजदीक से देखी है, इसलिए हमेशा अपनी कहानियों को आम जनता से जोड़ने की कोशिश की। इसलिए मेरी कहानियों की भाषा साहित्यिक नहीं, बल्कि आम बोलचाल वाली है। मेरी कहानियों में भूख, गरीबी, जेल के ही ब्योरे ज्यादा मिलते हैं। औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाने और आम लोगों के लिए लिखने के कारण मैं लेखकों की बिरादरी में समादृत नहीं हूं, लेकिन इसका मुझे दुख नहीं है, क्योंकि गरीब और साधारण लोग मेरी कहानियां रुचि लेकर पढ़ते हैं।
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-मलयालम के विख्यात कथाकार