फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   injustice and difficulties inspire me for writing

अभाव और अन्याय ने लेखन के लिए प्रेरित किया

Fri, 22 Dec 2017 05:45 PM IST
प्रतिभा राय
प्रतिभा राय Updated Fri, 22 Dec 2017 05:45 PM IST
विज्ञापन
injustice and difficulties inspire me for writing

मैं कटक जिले के एक दूरस्थ गांव एलाबोल में पैदा हुई। मेरा बचपन गरीब बच्चों के साथ बीता। मैं उनकी परेशानियों के बारे में सुनती थी। मुझे लेखन की प्रेरणा वहीं से मिली। मेरे पिता कवि थे, जिन्होंने टाटा स्टील की नौकरी छोड़कर गांव के स्कूल में पढ़ाना पसंद किया। वह छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने और वानर सेना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे। 

विज्ञापन


मेरे स्वभाव में जो निडरपन और गरीबों की बेहतरी के लिए काम करने का जज्बा पैदा हुआ, वह मेरे गांधीवादी पिता की ही देन था। जबकि सबसे बराबरी का सुलूक करने का भाव मुझे अपनी वैष्णव परंपरा से मिला। हालांकि मेरे पिता मुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे, जबकि मैं कवि बनना चाहती थी। मुझे मेडिकल कॉलेज में भर्ती भी कर दिया गया था, पर मैंने परिवार को बताए बिना वह पढ़ाई छोड़ दी। 
विज्ञापन


बोंडा आदिवासियों को करीब से जानने, जिन्हें सबसे पिछड़े आदिवासियों में गिना जाता है, और उनके कल्याण के लिए काम करने में मुझे जितनी खुशी मिली, उतनी खुशी और किसी और काम में नहीं मिली। अपनी गद्य रचनाओं में मैंने कथावाचन की पुरानी परंपरा और ओडिशा के लोकजीवन को अधिक महत्व दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गोपीनाथ मोहंती, टॉलस्टॉय और मार्खेज मेरे पसंदीदा लेखकों में से हैं, जिसने मैंने बहुत कुछ सीखा। महाभारत पर आधारित मेरे उपन्यास याज्ञसेनी पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन मैंने इसमें द्रौपदी को नई रोशनी में दिखाने का प्रयास किया है। मेरे लिए लेखन कल्पना आधारित नहीं, बल्कि जीवन यथार्थ को उसकी समग्रता में दिखाने का माध्यम है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed