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नाना की पाडुंलिपियों ने कला-संस्कृति के प्रति रुचि जगाई

Sat, 20 Jan 2018 12:28 PM IST
यी बॉनफोय, फ्रेंच कवि और कला-इतिहासकार
यी बॉनफोय, फ्रेंच कवि और कला-इतिहासकार Updated Sat, 20 Jan 2018 12:28 PM IST
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famous french poet yves bonnefoy story
मेरे पिता रेलवे में कर्मचारी थे। वह काफी मेहनती थे, फिर भी गरीब थे। उनके पास इतना समय नहीं था कि वह कला और संस्कृति के बारे में सोच भी सकते थे। लेकिन मेरे नाना स्कूल में शिक्षक थे। उन्हें कला एवं संस्कृति से लगाव था। उन्होंने इतिहास पर एक ग्रंथ लिखा और एक किताब नैतिकता पर। वह बस अपनी खुशी के लिए लिखते थे। शायद उन्हें यह भ्रम था कि वह एक अच्छे लेखक हैं और एक दिन उनकी किताबें जरूर प्रकाशित होंगी। मेरे पास उनकी कुछ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं।
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उनमें तमाम तरह की चीजें हैं-फूल एवं पौधों के चित्र, ज्यामितीय स्वरूप का अध्ययन आदि। वह धार्मिक नहीं थे, लेकिन धार्मिक अनुदेश और उसके पवित्र इतिहास पर उन्होंने एक छोटी-सी किताब लिखी। मेरी मां स्कूल की शिक्षिका थीं। हालांकि उससे पहले प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने नर्स का भी काम किया था। मेरे नाना ने मेरे जीवन को बेहद प्रभावित किया और उनकी पांडुलिपियों ने कला-संस्कृति के प्रति रुचि जगाई।
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उनके लेखन ने मेरे सामने एक उदाहरण पेश किया और लेखन के प्रति प्रेरित किया। नाना के साहित्य से प्रभावित होकर मैंने पहले ही सोच लिया था कि मुझे लेखक बनना है। वैसे जब मैं सात साल का था, तभी मेरी मौसी ने मुझे एक काव्य संग्रह जन्मदिन पर उपहार में दिया था, जिस पर उन्होंने लिखा था-मेरे धर्मपुत्र और भावी कवि के लिए। इसलिए पढ़ना-लिखना सीखने से पहले ही यह तय हो गया था कि मुझे कवि बनना है। शायद उन्हें यह एहसास था कि मेरे आसपास जो हो रहा है, शायद मैं उस पेशे को न अपनाऊं।
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