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पुस्तक समीक्षा : सरहदों के पार
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 04 Dec 2016 12:10 AM IST
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सरहदों के पार
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लेखक
सुरेशचंद्र शुक्ल
प्रकाशक
हिंदी साहित्य निकेतन, बिजनौर
मूल्य
200 रुपये
दूर से देखना देश के चांद को
कहानियां किसी घटना को ज्यादा बेहतर तरीके से कह पाने का एक माध्यम हैं। अपनी इस किताब में सुरेशचंद्र शुक्ल ने इसी माध्यम के जरिये कुछ अहम बातें कहने की कोशिश की है। 119 पेज की इस किताब में कुल 17 कहानियां हैं। कहानियों का परिवेश अलग है। 'मदरसों के पीछे' कहानी अफगानिस्तान की पृष्ठभूमि पर है, जो मुस्लिम समाज में जात-पात को उजागर करती है। 'सरहदों से दूर' की पृष्ठभूमि ईराक है। सुरेशचंद्र शुक्ल मूल रूप से भारत के हैं। वर्तमान में नॉर्वे के ओस्लो में रह रहे हैं। इस किताब में उन्होंने विदेश में रहने वाले भारतीयों के नजरिये से लिखने की कोशिश की है।