पुस्तक समीक्षा : दासता के बारह बरस

टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 04 Dec 2016 12:01 AM IST
book review : Dastan k Baraha Baras
दासता के बारह बरस 
लेखक
सोलोमन नॉर्थअप
अनुवाद
डॉ. मुकेश कुमार 
प्रकाशक
भारतीय ज्ञानपीठ 
मूल्य
320 रुपये

एक दास की आपबीती
इस किताब में एक अश्वेत अमेरिकी सोलोमन नॉर्थअप की आपबीती दर्ज है। वरिष्ठ पत्रकार व लेखक डॉ. मुकेश कुमार ने सोलोमन की दर्द भरी दास्तां को अनुवाद के जरिये इस किताब में पेश किया है। सोलोमन वाशिंगटन में रहने वाले एक स्वतंत्र नागरिक थे। करीब 175 साल पहले उनका अपहरण करके उन्हें दास-प्रथा वाले दक्षिणी इलाके में बेच दिया गया। था। बारह साल तक एक दास के रूप में उन्होंने दर्द और यातनाएं झेलीं। यह किताब इन्हीं यातनाओं का एक चित्र पेश करती है और साथ में सदियों से चली आ रही दास प्रथा पर कुछ सवाल भी उठाती है।

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