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विश्व शतरंज दिवस: पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुका शतरंज, कभी हुआ करता था राजा-महाराजाओं का दिमागी खेल

Thu, 20 Jul 2023 10:03 AM IST
Hans Raj Thakur हंस राज ठाकुर
Updated Thu, 20 Jul 2023 10:03 AM IST
सार

विश्वस्तर पर नियमों में एकरूपता लाने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘विश्व शतरंज संघ’ यानी वर्ल्ड चेस फेडरेशन की स्थापना 20 जुलाई 1924 को की गई। यह संस्था दुनियाभर के राष्ट्रीय शतरंज संघों को निर्देशित करती है व शासी निकाय के रूप में कार्य करती हैI

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world chess day 2023 July 20 celebration history know all about international chess day in hindi
International Chess Day 2023 - फोटो : Istock

विस्तार

वैसे तो वर्ष का हर दिन महत्वपूर्ण होता है, परंतु कुछ दिन विशेष प्रयोजन हेतु समर्पित व आयोजित किए जाते हैं, जैसे यूनेस्को द्वारा वर्ष 1966 से व बाद में विश्व शतरंज संस्था द्वारा 20 जुलाई को हर वर्ष विश्व शतरंज दिवस के रूप में मनाया जाता है वर्तमान में 199 से अधिक देशों ने अपनी राष्ट्रीय शतरंज संस्थाएं बना ली हैंI मूलतः भारत से जिस खेल का प्रादुर्भाव हुआ, जो शुरुआत में शाही खेल हुआ करता था, राजा- महाराजा जिस दिमागी खेल से आपस में कई निर्णय कर लिया करते थे, आज पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त खेल बन चुका हैI 

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विश्व के लगभग सभी देशों में आज यह खेल प्रचलित हैI पिछले वर्ष पहली बार भारत ने शतरंज ओलंपियाड का सफल आयोजन करके विश्व जगत को अपनी काबिलियत का परिचय दिया I वर्तमान में विश्वभर में 34 खिलाड़ी 2700 ई.एल.ओ के ऊपर हैं, जिसमें 08 भारतीय खिलाड़ी हैं I भारत में शतरंज खेल को बढ़ावा देने में आखिल भारतीय शतरंज संघ का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैI

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इतिहास के मुताबिक ओलंपिक खेलों का आयोजन 1200 साल पूर्व योद्धा खिलाड़ियों के बीच हुआ था। हालांकि ओलंपिक का पहला आधिकारिक आयोजन 776 ईसा पूर्व ओलंपिया स्टेडियम में हुआ थाI तद्पश्चात ओलंपिक खेल आज तक जारी है, मगर शतरंज खेल अभी तक ओलंपिक खेलों का हिस्सा नहीं बन पाया। विश्व खेल शतरंज संघों को इस बारे में सोचना बाकी हैI

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खेलकूद शारीरिक-मानसिक विकास के लिए जरूरी

खेलकूद, लोगों के मनोरंजन का प्रमुख एवं परंपरागत साधन हैं व इसका आयोजन प्राचीन काल से ही होता आया हैI समय-समय पर इसके प्रारूप में परिवर्तन होता रहा हैI खेलकूद प्राचीन समय में भी होते थे। मगर शारीरिक गतिविधियों वाले, जिससे उनके शरीर हृष्ट-पुष्ट रहते थे। परंतु वर्तमान भौतिक युग में शारीरिक श्रम का महत्व कम होते जा रहा है और लोगों को शारीरिक व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में खेलों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती हैI


बाल्यकाल से ही खेलों को जीवन का अभिन्न अंग बनाया जा रहा हैI विकसित देशों में तो 2-3 साल की उम्र से ही बच्चों को उनकी रुचि के खेल में पारंगत किया जा रहा है ताकि बेहतर परिणाम आ सकेI वर्तमान में दिमागी संवर्धन के खेल की उपयोगिता व लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है और हमारे देश के- गुकेश, प्रज्ञानन्धा, अर्जुन इरीगासी व निहाल सरीन जैसे युवा, अपना परचम विश्व शतरंज में लहरा रहे हैंI

विश्व स्तर पर नियमों में एकरूपता लाने हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘विश्व शतरंज संघ’ यानी वर्ल्ड चेस फेडरेशन की स्थापना 20 जुलाई 1924 को की गई। यह संस्था दुनिया भर के राष्ट्रीय शतरंज संघों को निर्देशित करती है व शासी निकाय के रूप में कार्य करती हैI

समय-समय पर शतरंज खेल नियमों में आवश्यक संशोधन होते रहते हैं व प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई से प्रभावी माने जाते हैंI गत वर्ष जुलाई तक विश्व में 1742 ग्रांडमास्टर बन चुके थे, जिसमें रूस अग्रणी हैI आज विश्व में नोर्वे का खिलाड़ी मेगनस कार्लसन क्लासिकल-2835, रैपिड-2829 व ब्लीट्ज़-2852 रेटिंग के साथ विश्व का नंबर एक चेस प्लेयर है, इस बार विश्व चैंपियनशिप में स्वेछा से न खेलने के कारण वर्तमान में डींग लीरेंन, नेपोमिनियची को हराकर विश्व शतरंज चैम्पियन बने I 

भारत के विश्वनाथन आनंद

विश्व के शीर्ष 10 ग्रांडमास्टर खिलाड़ियों में भारत के विश्वनाथन आनंद 2754 रेटिंग के साथ विश्व नंबर 9 पर विराजमान हैं। आनंद, शतरंज खेल के विभिन्न प्रारूपों में पांच बार वर्ल्ड चैम्पियन रहे हैं, जबकि मेगनस भी पांच बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैंI माना जाता है कि यह खेल पांचवीं-छठी शताब्दी के दौरान भारत में प्रचलित हुआ फिर पारसी देशों से होता हुआ पूरे विश्व में पहुंचा I

इस खेल के बारे में कई रोचक किस्से प्रचलित हैंI इस खेल को पहले चतुरंग के नाम से जाना जाता था। नौवीं शताब्दी तक यह खेल यूरोप व रूस जैसे देशों तक पहुंच गया व लगातार विश्वव्यापी बनता गया। आजकल लगभग सभी देशों में पहुंच चुका हैI अलग-अलग देशों में कई नामों से पहचाना जाता है। भारत में इसे शहमात का खेल भी कहते हैं, पुर्तगाल में जादरेज व स्पेन में एजेड़रेज़ कहा जाता है। 

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chess compitition

हाल ही में भारतीय मूल के अभिमन्यु मिश्रा ने सरगई कर्जाकिन का 12 वर्ष 7 महीने की उम्र में ग्रांडमास्टर बनने का विश्व रिकॉर्ड 12 वर्ष 4 महीने व 25 दिन की अवधि में ग्रांडमास्टर बनकर तोड़ दियाI आनंद के पद चिन्हों पर चलते हुए भारतीय युवा शतरंज में अपनी बादशाहत विश्व स्तर पर कायम कर रहे हैं I ग्रांडमास्टर इस खेल का सबसे बड़ा नोर्म है जिसके लिए पुरुष वर्ग के खिलाड़ियों को 2500 की ईएलओ रेटिंग प्राप्त करनी पड़ती हैI
 

भारत के 82 वें ग्रांडमास्टर 15 साल के वी. प्रनीथ बने I जनवरी 2023 तक भारत में 82 ग्रांडमास्टर, 124 इंटरनेशनल मास्टर , 23 महिला ग्रांडमास्टर, 42 महिला इंटरनेशनल मास्टर व कुल 60000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रेटिड खिलाड़ी बन चुके हैं तथा रेटिड खिलाड़ियों के मामले में भारत–रूस के बाद दूसरे नंबर पर है I


जब विश्व में कोरोना की वजह से जहां खेलों सहित सब कुछ थम सा गया था। वहीं शतरंज खेल ऑनलाइन माध्यम से विश्व, देश, प्रदेश व जिला स्तर निर्बाध रूप से जारी रहा, जिसमें हिमाचल जैसा छोटा पहाड़ी राज्य भी पीछे नहीं रहा। हालांकि इस माध्यम से सभी खिलाड़ी भाग नहीं ले पाते हैं, सुविधाओं के अभाव में। परंतु फिर भी दिमागी संवर्धन का यह खेल अबाधित जारी रहा, जो इस खेल की अनेक विविधताओं में से एक हैI


हिमाचल में शतरंज 

आज भारत का परचम विश्व शतरंज में लहरा रहा है। इसके पीछे शतरंज खेल संघों का सक्रिय योगदान भी रहा है व आयोजित करने वाले सहयोगी आर्बिटर पैनल का भी। अविभावक भी वक्त की नज़ाकत समझ रहे हैं I हिमाचल प्रदेश में भी शतरंज का यह निरंतर ऑनलाइन रूप में जारी रहा है। नई चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं था, मगर फिर भी कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है- क्रम जारी हैI

हिमाचल जैसे राज्य में भी शतरंज प्रेमियों के सहयोग से सभी बच्चों को इस खेल से जुड़ने का यथा सामर्थ्य भरपूर अवसर दिया जा रहा है और वर्ष 2023 में 15 साल की कम आयु वर्ग का खिलाड़ी सीनियर स्टेट ओपन शतरंज रेटिड प्रतियोगिता का विजेता बनाI

आज के इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी जी का वक्तव्य याद आ रहा है -
 

शतरंज का, यह बहुआयामी खेल आमजन के जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनना चाहिए I व्यावसायिक तौर पर नहीं, व्यक्तिगत जीवन को लाभान्वित करने हेतु ही सही I बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु तो यह खेल निश्चित रूप से लाभदायक सिद्ध हो रहा है व उन्हेॆ मोबाइल सहित नशे से परे व मानसिक अवसाद से दूर रखने में कारगर साबित हो रहा हैI


अनुराग ठाकुर जी के खेलमंत्री बनने के बाद शतरंज प्रेमियों की और अधिक उम्मीद बंध गई है। मगर धरातल पर देखना बाकी शेष I प्रदेश सरकार को भी शिक्षा विभाग में शतरंज को शामिल करने और अधिक तवज्जो व आवश्यक बुनियादी संसाधन देने की आवश्यकता है, ताकि हिमाचल प्रदेश के शतरंज खिलाड़ी भी विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ सकेI

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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