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वित्तीय वर्ष: आखिर एक काल के दो अलग वर्ष क्यों? क्या है कारण? कैसा होता है प्रभाव?

Mon, 08 Apr 2024 01:13 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Mon, 08 Apr 2024 01:13 PM IST
सार

वित्तीय नियोजन और प्रबंधन के लिए जरूरी है वित्तीय वर्ष कैलेंडर वर्ष और वित्तीय वर्ष मुख्यतः ऐतिहासिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक कारणों से भिन्न होते हैं। कैलेंडर वर्ष समय का एक सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त माप है।

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Why There Is Two Different Calendars Years
Why There Is Two Different Calendar Years - फोटो : Istock

विस्तार

पहले अप्रैल को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही सरकारों और व्यापार जगत की नई वित्तीय गतिविधियां भी शुरू हो गईं। वे वित्तीय खाते जो 31 अगस्त को बंद हो गए थे फिर खुल गए। जबकि नया कैलेंडर वर्ष तीन माह पहले 1 जनवरी को शुरू हो चुका था। ग्रेगोरियन कैलेण्डर के हिसाब से इन दोनों ही प्रकार के वर्षों में सामान्य एक साल 356 दिन का और हर एक चार साल बाद 29 दिन की फरवरी वाला साल 366 दिन का होता है, इसलिए सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि आखिर ये दोनों ही वर्ष 1 जनवरी से शुरू क्यों नहीं होते हैं? यद्यपि विभिन्न संस्कृतियों के नए साल अलग-अलग दिन शुरू होते हैं।

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दरअसल, अधिकतर देश ग्रगोरियन वर्ष के साथ ही सरकारी कामकाज और वित्तीय प्रबंधन के लिए अलग फिस्कल इयर या वित्तीय वर्ष को भी अपनाते हैं। जाहिर है कि वैश्विक स्तर पर दोनों ही तरह के वर्ष महत्वपूर्ण और जुड़वा हैं।
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वित्तीय नियोजन और प्रबंधन के लिए जरूरी है वित्तीय वर्ष कैलेंडर वर्ष और वित्तीय वर्ष मुख्यतः ऐतिहासिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक कारणों से भिन्न होते हैं। कैलेंडर वर्ष समय का एक सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त माप है। जबकि वित्तीय वर्ष व्यवसायों और सरकारों द्वारा उनकी परिचालन और वित्तीय आवश्यकताओं के साथ-साथ नियामक आवश्यकताओं के साथ बेहतर तालमेल के लिए चुना जाता है। कैलेंडर वर्ष का प्राचीन काल से समय का पता लगाने के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया गया है। यह सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा के साथ संरेखित होता है, जिसमें 365 या 366 दिन होते हैं।
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दूसरी ओर वित्तीय वर्ष की आवश्यकता सरकारों और व्यवसायों को अक्सर रिपोर्टिंग कर उद्देश्यों, बजट और वित्तीय नियोजन के लिए अपने वित्त को व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है। प्रशासनिक सुविधा के लिए वे ऐसे वित्तीय वर्ष चुन सकते हैं जो उनके परिचालन चक्र, राजस्व पैटर्न या लेखांकन प्रथाओं से बेहतर मेल खाते हों। वित्तीय वर्ष अक्सर प्राकृतिक व्यापार चक्र या राजस्व पैटर्न के साथ मेल खाने के लिए चुने जाते हैं। सरकारें अपने वित्तीय वर्षों को विधायी चक्रों या आर्थिक चक्रों के साथ संरेखित करती हैं।

वित्तीय वर्ष आर्थिक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण घटकवित्तीय वर्ष आर्थिक प्रशासन का एक महत्वपूर्ण घटक है जो सरकारों, व्यवसायों और संगठनों को वित्तीय योजना, रिपोर्टिंग और निर्णय लेने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। सरकारों को कर कानूनों और विनियमों के लिए संस्थाओं को कैलेंडर वर्ष से भिन्न वित्तीय वर्ष के आधार पर अपनी वित्तीय गतिविधियों की रिपोर्ट करने की आवश्यकता होती है। यह उचित कर मूल्यांकन, राजस्व संग्रह और नियामक अनुपालन की व्यवस्था करता है। 

विभिन्न देशों और क्षेत्रों में सांस्कृतिक, कानूनी या आर्थिक कारकों के आधार पर वित्तीय वर्ष को परिभाषित करने के लिए अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ देश कैलेंडर वर्ष को अपने वित्तीय वर्ष के रूप में अपनाते हैं, जबकि अन्य अलग-अलग अवधि जैसे 1 अप्रैल से 31 मार्च या 1 जुलाई से 30 जून तक का उपयोग कर सकते हैं।

प्राचीन सभ्यताओं में भी वित्तीय वर्ष की व्यवस्थाहालांकि, वर्ष प्रारंभ तिथि अलग-अलग देशों में अलग-अलग हो सकती है लेकिन वित्तीय वर्ष के अंतर्निहित सिद्धांत दुनिया भर में एक समान रहते हैं। 

Why There Is Two Different Calendars Years
Why There Is Two Different Calendar Years - फोटो : Istock

वित्तीय वर्ष की जड़ें मेसोपोटामिया, मिस्र, ग्रीस और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं में खोजी जा सकती हैं। इन समाजों में वित्त और कराधान के प्रबंधन के लिए अल्पविकसित प्रणालियां थीं, जो अक्सर कृषि चक्रों पर आधारित होती थीं। प्राचीन रोम में वित्तीय वर्ष मूल रूप से 1 मार्च को शुरू होता था जो कि चंद्र कैलेंडर पर आधारित था।

45 ईसा पूर्व जूलियस सीजर द्वारा जूलियन कैलेंडर की शुरुआत के साथ 1 जनवरी नागरिक वर्ष की शुरुआत मानी गई। लेकिन वित्तीय वर्ष स्थानीय प्रथाओं के आधार पर बदलता रहा।

मध्य युग के दौरान विभिन्न यूरोपीय देशों ने वित्तीय प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रणालियों का उपयोग किया। उदाहरण के लिए इंग्लैंड में वित्तीय वर्ष मूल रूप से 25 मार्च को शुरू होता था जिसे लेडी डे के रूप में जाना जाता था जो कि घोषणा का पर्व था।

भारत के लिए अनुकूल वित्त वर्ष का समयसन 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद, वित्तीय वर्ष काफी हद तक अपरिवर्तित रहा। समय के साथ देश की आर्थिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए भारतीय वित्तीय वर्ष में विभिन्न संशोधन और समायोजन किए गए।

यह राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर बजट, कराधान, वित्तीय रिपोर्टिंग और आर्थिक योजना के लिए एक महत्वपूर्ण अवधि के रूप में कार्य करता है। अप्रैल-मार्च की अवधि हिंदू नव वर्ष के साथ मेल खाती है, जो भारतीय वित्तीय वर्ष के अप्रैल में शुरू होने का एक प्रमुख कारण है। हिंदू नववर्ष चंद्र कैलेंडर पर आधारित है। यह आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है, जो भारत के वित्तीय वर्ष के साथ मेल खाता है। अप्रैल-मार्च वित्तीय वर्ष भारत में कृषि फसल चक्र के साथ संरेखित होता है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का प्रमुख योगदान है। वित्तीय वर्ष के साथ भारतीय फसल मौसम का संयोग यह है कि भारतीय कृषि चक्र मानसून के मौसम से निकटता से जुड़ा हुआ है, जो जून से सितंबर तक होता है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत अलग-अलग देशों में सन 1582 में पोप ग्रेगरी द्वारा ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरूआत ने अधिकांश पश्चिमी दुनिया में उपयोग की जाने वाली कैलेंडर प्रणाली को मानकीकृत किया।

हालांकि, वित्तीय वर्ष की शुरुआत अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में अलग-अलग होती रही। आधुनिक राष्ट्रों के उदय और केंद्रीकृत सरकारों के विकास के साथ वित्तीय प्रथाओं में मानकीकरण पर जोर दिया गया। कई देशों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुरूप होने के लिए 1 जनवरी को वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में अपनाना शुरू कर दिया।

20वीं सदी में वित्तीय वर्ष की अवधारणा अधिक औपचारिक हो गई, सरकारों ने राजकोषीय योजना, बजट और कराधान के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश स्थापित किए। हालांकि, कुछ देश अभी भी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक कारणों के आधार पर वैकल्पिक वित्तीय वर्ष के अंत को बनाए रखते हैं।
 

वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से ही क्यों? 

कुछ देशों में वित्तीय वर्ष की शुरुआत के लिए 1 अप्रैल को चुनने का ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व होता है। उदाहरण के लिए भारत में जहां वित्तीय वर्ष परंपरागत रूप से 1 अप्रैल से शुरू होता है। यह हिंदू नववर्ष और कृषि फसल के मौसम के साथ संरेखित होता है। 1 अप्रैल कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही की शुरुआत में पड़ता है। इस समय वित्तीय वर्ष शुरू करने से व्यवसायों और सरकारों को अपने बजट, योजना और रिपोर्टिंग चक्रों को एक नई वित्तीय अवधि की शुरुआत के साथ संरेखित करने का अवसर मिलता है।

सरकारें कराधान और विनियामक कारणों से वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में 1 अप्रैल का चयन करती हैं। यह वित्तीय वर्षों के बीच सहज बदलाव का उचित समय माना जाता है और कर संग्रह और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाता है।

1 अप्रैल कुछ देशों में कुछ आर्थिक चक्रों या मौसमों के अंत के साथ मेल खाता है, जिससे यह वित्तीय वर्ष के लिए एक तार्किक प्रारंभिक बिंदु बन जाता है। ब्रिटेन का साल का पहला दिन 25 मार्च था अट्ठारहवीं सदी में ब्रिटिश सरकार ने ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग करना चुना। लेकिन, ऐसा करने से पहले, उन्होंने नए साल की तारीख को बदलकर 1 जनवरी करने का फैसला किया। तब तक साल का पहला दिन हमेशा 25 मार्च होता था, जिसे लेडी डे के नाम से भी जाना जाता है।

इंग्लैंड और दुनिया भर के उसके उपनिवेशों में वित्तीय वर्ष 25 मार्च से 31 दिसंबर तक होता था। लेकिन 1752 में अंग्रेजी सरकार 1 जनवरी से नया साल शुरू करने पर सहमत हो गई। लेकिन वहां के अकाउंटेंटों को लगा कि तारीख बदलना अन्याय होगा और उन्होंने इसके खिलाफ विद्रोह कर दिया। अतः वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से माना जाता रहा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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