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पश्चिम बंगाल की सत्ता: सोनार बांग्ला के संकल्प से सिद्धि का सफर निरापद नहीं
सार
तुष्टीकरण के खिलाफ हिंदुत्व को धार देते हुए भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया। इसी के बूते भाजपा 2016 में 3 सीटों से 2021 के चुनाव में 77 तक पहुंच पाई । ममता का तुष्टीकरण वाला रवैया तब भी जारी रहा। उनका दुधारू गाय की लात वाला बयान चर्चा में आया।
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चुनाव में भाजपा की जीत के बाद जश्न मनाते लोग
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का अमृतकाल शुरू होने वाला है। यह महज संयोग है कि 75 साल पहले जिस धरती पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दक्षिणपंथी हिदुत्ववादी जनसंघ की स्थापना की थी, वहां तुष्टीकरण की राजनीति के चलते पहली बार भगवा का परचम लहराया है।
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यह भी संयोग है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने करीब 121 साल पहले बांग्लादेश विभाजन की पीड़ा झेलते हुए जो आमार सोनार बांग्ला.. गीत लिखा था। उन्हीं की जयंती पर 9 मई को बंगाल में आमार सोनार बांग्ला के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने की चुनौतियों के बीच नई सरकार की ताजपोशी होने जा रही है। भाजपा के लिए गंगोत्री से गंगासागर तक का यह सफर इतना निरापद नहीं था ।
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हिंदुत्व बनाम तुष्टीकरण
राजनीतिक पंडित भाजपा की इस जीत को हिंदुत्व और ध्रुवीकरण के चश्मे से निहारते हैं लेकिन इसके लिए तुष्टीकरण की राजनीति बड़ी वजह रही है । बंगाल में 2016 से 2026 तक भाजपा के लिए 3 से 206 सीटों तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं था। 2016 में भाजपा को 3 सीटें मिलीं, 2021 में 77 और अब 206। दस साल में करीब 203 सीटों का इजाफा।
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दरअसल, ममता बनर्जी ने 15 साल के अपने शासन में मां, माटी, मानुष को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। मां (दुर्गा) के नाम पर 2017 में जब दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और मुहर्रम साथ-साथ पड़ा तो ममता ने तुष्टीकरण की राजनीति के तहत दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर ही रोक लगा दी । अंतत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप कर ममता के तुष्टीकरण वाले इस फैसले पर हथौड़ा चलाया।
तुष्टीकरण के खिलाफ हिंदुत्व को धार देते हुए भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया। इसी के बूते भाजपा 2016 में 3 सीटों से 2021 के चुनाव में 77 तक पहुंच पाई । ममता का तुष्टीकरण वाला रवैया तब भी जारी रहा। उनका दुधारू गाय की लात वाला बयान चर्चा में आया। बयान था- हां, मुसलमानों का 100 बार तुष्टीकरण करेंगे, दूध देने वाली गाय की लात भी खानी पड़ती है।
मुस्लिम वोट बैंक की तुष्टीकरण वाला यह बयान भी ममता पर भारी पड़ा ।
बदलाव बनाम बदला
मां (काली-दुर्गा) की पूजा वाली इस माटी पर मां-बहनों की अस्मिता ही खतरे में पड़ गई। आरजी कर मेडिकल छात्रा कांड हो या संदेशखली। भाजपा बदलाव की बयार चाहती थी, तो ममता बदले की। यह भी संयोग है कि बदलाव भी हुआ और बदला भी, दोनों साथ-साथ। महिलाओं ने वोट को रक्षा कवच बनाया और बंपर मतदान किया। आरजीकर और संदेशखली का बदला लेकर महिलाओं ने बदलाव ला दिया। भाजपा ने आरजी कर कांड की पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए उनकी मां रत्ना देवनाथ को पानीहाटी विधानसभा से टिकट दिया और वह करीब 28 हजार मतों से विजयी हुईं।
हिंदुत्व, तुष्टीकरण और ध्रुवीकरण की राजनीति ने इस बार के चुनाव को आर-पार की लड़ाई में बदल दिया। हुमायूं कबीर ने ममता का साथ छोड़कर बाबरी मस्जिद बनाने का मंसूबा लेकर खम ठोक दिया तो ओवैसी खुद को मुस्लिमों का मसीहा साबित करने में जुटे रहे । हुमायूं कबीर की दोनों सीट पर जीत हुई। हुमायूं-ओवैसी के मैदान में आने से तुष्टीकरण की राजनीति से वोट की फसल लहलहाने की आस वाली ममता को निराश होना पड़ा।
मुस्लिम वोट बैंक के कई खेमों में बंटने से तुष्टिकरण किसी की संतुष्टिकरण की वजह नहीं बनी। यही कारण है कि इस बार भाजपा को मुस्लिमों ने ठीक-ठाक वोट दिया। यह मुसलमानों का वह वोट बैंक था जिसे ममता संतुष्ट नहीं कर सकीं। ममता भी कांग्रेसी दिग्गजों की तरह मंदिर-मस्जिद के बीच उलझकर रह
गईं। उन्होंने कुछ मंदिरों का जीर्णोद्वार भी कराया ।
हिंदुत्व की धारा
इसके उलट हिंदुत्व की धारा गंगोत्री से गंगासागर तक धीमे-धीमे बह रही है। हिंदुत्व की इस धारा को समझने के लिए आइए बंगाल से गंगा की उलटी दिशा यानी यूपी (काशी, प्रयागराज, अयोध्या) की ओर चलते हैं। राममंदिर बनने के बाद से देश के अलग-अलग कोने से श्रद्दालुओं का जत्था बरास्ते काशी, प्रयागराज अयोध्या रामलला के दर्शन को पहुंचता है। ये जत्थे भाजपा शासित राज्यों या भाजपा सांसदों की ओर से प्रायोजित होते हैं।
बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के दौरान जब मोदी दो दिन (28-29 अप्रैल) के काशी प्रवास में थे, तभी बाबा के कोरिडोर में 900 श्रद्दालुओं का जत्था छत्तीसगढ़ से पहुंचा । इनके (काशी-प्रयागराज-अयोध्या) आने-जाने से लेकर सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा के दिन ठहरने तक की व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रायोजित थी । ऐसा ही जत्था झारखंड से भी पहुंचा। झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है लेकिन इन जत्थों के प्रायोजक भाजपा सांसद थे।
दिल्ली की सरकार श्रद्धालुओं को सोमनाथ की यात्रा करा रही है। हर साल काशी में तमिल संगमम होता है, जो दक्षिण को जोड़ता है । धरम-करम और हिंदुत्व की यह धारा कश्मीर से कन्याकुमारी तक अनवरत जारी है। ऐसे में अगले साल यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, गोवा, मणिपुर, हिमाचल और पंजाब के प्रस्तावित चुनावों में मतदाताओं की कृपा यूं ही भाजपा पर बरसती रहे तो कोई हैरानी नहीं क्योंकि विपक्ष इस हार से भी पिछली बार की तरह वोट चोरी जैसे आरोप मढ़कर हताशा से उबरने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।
उधर रामराज के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने के मंसूबे से भाजपा की धरम-करम (हिंदुत्व) की गंगा बहाने का सिलसिला जारी है । ऐसे में रामचरित मानस की चौपाई गौरतलब है ....जा पर राम की कृपा.....।
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