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इंतजार करना मनस्थिति: प्रतीक्षा में लोग जीवन निकाल देते हैं, स्वयं को समझने का सूत्र अपनाएं

Mon, 08 Sep 2025 06:35 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एक्हार्ट टॉल्ल
एक्हार्ट टॉल्ल Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 08 Sep 2025 06:35 AM IST
सार


प्रतीक्षा में लोग अपना पूरा जीवन निकाल देते हैं। इंतजार करना मन की स्थिति है। इसका अर्थ है कि आप भविष्य चाहते हैं, आपको वर्तमान नहीं चाहिए। जो हमारे पास है, वह हमें नहीं चाहिए और जो नहीं है, वह चाहिए।

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Waiting only mental state People waste their life waiting adopt formula of understanding yourself
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

हम भविष्य में जाने के लिए इतने बेचैन रहते हैं कि वर्तमान बस वहां पहुंचने का साधन बन कर रह जाता है। जब ‘यहां’ होने पर ‘वहां’ पहुंचने की चाह होती है या फिर वर्तमान में रहकर भविष्य में पहुंचने की इच्छा होती है, तो तनाव पैदा होता है। यह एक ऐसा विभाजन है, जो हमें अंदर से चीर देता है। क्या अतीत आपका बहुत ध्यान आकर्षित करता है? आपकी उपलब्धियां, रोमांचक किस्से, अनुभव या वे सारी बुरी चीजें जो आपके साथ हुई हों, क्या आप उनके बारे में बोलते या सोचते हैं? क्या आपकी विचार-प्रक्रिया अपराधी भाव, घमंड, आक्रोश, गुस्सा, खेद या आत्मग्लानि पैदा कर रही है? अगर हां, तो आप न केवल अपने मन में झूठे आत्मभाव को प्रबल कर रहे हैं, बल्कि अतीत को संजोकर अपने शरीर को जल्दी बूढ़ा कर रहे हैं। इसका जीता-जागता उदहारण उन लोगों में मिल जाएगा, जो अपने अतीत को पकड़े रखते हैं।

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हर क्षण अतीत के बारे में सोचना ठीक नहीं है। जब वर्तमान में उसकी जरूरत हो, तभी उसका उल्लेख करें। इस क्षण में निहित शक्ति का और आत्मा की पूर्णता का अनुभव करें। अपनी उपस्थिति का अनुभव करें। आपके मन में बहुत से विचार हैं, जो चिंता में डाल रहे हैं। आपका मन काल्पनिक भविष्य में खुद को देख रहा है और भय पैदा कर रहा है। किसी भी दशा में आप ऐसी परिस्थिति का सामना नहीं कर सकते, क्योंकि उसका अस्तित्व ही नहीं है। वह एक मानसिक छायाभास है। वर्तमान क्षण को स्वीकार करके आप जीवन उजाड़ने वाले पागलपन को रोक सकते हैं। अपनी श्वास-प्रश्वास के प्रति जागरूक हो जाएं। वायु को अपने शरीर के अंदर व बाहर आता-जाता महसूस करें। अपने अंत:शक्ति क्षेत्र को महसूस करें। वास्तविक जीवन में, मन की काल्पनिक बातों के बजाय हमें केवल वर्तमान क्षण का सामना करना होता है। स्वयं से पूछें कि इस क्षण में क्या ‘परेशानी’ है। आप वर्तमान क्षण का हरदम सामना कर सकते हैं, पर भविष्य का कभी नहीं, न ही इसकी जरूरत है। जब आपको जरूरत हो, तब जवाब, सामर्थ्य, सही कर्म व साधन सभी मौजूद होंगे, उससे पहले नहीं, न ही बाद में। क्या हम आदतन ‘प्रतीक्षक’ हैं? जीवन में कितना समय हम इंतजार करने में गंवा देते हैं। ट्रैफिक जाम में, हवाई अड्डे में, किसी के आने के लिए या काम खत्म करने के इंतजार में, इसे मैं छोटा इंतजार कहता हूं। अगली छुट्टियों का, अच्छी नौकरी का, बच्चों के बड़े होने का, अर्थपूर्ण रिश्तों को पाने का, सफलता का, पैसे बनाने का, महत्वपूर्ण बनने का, आत्म साक्षात्कारी बनने का इंतजार करना लंबा इंतजार होता है।
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यह कोई असामान्य बात नहीं है कि,‘जीवन जीना’ शुरू करने की प्रतीक्षा में लोग अपना पूरा जीवन निकाल देते हैं। इंतजार करना मन की स्थिति है। इसका अर्थ है कि आप भविष्य चाहते हैं, आपको वर्तमान नहीं चाहिए। जो हमारे पास है, वह हमें नहीं चाहिए और जो नहीं है, वह चाहिए। हर इंतजार के साथ आप अपने वर्तमान में, जहां नहीं होना चाहते हैं और कल्पित भविष्य में, जहां आप होना चाहते हैं, में एक अंतर्द्वंद्व पैदा कर देते हैं। वर्तमान के खोने से हमारे जीवन की गुणवत्ता भी कम हो जाती है।
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सूत्र- स्वयं को समझें
हम भागने के इतने आदी हो गए हैं कि हमें स्वयं को समझने का समय नहीं मिलता। हम कभी अतीत, तो कभी भविष्य की ओर चले जाते हैं। इस दौड़-भाग में उम्र का आधे से अधिक हिस्सा निकल जाता है और अधिकांश लोग उस भविष्य को नहीं पाते, जिसका उन्होंने सपना देखा था। स्वयं को समझें, वर्तमान में रहें। यहीं से भविष्य का रास्ता तय होता है।

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