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Trump Oath: ट्रम्प की ताजपोशी के समारोह के न्यौते का इंतजार

Sat, 11 Jan 2025 11:44 AM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Sat, 11 Jan 2025 11:44 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह के विदेशी मेहमानों की अंतिम सूची का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है और संभव है कि भारत के प्रधानमंत्री को भी इस समारोह में आमंत्रित किया जाए, लेकिन अमेरिका के दो प्रमुख अखबार ‘‘वाशिंगटन पोस्ट’’ और ‘‘न्यूर्याक टाइम्स’’ में इस मुद्दे को लेकर जो विश्लेषणात्मक टिप्पणियां आई हैं।

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Waiting for invitation to Trump's coronation ceremony
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रम्प का शपथ ग्रहण समारोह, जो 20 जनवरी, 2025 को आयोजित होने वाला है, दुनिया भर के नेताओं और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस समारोह में शामिल होने के लिए कौन से विदेशी नेता आमंत्रित होंगे, यह एक बड़ा सवाल बन चुका है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई विदेशी नेताओं को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है। हालांकि, अभी तक किसी भी आधिकारिक स्रोत से इस बारे में पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी 7 जनवरी को एक बयान जारी करते हुए कहा कि, यदि कुछ नया होता है तो वह मीडिया को किसी भी नई जानकारी से अवगत कराएगा।

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अमरीकी अखबारों की चर्चा भारत में गर्म

अमेरिका के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह के विदेशी मेहमानों की अंतिम सूची का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है और संभव है कि भारत के प्रधानमंत्री को भी इस समारोह में आमंत्रित किया जाए, लेकिन अमेरिका के दो प्रमुख अखबार ‘‘वाशिंगटन पोस्ट’’ और ‘‘न्यूर्याक टाइम्स’’ में इस मुद्दे को लेकर जो विश्लेषणात्मक टिप्पणियां आई हैं। उनके आलोक में  भारतीय प्रधानमंत्री को निमंत्रण की संभावनाएं कम लग रही है। दोनों अखबारों ने यह सवाल उठाया कि क्या इस संबंध की गति में कोई रुकावट आ रही है या अमेरिकी नेतृत्व ने भारतीय प्रधानमंत्री को आमंत्रित करने का निर्णय राजनीतिक कारणों से लिया है। 
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"वाशिंगटन पोस्ट" ने भारत की विदेश नीति में आ रही नई दिशा पर भी सवाल उठाए हैं। इन मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से यह स्पष्ट होता है  कि इसके पीछे कई कारक हो सकते हैं, जिनमें मानवाधिकार, धार्मिक असहिष्णुता और भारत की आंतरिक राजनीति शामिल हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में कोई बड़ी दरार आ जाएगी।
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यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच भविष्य में किस तरह के संबंध बनेंगे, इसे लेकर कई सवाल छोड़ जाता है। हालांकि, मोदी ने ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवन से मुलाकात की थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है। लेकिन फिर भी, प्रधानमंत्री मोदी का इस समारोह में भाग लेने के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भारत के प्रधानमंत्रियों को मिलता रहा व्हाइट हाउस का न्यौता

यदि हम भारतीय नेताओं के पिछले अनुभवों पर नजर डालें, तो कुछ अवसरों पर उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, जबकि कुछ अवसरों पर यह आमंत्रण नहीं दिया गया। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, को 1953 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था। यह भारतीय-अमेरिकी कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। हालांकि, नेहरू ने उस समारोह में भाग नहीं लिया।

इसके बाद, 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रिचर्ड निक्सन के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के साथ चल रहे युद्ध के कारण इस आयोजन में भाग लेने से इंकार कर दिया। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नेताओं का अमेरिका के शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल होना केवल कूटनीतिक संबंधों पर निर्भर नहीं होता, बल्कि घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय स्थितियों पर भी आधारित होता है।

वाजपेयी भी गए थे राष्ट्रपति की ताजपोशी में

इसके बाद, 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया, और उन्होंने इस अवसर पर भाग लिया। यह समय था जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा था और दोनों देशों के बीच नई शुरुआत हो रही थी।

इसके बाद, 2001 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया, और उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में नई गर्मजोशी थी और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने की थी 2017 में शिरकत

इसके बाद, 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया, और उन्होंने इसमें भाग लिया। इस दौरान भारतीय-अमेरिकी संबंधों में और भी अधिक मजबूती आई थी। मनमोहन सिंह ने इस मौके पर अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ किया।

हालांकि, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 2013 में ओबामा के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह इसे अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण नहीं अदा कर पाए। हालांकि, मोदी ने 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया, जब वे भारत के प्रधानमंत्री बन चुके थे। इस अवसर पर मोदी और ट्रंप के बीच एक मजबूत व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध स्थापित हुआ, जो दोनों देशों के रिश्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

व्हाइट हाउस से अब भी आ सकता है मोदी को न्यौता?

अब बात करते हैं 2025 के शपथ ग्रहण समारोह की। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भारतीय प्रधानमंत्री को इस समारोह में आमंत्रित किया जाएगा या नहीं। इसके कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहला कारण कूटनीतिक प्रोटोकॉल हो सकता है।

आमतौर पर, शपथ ग्रहण समारोहों में केवल उन देशों के नेताओं को आमंत्रित किया जाता है, जिनके साथ उस समय अमेरिकी प्रशासन के गहरे कूटनीतिक संबंध होते हैं। जबकि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन यह भी हो सकता है कि अमेरिकी प्रशासन अपने प्राथमिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में विदेशी नेताओं को आमंत्रित करें।

भारत-अमरीकी सम्बन्धों पर नहीं पड़ेगा फर्क

दूसरा कारण है आमंत्रित किए जाने वाले नेताओं की संख्या। अमेरिकी शपथ ग्रहण समारोह में आमतौर पर बहुत अधिक विदेशी नेता नहीं बुलाए जाते हैं। यह आयोजन खासतौर पर अमेरिकी राजनीति और देश की आंतरिक प्रक्रियाओं पर केंद्रित होता है। इसमें विदेश नीति के बड़े चेहरे आमतौर पर शामिल नहीं होते, और इसका उद्देश्य अमेरिका के आंतरिक राजनीति और लोकतंत्र के उत्सव को मनाना होता है। तीसरा कारण समय और प्राथमिकताएं हो सकते हैं।

शपथ ग्रहण समारोह के समय, भारतीय प्रधानमंत्री के पास अन्य कूटनीतिक या घरेलू कार्य हो सकते हैं, जो उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने से रोक सकते हैं। इसके अलावा, यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री मोदी अन्य द्विपक्षीय बैठकें या महत्वपूर्ण विदेश यात्राएं करने का चुनाव करें, जो उनके कूटनीतिक एजेंडे के लिए अधिक महत्वपूर्ण हों। अंततः, यदि भारतीय प्रधानमंत्री को 2025 के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित नहीं किया जाता, तो भी यह भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती को प्रभावित नहीं करेगा। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से ही मजबूत है, और आगे भी यह कायम रहेगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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