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आसमान छूती लड़कियां: हर दिन रच रही हैं नए कीर्तिमान

Fri, 26 May 2023 01:34 PM IST
Namrata Kacholia नम्रता कचोलिया
Updated Fri, 26 May 2023 01:34 PM IST
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UPSC Result Toppers 6 Girls in Top 10, girls Creating new records every day
यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर - फोटो : Amarujala

आईएएस सिलेक्शन लिस्ट का सबसे बड़ा आकर्षण बन रही टॉप 4 लड़कियों ने सफलता के नए आयाम तो छुए ही हैं, उसके साथ ही समाज को पूरे जोश के साथ एक बड़ा संदेश दिया है, हम किसी से कम नहीं बल्कि चार कदम आगे ही हैं।

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माना मेहनत तो सबने की है लड़का हो या लड़की, परीक्षा भी सबके लिए समान ही थी पर खुशी इन चारों की इसलिए विशेष है क्योंकि समाज के कुछ लोग जो आज भी उनके घर लड़कियां होने पर घबराते हैं ,वो ये जान लें की अब वो हर पल आसमान छू रही हैं साथ ही वो अब कमा के आपको खिला भी सकती हैं। वैसे बात सिर्फ कमाने की तो है ही नहीं ,बल्कि ज़्यादा महत्वपूर्ण है आपको वह ही गर्व महसूस कराने का जो आज भी समाज के कुछ सदस्यों के हिसाब से उनको लड़के ही करा पाते हैं।
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वास्तव में ये लड़कियां नहीं जीती हैं बल्कि समाज की सोच को नई दिशा देने का इनका जज़्बा जीता है- कि अब इस तरह की सफलताओं की सभी को आदत डाल लेनी चाहिए क्यूंकि ये तो बस शुरुआत है, अंत तो अनंत है।

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हर मंजिल छू सकती हैं लड़कियां

अब जो शुरुआत हो चुकी है वो हर दूसरी लड़की के लिए प्रेरणास्पद है व समाज के हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर व्यक्ति विशेष के लिए एक जरूरी संदेश भी है कि लड़कियों को आगे बढ़ाओ, उनको खूब पढ़ाओ साथ ही उनको उनके सपने जीने की हिम्मत दो, क्यूंकि मेहनत करने का जज्बा और ताकत तो उनमें जन्मजात होती ही है जिसके दम पर वो जो चाहें वो हासिल कर सकती हैं।


पहले के दशकों में भी लड़कियों ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, पर अब रफ्तार बहुत तेज है। अब एक दो नहीं, लाखों लड़कियां नित-नए प्रोफेशन के उच्च स्तर पर पहुंच रही हैं ,अपनी प्रतिभा को साबित करते हुए लोगों को विश्वास दिला रही हैं कि लड़कियां जहां भी पहुंचेंगी अपना लोहा मनवा कर ही रहेगीं। 

अब तो वो समय भी आ चुका है, जहां वो खुद ही खुद का अच्छा बुरा सब सोच लेती हैं और उस हिसाब से आगे बढ़ना शुरू भी कर देती हैं। इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि ये मुमकिन तब ही हो पता है कि जब कुछ विरले व्यक्तित्व आप पर तब भरोसा कर लेते है जब पूरी दुनिया आपको सिर्फ ताने देने में व्यस्त होती है। ऐसे में भी नहीं हारने वाली लड़कियों की सफलता का श्रेय उस व्यक्तित्व को जरूर जाता है जिसने हर किसी से लड़कर उसका साथ दिया है।

ताने देने वाले पहले तो बहुत हैरान कर ही चुके होते हैं पर सफलता के बाद कम से कम एक काम करने की उम्मीद शायद उनसे की जा सकती है कि अब उनको सराहने में कंजूसी मत करना, तब चुप नहीं रह पाए तो कम से कम अब बोलकर उसकी सफलता को स्वीकार कीजिए, इससे तानो का प्रायश्चित अपने आप हो जाएगा।

आज भी कोई तो अपने घर में चार लड़कियां होने के बाद भी ख़ुद को सबसे सुखी मानता है और वहीं कोई ऐसा भी है जो बेटी होने से पहले ही उसको खत्म करने का विचार ले आता है ,वास्तव में इसमें लड़की का क्या कसूर? कसूर है तो उस व्यक्ति विशेष का है जो ख़ुद को इस लायक ही नहीं समझ पाता कि लड़की को अच्छे से पाल पोस कर बड़ा कर सके।

अब समाज बदल रहा है क्यूंकि लड़कियों ने खुद अपने आपकी उचित जगह को आंकना शुरू कर दिया है। पहले लड़कियां अपनी परवरिश ,परिवार के मान-सम्मान के लिए खुद को समर्पित कर दिया करती थीं, अब भी भावनाएं वही है पर अब खुद को थोड़ा अधिक महत्व देती हैं, तब जाकर अपना असली हुनर सबके सामने पूरे आत्मविश्वास के साथ ला पाती हैं।


अब क्या है ना, उसने चलना नहीं,दौड़ना सीख लिया है और अब जो भी बीच में आएगा वो खुद ही गिर जाएगा क्यूंकि वो ना रुकेगी-ना थमेगी।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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