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जीवन धारा: आखिर खुशहाल जिंदगी का रहस्य क्या है? रिश्तों को संभालकर रखने का जरूरी सूत्र याद रखना अहम

Thu, 29 May 2025 11:43 PM IST
ज्योति भास्कर रॉबर्ट वॉल्डिंगर (साथ में मार्क शुल्ज)
रॉबर्ट वॉल्डिंगर (साथ में मार्क शुल्ज) Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 29 May 2025 11:43 PM IST
सार

सफलता को अक्सर पद, वेतन व उपलब्धियों की पहचान के तराजू पर तोला जाता है, लेकिन जीवन के घुमावदार रास्तों पर कामयाबी का सार यही है कि गरीबी-अमीरी, तो आनी-जानी है, बस रिश्तों में प्यार बना रहना चाहिए।

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The secret of happy life It is important to keep reminding formula of maintaining relationships
खुशहाल जिंदगी के लिए रिश्तों को संभालकर रखें - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

शुरुआत एक सवाल से करते हैं। अगर आपको जिंदगी में केवल एक विकल्प चुनना हो, ताकि आप भविष्य के स्वास्थ्य और खुशी के लिए रास्ता निर्धारित कर सकें, तो वह क्या होगा? आखिर वह इकलौता विकल्प क्या होगा, जो यह बेहद अच्छी तरह से सुनिश्चित कर सके कि जब आप अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पीछे मुड़कर देखें, तो आपको महसूस हो कि आपने एक उम्दा जिंदगी जी है? एक सर्वेक्षण के दौरान नई पीढ़ी के लोगों से उनकी जिंदगी के सबसे अहम लक्ष्य के बारे में पूछा गया था। 76 फीसदी ने कहा था कि अमीर बनना उनका पहला लक्ष्य है। 50 फीसदी ने कहा था कि उनका प्रमुख लक्ष्य प्रसिद्ध होना है। एक दशक बाद जब यह पीढ़ी कुछ वक्त गुजारकर वयस्क हो चुकी थी, तो चंद सर्वेक्षणों में उनसे दोबारा यही सवाल पूछे गए। अब लक्ष्यों की सूची में प्रसिद्धि पाना कुछ नीचे जा चुका था, लेकिन शीर्ष लक्ष्यों में धन कमाना, कामयाब कॅरिअर और कर्जमुक्त होने जैसी बातें अब भी बरकरार थीं।

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जिंदगी की सफलता को अक्सर पद, वेतन और उपलब्धियों की पहचान के तराजू पर तोला जाता है, लेकिन खुशहाल जिंदगी का राज तो कुछ और ही है। इसे हम हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोध में शामिल हुए दंपती-रोजा और हेनरी-के जीवन से अच्छे से समझ सकते हैं। बचपन की परेशानियों से लेकर पहले प्यार और जिंदगी के अंतिम दिनों तक, इस दंपती की राह लंबी और घुमावदार रही। विवाह की पचासवीं वर्षगांठ से पहले दोनों अपनी जिंदगी को लेकर जानकारी कुछ यों देते हैं। हेनरी के पिता को शराब की लत थी, तो बचपन में ही उनके ऊपर परिवार का भार आ गया।
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हेनरी जब 20 वर्ष के हुए, तो उनके पिता ने उनकी मंगेतर से कह दिया कि तुम्हारी सगाई की अंगूठी 300 डॉलर की बनी, जिसके कारण हमारे परिवार पर अनावश्यक बोझ आ गया। हेनरी के परिवार की आर्थिक तंगी देखकर मंगेतर ने सगाई तोड़ दी। हेनरी पिता से दूर कमाने के लिए चले गए। जहां, उनकी मुलाकात रोजा से हुई। एक वर्ष बाद दोनों ने शादी कर ली। दोनों का बचपन आर्थिक तंगियों से गुजरा था। उनके पांच बच्चे हुए, लेकिन एक बच्चे को पोलियो की बीमारी हो गई, जिसकी देखभाल की वजह से हेनरी को ऑफिस से छुट्टियां लेनी पड़ीं, जिससे उनकी नौकरी चली गई।
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परिवार की गाड़ी चलाने के लिए रोजा ने नौकरी ढूंढ ली। रोजा के अच्छे व्यवहार की वजह से उनकी नौकरी स्थायी हो गई और वहीं से सेवानिवृत्त हुईं। हेनरी को भी कुछ प्रयासों से नौकरी मिल गई। जीवन के सत्तरवें दशक में जब शोधकर्ताओं ने उनके जीवन के तमाम पहलुओं पर चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि हमारा जीवन भी तमाम दंपतियों की तरह रहा, लेकिन हम दोनों बहुत खुश हैं, क्योंकि तमाम मुसीबतों को सहने के बावजूद हम दोनों के बीच प्यार में कोई कमी नहीं आई। हेनरी कहते हैं, ‘जीवन के घुमावदार और मोड़ भरे रास्तों की कामयाबी का सार यही है कि गरीबी-अमीरी, तो आती-जाती रहती है, बस प्यार बना रहना चाहिए।’ रोजा के निधन के बमुश्किल छह सप्ताह बाद हेनरी भी गुजर गए, लेकिन उन दोनों का एक-दूसरे के प्रति समर्पण आजीवन बरकरार रहा।   -बेस्ट सेलर पुस्तक ‘द गुड लाइफ’ के अनूदित अंश


सूत्र- रिश्तों को संभालकर रखें
कॅरिअर, वर्जिश और स्वस्थ आहार जीवन में काफी मायने रखते हैं, लेकिन इनसे सच्ची खुशहाली संभव नहीं है। सच्ची खुशी का एक ही सूत्र है अच्छे रिश्ते। ये ही हमें स्वस्थ और खुश, दोनों रखते हैं। फिर चाहे दौर कैसा भी हो। ऐसा कोई भी इन्सान नहीं है, जिसके जीवन में उतार-चढ़ाव न आते हों, लेकिन जो अपने रिश्तों को संभालकर रखता है, वही कामयाब इन्सान कहलाता है।

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