बालकनी से नजर आती पक्षियों की अनूठी दुनिया और प्रकृति की सुंदर रचना

Shobita Asthana Published by: शोभिता आस्थाना
Updated Wed, 09 Sep 2020 09:41 AM IST
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सुबह आंख खुलने से पहले ही मुझे एक पक्षी का मधुर गान सुनाई दिया।
सुबह आंख खुलने से पहले ही मुझे एक पक्षी का मधुर गान सुनाई दिया। - फोटो : शोभिता अस्थाना

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मानव अपनी व्यस्त दिनचर्या में कई बार अपने आसपास रहने वाले रंगीन और रहस्यमय पक्षियों  की ओर  देखना भूल जाता है। वाहनों के कोलाहल में कोयल की मीठी कूक सुनाई तो देती है परंतु हम रुक कर उसके मधुर गान का आनंद नहीं ले पाते हैं।  
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इस बार हर वर्ष की तरह बसंत के आते ही सेमल के ऊंचे वृक्षों पर गहरे लाल रंग के फूल खिलने लगे और फूलों का रस पीने के लिए भौरे, तितलियां तथा अनेकों पक्षी वृक्षों को सुसज्जित करने लगे। 



प्रकृति हर वर्ष की तरह अपनी क्रिया में लीन थी, कहीं वृक्षों पर नई कोपले फूट रही थींं तो कहीं पीपल पत्ते बिखेर रहा था। छोटा बसंत पक्षी अपनी लाल-पीली कलगी और लाल कंठ को दमकाता मानोंं बसंत राग का रियाज कर अपने साथी के संग प्रेम आलाप कर रहा हो।     

परंतु कुछ तो अलग था इस बार, वातावरण में एक चुप्पी सी थी। वायुयान और सड़कोंं के वाहन सब रुक गए। बड़े बसंत पक्षी की टुक-टुक का स्वर इस शांत वातावरण में गूंजने लगा। कोरोना बीमारी के कारण बहुत सारे मानव अपनी दौड़ धूप छोड़ अपने घरोंं में बैठ गए। घर रहने पर अपने घरों की बालकनी और छज्जोंं से प्रकृति का खिलना एक नई दृष्टि से देखने लगे।

सुबह आंख खुलने से पहले ही मुझे एक पक्षी का मधुर गान सुनाई दिया, उठी तो अभी अंधेरा था, मैं मन में विचार करने लगी की प्रभात की इस बेला में कौन सा पक्षी गा रहा है? उजाला होते ही बालकनी से देखा की गुलमोहर की डाल पर दयाल पक्षी कुछ नया गान गा रहा है।

हर दिन एक नया राग? दयाल तो पक्षियों में किसी तानसेन से कम नहीं। प्रेम आलाप में वह मादा को लुभाने के लिए नित नया गान सुनाता है।  

चाय बनाकर मैं अपनी दूरबीन तथा कैमरा ले कर बालकनी  में बैठ गई। सोचा की समाचार-पत्र पढ़ने की जगह आज पक्षियों का अवलोकन किया जाए। मेरे घर के सामने सड़क पार बगीचे में जामुन, नीम, अमलतास, शहतूत तथा पीपल के कुछ वृक्ष हैं।

पीपल के पेड़ के फुगे पर एक गुलदुम बुलबुल बैठे अपनी चोंच से अपने पंख साफ कर रही थी मानोंं सुबह उठ सज संंवरकर कहीं जाने की तैयारी में हो। तभी पास की डाल पर हरियल अपने धीमे स्वर में ऐसे लगा की बुलबुल से कुछ पूछ रहा हो,"क्या हाल है बहना आज कहां की तैयारी है?"
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बहुत देर तक कठफोड़ा नीम के तने पर गोल-गोल घूम नीचे से ऊपर विश्लेषण करता रहा...

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