Happy New Year 2025: नए साल का आगाज करती नई आशाएं
Happy New Year 2025: उम्मीदों के गुलदस्ते से लबरेज आने वाला साल '2025' का आगाज पूरी कायनात में जल्द ही हो जाएगा। आने वाले साल के लिए लोगों ने नए-नए संकल्प लगभग तैयार कर लिए होंगे।
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अब भी लगता है कि दुनिया में फरिश्तों का हुजूम मौजूद है! इस कायनात के इंसानी बाशिन्दों ने अपनी रहनुमाई से साबित कर दिया है। नेकी अभी कायम है और इंसानियत अभी जिन्दा है! ऐसी अनेक मिसालें इतिहास की गवाह बन चुकी हैं। लोगों में बची हुई इंसानियत, मोहब्बत और अपनेपन के जज्बे को देख लगता है दुनिया यकीनन अभी भी बहुत खूबसूरत है। अच्छाई हर शख्स के भीतर मौजूद है। बस उसे हिम्मत से उभारने की जरूरत है।
महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, सूफियां और सन्तों की इस सरजमीं को खुशियों के गुलिश्ता में तब्दील करने का जिम्मा हम भारतीयों का ही है। नया साल इन्हीं उम्मीदों के साथ दस्तक देने को तैयार है। चलो इस कायनात में हर जगह नन्हीं कोपले लगाते हैं, यह चमन है हमारा इसे प्यार से सजाते हैं।
दिसंबर का जिम्मेदार महीना साल भर का लेखा-जोखा जनवरी को सौंपने के लिए सर्दी की बर्फीली मुस्कुराहट के साथ-साथ जनवरी का पूरी गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए तैयार है। साथ ही ऐसा मालूम होता है जैसे जनवरी को जिम्मेदारियों की ताकीद भी सौप रहा हो मानो कह रहा हो कि अच्छे से रखना सब.....पूरा व्यवस्थित, जैसा मैने सौपा है वैसे ही आने वाले साल को सौपना।
इत्मेनान और सुकून की विदाई चाहता दिसंबर, मुझे हमेशा परिवार के बुर्जुग सा नजर आता है जो आने वाली पीढ़ियों को नई जिम्मेदारियों को सौपते वक्त विश्वास और भरोसा का चेक साइन करवाकर अपने पास रख लेना चाहत हो। मानों हम से कह रहे हों कि आने वाली पीढ़ियों को सही राह दिखाने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी पीढ़ी की है।
नए साल की एक खासियत यह भी है कि उसके पास सबके लिए अपार संभावनाएं मौजूद रहती है हम अपने संकल्पों के जरिए उन पर अमल करके न केवल अपने जीवन में बल्कि दूसरों की जिन्दगी में भी सकारात्मकता का दीपक जला सकते हैं। एक नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। खुली आंखों से सपनों को देखें या फिर आंखें बंद करके, सपने तभी सच होंगे जब हम उन्हें पूरा करने की कोशिशों में अपने मौजूदा समय को गवाएगें।
’मेहनत’ से सब कुछ बनाया जा सकता है फिर वो तस्वीर हो या तकदीर। सपनों को मेहनत और विश्वास का साथ मिल जाए तो बहुत कुछ बदल सकता है। नए साल का आगाज हमें इन्हीं सम्भावनाओं की ओर लेकर जाने की ताकीद है। कुछ बड़ा करने के लिए हमें मेहनत की फेहरिश्त बडी़ करनी होगी। तभी सपनें सच होगें उनमें जान भी होगी और ऊंची उड़ान भी।
आने वाला साल भी यकीनन युवाओं का ही है। तकनीकी और विकास की बुलेट ट्रेन किसी भी देश के युवाओं की मेहनत पर ही रफतार पकड़ सकती है। भविष्य को संभावनाओं से भरने में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका है। भारत तो युवाओं का देश है यदि इन युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को सही दिशा प्राप्त हो जाए तो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के तौर पर स्थापित होने से कोई रोक नहीं सकता।
नए साल के संकल्पों में हमें एक वादा पृथ्वी से भी करना होगा कि हम पर्यावरण की सुरक्षा और रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाएगें। दिल्ली के आस-पास की जहरीली हवा पहले दिल्ली अब एनसीआर और जल्द ही आगे का रूख इख्तेयार कर लेगी। आज से 100 साल पहले अगर हम किसी से पीने का पानी बेचने की बात करते तो यकीनन वो हमें ऐसा कहने पर गुनहगार का तमगा थमा देता। किसी प्यासे की प्यास बुझाना सबसे बड़ी नेकी कमाने का जरिया हुआ करता था। साफ पानी की पहुंच हर एक तक थी।
नदी, तालाब और कुओं का पानी इतना साफ और मीठा होता था कि फिल्टर पानी की कल्पना करना दूर-दूर तक ख्याली कल्पना भी न थी। जैसे-जैसे हमारी आधुनिकतावादी समझदार पीढ़ी आगे बढ़ी पर्यावरण को दूषित और दूषित करने का काम करने की जद्दोजहद में लग गई। साथ ही इसका ठीकरा एक दूसरे के ऊपर फोड़ना शुरू कर दिया। कभी-कभी लगता है कि वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब लोग मिनरल वॉटर के साथ-साथ ऑक्सीजन सिलेण्डर भी लेकर बाहर निकलेंगे। क्यों न नए साल में एक वादा पर्यावरण की सांसें लौटाने का भी किया जाए? आखिर ये हवा वापस हमारे पास ही तो आने वाली है।
आने वाला साल निश्चित ही सबके लिए बहुत कुछ लेकर आने वाला है। बस जरूरत है तो धैर्य, साहस और ठेर सारी मेहनत की। बीते साल की कुछ घटनाएं मन को बेचैन करने वाली रहीं। जहां कोरोने ने लाख मिन्नतें करने के बावजूद जिंदगियां नहीं बख्शी। मौत के पंजों ने अनगिनत घोसलों को वीरान कर दिया। सांसें अनमोल हैं, यह सबको समझाया।
जाते-जाते भी कभी बदलते वायरस के नामों से कभी पुरानी बीमारियों में नई दहशत के साथ कई चेहरों की मुस्कुराहट हमेंशा के लिए छीन बताया की स्वस्थ शरीर कुदरत का बख्शा नायाब तोहफा है। इसे पूरी जिम्मेदारी से संभालने की आवश्यकता है। फिर भी 2024 के कुछ हताश, निराशा भरे आत्महत्या के कदम मन को दहलाने वाले रहे।
जीवन यूं समाप्त करने का नाम नहीं बल्कि भविष्य में नई संभावनाएं तलाश करने का नाम है। कभी-कभी सोचती हूं हमने कभी किसी जानवर को आत्महत्या करते क्यों नहीं देखा? क्या वो इंसानों से ज्यादा समझदार हैं? या उन्हें हम इंसानों से ज्यादा, भविष्य की चिंता, अगले दिन का बंदोबस्त, बच्चों की परवरिश इन सारे इंतेजामों पर ईश्वर पर अटूट विश्वास है। आने वाला साल सकारात्मक सोच के साथ जल, जीवन, जंगल, जीव और जलवायु के संरक्षण वाला हो यही कोशिशों के साथ आगे बढ़ने वाला हो।
हर व्यक्ति की स्वयं की, समाज की और राष्ट्र के प्रति कई जिम्मेदारियां होती हैं। ये छोटे-छोटे पल उन्हीं जिम्मेदारियों का आभास कराने का काम करते हैं। दुनिया भर में डर, दहशत, आतंक और दहशत की खबरें युद्ध जैसा माहौल बनाने का काम कर रही हैं। युद्ध का दौर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से दिखाई दे रहा है।
हर बड़ी घटना के पीछे बहुत छोटी सी वजह मौजूद रहती है जो हरगिज युद्ध के लिए नहीं लेकिन युद्ध की वजह जरूर बनती है। इतिहास के हुए बड़े से बड़े युद्धों को देखें तो उसकी शुरूआत बहुत छोटी वजह से होती है। इसीलिए दुनिया को हमेशा से युद्ध की नहीं बुद्ध की आवश्यकता महसूस हुई और हम भारतीय तो गौरवांवित हैं कि हम बुद्ध की धरती पे रहते हैं। इतिहास गवाह है, दुनिया में शांति का परचम हमने लहराया है।
साल 2025 इसी शान्ति का हिमायती है। हम भारतीयों ने अमन का पैगाम दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाया है। अपने इस साल के संकल्पों में एक संकल्प अमन का भी याद रखना होगा। यहीं हमारी तरक्की की पहचान रही है। अपनी पहचान को कायम रखना हमारी अहम् जिम्मेदारी है। तभी भविष्य की ऊँची उड़ान भरना संभव है। आइए नए साल का आगाज नई आशाओं के साथ करें । जय हिन्द! जय भारत!
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