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शासन का आदेश नहीं मानने पर सजा नहीं, पदोन्नति के इनाम से नवाजी गईं!
सार
मध्य प्रदेश शासन ने हाल ही में आईएएस अधिकारियों के जो तबादला आदेश जारी किए हैं, उसमें एक पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक गलियारों में बड़ी चर्चा है। मध्य प्रदेश में सर्वोच्च प्राथमिकता वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की कमान पिछले कई वर्षों में पहली बार सचिव स्तर के अधिकारी को दे दी गई।
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मध्यप्रदेश में सियासी और प्रशासनिक हलचल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक महिला अधिकारी को प्रशासकीय आधार पर दिल्ली से भोपाल स्थानांतरित किया गया, किंतु वे नई जगह पर उपस्थित नहीं हुईं। लेकिन, मोहन सरकार की दरियादिली देखिए कि उन्हें आदेश नहीं मानने पर सजा देना तो दूर उन्हें पदोन्नति का तोहफा दे दिया गया। हम बात कर रहे हैं भारतीय वन सेवा में 1994 बैच की आईएफएस अधिकारी बिंदु शर्मा की। उन्हें अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक नई दिल्ली से स्थानांतरित कर भोपाल में पदस्थ किया गया था, लेकिन वे स्थानांतरित पद पर उपस्थित नहीं हुईं। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसी बात का हवाला देते हुए सरकार ने उनके आदेश को आंशिक संशोधित करते हुए उन्हें अब अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पद से पदोन्नत कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बना दिया और उन्हें वन मुख्यालय भोपाल में पदस्थ कर दिया गया।
बड़े विभाग की कमान जूनियर अधिकारी को!
मध्य प्रदेश शासन ने हाल ही में आईएएस अधिकारियों के जो तबादला आदेश जारी किए हैं, उसमें एक पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक गलियारों में बड़ी चर्चा है। मध्य प्रदेश में सर्वोच्च प्राथमिकता वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की कमान पिछले कई वर्षों में पहली बार सचिव स्तर के अधिकारी को दे दी गई। मध्य प्रदेश शासन में शायद यह इकलौता विभाग है जहां, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के पास विभाग का दायित्व नहीं है। इस विभाग में भी पहले अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी पदस्थ किए जाते रहे हैं। जीबी रश्मि 2005 बैच की अधिकारी होकर सचिव स्तर की हैं। उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग का सचिव बनाकर विभाग की कमान सौंप दी गई है, जबकि इसी स्थान पर हाल ही के वर्षों में पहले 1994 बैच के तत्कालीन प्रमुख सचिव (अब अपर मुख्य सचिव) संजय शुक्ला और दीपाली रस्तोगी और इसी बैच की अपर मुख्य सचिव स्तर की अधिकारी रश्मि अरुण शमी पदस्थ रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक गलियारों में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि सरकार की आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि लाडली बहना योजना योजना के कारण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विभाग में सचिव जैसे जूनियर अधिकारी को विभाग का नंबर वन अधिकारी बनाना पड़ा?
चर्चा में है मनु श्रीवास्तव को खेल विभाग से हटाना!
मध्य प्रदेश शासन द्वारा हाल ही में किए गए आईएएस अधिकारियों के तबादलों में एक नाम अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का भी था, जिनसे खेल और युवा कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस लिया गया। जिस रात यह तबादला आदेश हुआ उसके अगले दिन ही खेल विभाग का प्रदेश सरकार का साल का सबसे बड़ा आयोजन खेल अवॉर्ड समारोह होना था। इसके मुख्य अतिथि स्वयं मुख्यमंत्री थे। इस समारोह में खेल विभाग द्वारा प्रदेश की खेल हस्तियों को सर्वोच्च खेल अवॉर्ड विक्रम, एकलव्य, विश्वामित्र और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिए गए। समारोह की एक रात पहले उन्हें हटाने को लेकर प्रशासनिक गलियारों में अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। आयोजन के अगले दिन एक अवॉर्ड पर कोर्ट की रोक ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
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नरेंद्र सिंह तोमर और विधानसभा सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब पिछले चार सत्र पूरे-पूरे चले और मानसून सत्र भी 6 अगस्त को संपन्न हो गया। इसका पूरा श्रेय विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को दिया जा सकता है। तोमर वरिष्ठ नेता हैं। सभी उनके प्रति विशेष सम्मान भी रखते हैं। उनके द्वारा समन्वय के साथ समय-समय पर दोनों दलों भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बातचीत का परिणाम है कि विधानसभा सत्र के दौरान छोटे-मोटे विवादों को छोड़कर विधानसभा सामान्य रूप से चली और सभी विधेयकों पर दोनों पार्टी के विधायकों ने चर्चा की। इसके पहले की सरकारों में शायद ही कोई सत्र ऐसा हो जो पूरी अवधि तक चल पाया हो, कई सत्र तो आधे में ही समाप्त हो जाते थे।
छोटे से कस्बे के बड़े घोटाले, प्रशासन सुस्ती पर सवाल!
अलीराजपुर जिले के छोटे से उदयगढ़ कस्बे के विकासखंड शिक्षा कार्यालय में 17 करोड़ रुपये के गबन का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है और अब वेतन भत्तों के वितरण में 1.27 करोड़ रुपये की बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है। सूत्रों की मानें तो इस नए मामले की जानकारी मिलने पर भोपाल से कोष एवं लेखा आयुक्त ने 25 जुलाई को अलीराजपुर कलेक्टर को तत्काल जांच और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश ईमेल व व्हाट्सएप पर दिए, लेकिन कलेक्टर ने मीडिया को बताया कि उन्हें कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला और मामले को पुराना बताते हुए जांच से इंकार कर दिया। स्थिति बिगड़ी तो कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेजी, जिस पर इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह ने तीन शिक्षा अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर कार्रवाई के निर्देश दिए। बावजूद इसके, कलेक्टर ने अब तक किसी अधिकारी या बाबू के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की और शासन के निर्देश के बाद भी आज तक एफआईआर भी दर्ज नहीं करवाई गई।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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बड़े विभाग की कमान जूनियर अधिकारी को!
मध्य प्रदेश शासन ने हाल ही में आईएएस अधिकारियों के जो तबादला आदेश जारी किए हैं, उसमें एक पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक गलियारों में बड़ी चर्चा है। मध्य प्रदेश में सर्वोच्च प्राथमिकता वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की कमान पिछले कई वर्षों में पहली बार सचिव स्तर के अधिकारी को दे दी गई। मध्य प्रदेश शासन में शायद यह इकलौता विभाग है जहां, अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के पास विभाग का दायित्व नहीं है। इस विभाग में भी पहले अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी पदस्थ किए जाते रहे हैं। जीबी रश्मि 2005 बैच की अधिकारी होकर सचिव स्तर की हैं। उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग का सचिव बनाकर विभाग की कमान सौंप दी गई है, जबकि इसी स्थान पर हाल ही के वर्षों में पहले 1994 बैच के तत्कालीन प्रमुख सचिव (अब अपर मुख्य सचिव) संजय शुक्ला और दीपाली रस्तोगी और इसी बैच की अपर मुख्य सचिव स्तर की अधिकारी रश्मि अरुण शमी पदस्थ रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक गलियारों में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि सरकार की आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि लाडली बहना योजना योजना के कारण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विभाग में सचिव जैसे जूनियर अधिकारी को विभाग का नंबर वन अधिकारी बनाना पड़ा?
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चर्चा में है मनु श्रीवास्तव को खेल विभाग से हटाना!
मध्य प्रदेश शासन द्वारा हाल ही में किए गए आईएएस अधिकारियों के तबादलों में एक नाम अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का भी था, जिनसे खेल और युवा कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस लिया गया। जिस रात यह तबादला आदेश हुआ उसके अगले दिन ही खेल विभाग का प्रदेश सरकार का साल का सबसे बड़ा आयोजन खेल अवॉर्ड समारोह होना था। इसके मुख्य अतिथि स्वयं मुख्यमंत्री थे। इस समारोह में खेल विभाग द्वारा प्रदेश की खेल हस्तियों को सर्वोच्च खेल अवॉर्ड विक्रम, एकलव्य, विश्वामित्र और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिए गए। समारोह की एक रात पहले उन्हें हटाने को लेकर प्रशासनिक गलियारों में अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। आयोजन के अगले दिन एक अवॉर्ड पर कोर्ट की रोक ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
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नरेंद्र सिंह तोमर और विधानसभा सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब पिछले चार सत्र पूरे-पूरे चले और मानसून सत्र भी 6 अगस्त को संपन्न हो गया। इसका पूरा श्रेय विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को दिया जा सकता है। तोमर वरिष्ठ नेता हैं। सभी उनके प्रति विशेष सम्मान भी रखते हैं। उनके द्वारा समन्वय के साथ समय-समय पर दोनों दलों भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बातचीत का परिणाम है कि विधानसभा सत्र के दौरान छोटे-मोटे विवादों को छोड़कर विधानसभा सामान्य रूप से चली और सभी विधेयकों पर दोनों पार्टी के विधायकों ने चर्चा की। इसके पहले की सरकारों में शायद ही कोई सत्र ऐसा हो जो पूरी अवधि तक चल पाया हो, कई सत्र तो आधे में ही समाप्त हो जाते थे।
छोटे से कस्बे के बड़े घोटाले, प्रशासन सुस्ती पर सवाल!
अलीराजपुर जिले के छोटे से उदयगढ़ कस्बे के विकासखंड शिक्षा कार्यालय में 17 करोड़ रुपये के गबन का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है और अब वेतन भत्तों के वितरण में 1.27 करोड़ रुपये की बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है। सूत्रों की मानें तो इस नए मामले की जानकारी मिलने पर भोपाल से कोष एवं लेखा आयुक्त ने 25 जुलाई को अलीराजपुर कलेक्टर को तत्काल जांच और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश ईमेल व व्हाट्सएप पर दिए, लेकिन कलेक्टर ने मीडिया को बताया कि उन्हें कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला और मामले को पुराना बताते हुए जांच से इंकार कर दिया। स्थिति बिगड़ी तो कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेजी, जिस पर इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह ने तीन शिक्षा अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर कार्रवाई के निर्देश दिए। बावजूद इसके, कलेक्टर ने अब तक किसी अधिकारी या बाबू के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की और शासन के निर्देश के बाद भी आज तक एफआईआर भी दर्ज नहीं करवाई गई।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।