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दूसरा पहलू: जहां श्रमिकों को मिलता है 'जलवायु अवकाश', वेतन भी नहीं कटता; दुनिया के पहले ऐसे देश को जानिए
Thu, 28 Aug 2025 08:23 AM IST
ज्योति भास्कर
सुधीर कुमार, अमर उजाला।
सुधीर कुमार, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 28 Aug 2025 08:23 AM IST
सार
स्पेन दुनिया का ऐसा पहला देश है, जो श्रमिकों को चार दिन का सवैतनिक जलवायु अवकाश देता है। इस देश ने यह कदम तब उठाया है, जब पिछले साल नवंबर-दिसंबर में वहां आए तूफान और बाढ़ ने 225 लोगों की जान ले ली थी। ‘जलवायु अवकाश’ की इस अनोखी पहल ने वैश्विक समुदाय का ध्यान जलवायु परिवर्तन से श्रमिकों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर आकृष्ट किया है।
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स्पेन में श्रमिकों को मिलता है ‘जलवायु अवकाश’
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
स्पेन श्रमिकों के लिए ‘जलवायु अवकाश’ का प्रावधान लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इसके तहत चरम मौसमी दशाओं में श्रमिक अधिकतम चार दिनों की सवैतनिक छुट्टी ले सकेंगे। स्पेन की यह पहल आपात जलवायविक स्थितियों में श्रमिकों के जीवन और अधिकार की रक्षा करने के साथ ही उन्हें कार्यस्थल पर किसी भी हाल में पहुंचने की बाध्यता से भी राहत पहुंचाती है।
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स्पेन ने यह कदम तब उठाया है, जब पिछले साल नवंबर-दिसंबर में वहां आए तूफान और बाढ़ ने 225 लोगों की जान ले ली थी। कठोर मौसमी दशाओं और प्रशासन द्वारा ‘रेड अलर्ट’ जारी किए जाने के बाद भी श्रमिकों को काम पर बुलाने पर कंपनियों और नियोक्ताओं की न सिर्फ आलोचना हुई, बल्कि सरकार से श्रमिकों के लिए जलवायु अनुकूल नीतियों को लागू करने की मांग भी की गई।
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स्पेन के श्रम मंत्रालय ने इन मांगों का स्वागत करते हुए श्रम-कानून में संशोधन करके आपदा, कठोर मौसमी दशाओं और जलवायु आपातकाल जैसी स्थितियों में श्रमिकों को अधिकतम चार दिनों की छुट्टी लेने का अधिकार प्रदान किया। इस छुट्टी के लिए उन्हें पूरा वेतन दिए जाने का प्रावधान भी है। यह पहल न सिर्फ श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, बल्कि मानवाधिकार और सामाजिक न्याय जैसे मानवीय मूल्यों से गहरा सरोकार भी रखती है।
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जलवायु परिवर्तन समाज के सभी वर्गों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। दुर्भाग्यवश, हाशियाकृत आबादी पर इसके दुष्प्रभावों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि ने श्रमिकों के रोजगार, कार्य क्षमता, कार्यावधि, उत्पादकता, स्वास्थ्य और जीवन को प्रभावित किया है। चरम मौसमी घटनाओं के कारण जब आम लोग घर से बाहर निकलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते हैं, वैसी स्थिति में भी श्रमिक रोजगार की खोज में दर-दर भटक रहे होते हैं।
निम्न पर्यावरणीय दशाओं में कार्य करने को विवश श्रमिक स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवन की हानि के रूप में बड़ी कीमत चुकाता है। बहरहाल, ‘जलवायु अवकाश’ की इस अनोखी पहल ने वैश्विक समुदाय का ध्यान जलवायु परिवर्तन से श्रमिकों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर आकृष्ट किया है। श्रमिक किसी भी देश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। जलवायु परिवर्तन ने इस तबके को गहरे तौर पर प्रभावित किया है। ऐसे में समाज व सरकार को उनके जीवन एवं अधिकार के बारे में सोचना ही होगा।