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जीवन धारा: असली आनंद का रहस्य स्वयं से परे है; दूसरों के लिए जीना ही सार्थक सूत्र

Sri Sri Ravi Shankar श्री श्री रविशंकर 
Updated Wed, 08 Jul 2026 06:27 PM IST
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सार
जब आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति या उद्देश्य होता है, जिसके लिए आप कुछ करना चाहते हैं, तो जीवन में स्वाभाविक रूप से उत्साह बना रहता है। तब हर दिन जीने का एक कारण होता है और मन अधिक प्रसन्न रहता है।
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Secret to true joy lies beyond the self living for others is the key to a meaningful existence
दूसरों के लिए भी जिएं - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

मैं हमेशा कहता हूं कि जब आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति या उद्देश्य होता है, जिसके लिए आप कुछ करना चाहते हैं, तो जीवन में स्वाभाविक रूप से उत्साह बना रहता है। तब हर दिन जीने का एक कारण होता है और मन अधिक प्रसन्न रहता है। लेकिन, यदि हमारा पूरा ध्यान केवल स्वयं को खुश रखने पर केंद्रित हो जाए, तो धीरे-धीरे भीतर खालीपन बढ़ने लगता है और अवसाद की संभावना भी बढ़ जाती है।



अवसाद का मूल भाव ही यही है-‘मेरे बारे में क्या?’ जबकि जीवन का वास्तविक आनंद तब शुरू होता है, जब यह प्रश्न बदलकर ‘मैं दूसरों के लिए क्या कर सकता हूं?’ बन जाता है। इसीलिए, मैं सेवा को केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि आंतरिक उपचार का माध्यम मानता हूं। जब व्यक्ति किसी जरूरतमंद के लिए कुछ करने का संकल्प लेता है, तो उसका ध्यान अपनी सीमित समस्याओं से हटकर एक बड़े उद्देश्य की ओर चला जाता है। यही कारण है कि जहां सेवा, त्याग और सामुदायिक सहभागिता की भावना मजबूत होती है, वहां मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती हैं।


मेरे अनुसार, अवसाद केवल मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि जीवन को सीमित दृष्टि से देखने का परिणाम भी है। जब व्यक्ति को लगता है कि जीवन में कोई उद्देश्य नहीं रहा, तब निराशा उसे घेरने लगती है। वहीं, जब हमारी प्राणशक्ति बढ़ती है, तो वही जीवन उत्साह, आनंद और नई संभावनाओं से भर उठता है।

इसलिए, मैं हमेशा सही श्वास-प्रश्वास, ध्यान और सकारात्मक संगति पर जोर देता हूं, क्योंकि ये केवल मन को शांत नहीं करते, बल्कि जीवन ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। अक्सर हम तुच्छ चिंताओं में इतने उलझ जाते हैं कि अपनी विशाल संभावनाओं को ही भूल जाते हैं। जैसे, आंख के सामने आया धूल का छोटा-सा कण पूरी दृष्टि धुंधली कर देता है, उसी प्रकार छोटी चिंताएं हमारी चेतना को सीमित कर देती हैं। लेकिन, जैसे ही सोच व्यापक होती है, वही समस्याएं अवसर के रूप में दिखाई देने लगती हैं।

मैं मानता हूं कि जब जीवन अर्थहीन लगने लगता है, तभी भीतर खालीपन जन्म लेता है और यही आगे चलकर अवसाद का रूप ले सकता है। विशेष रूप से युवाओं में आदर्शों, प्रेरणा और बड़े उद्देश्य का अभाव इस चुनौती को और गहरा बना रहा है। इसलिए, आध्यात्मिकता जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। यह किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि आशा, प्रेरणा और आत्मविश्वास जगाने का मार्ग है। ध्यान, सेवा, ज्ञान और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने मनोबल को मजबूत करता है और जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझने लगता है। जब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तभी भीतर गहरी शांति का अनुभव होता है। यही आत्मबोध, आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति हमें निराशा और अवसाद से बाहर निकलने की शक्ति प्रदान करते हैं।

सूत्र: दूसरों के लिए भी जिएं
जब जीवन स्वयं तक सीमित न रहकर सेवा, प्रेम और किसी बड़े उद्देश्य से जुड़ जाता है, तब भीतर नई ऊर्जा, आशा व आनंद का उदय होता है। ध्यान, सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन और सामाजिक योगदान हमें छोटी चिंताओं से ऊपर उठाते हैं। तब हर दिन केवल जीतने का नहीं, बल्कि अपने साथ दूसरों के जीवन में भी प्रकाश फैलाने का अवसर बन जाता है।

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